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Bareilly News: तौकीर रजा के आह्वान पर दिल्ली में 24 को सुबह 10 बजे से धरना-प्रदर्शन
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बरेली। एक दिन पहले जयपुर में हुई कॉन्फ्रेंस में 24 को दिल्ली में धरना-प्रदर्शन का एलान करने वाले इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेसवार्ता कर फिर से यही बात दोहराई। देशभर के मुस्लिम संगठनों को आमंत्रित करते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी के खिलाफ यह प्रदर्शन किया जाएगा। आईएमसी के मीडिया प्रभारी मुनीर इदरीसी ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए रामलीला मैदान की अनुमति मिल चुकी है, जो सुबह दस बजे से शुरू होगा।
मौलाना तौकीर ने कहा कि रसूल-ए-आजम की शान में गुस्ताखियां की जा रही हैं। इससे हर आशिक-ए-रसूल बेहद तकलीफ में है। मुस्लिम नौजवानों में गुस्सा है। हमने हमारे उलेमाओं ने नौजवानों को रोक रखा है। उन्होंने कहा कि गुस्ताखियां करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अब वक्त आ गया है कि मुसलमान रसूल-ए-आजम के लिए संविधान के दायरे में तिरंगा लेकर शांति के साथ विरोध दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि हम कभी हिंदू-मुसलमान की बात नहीं करते लेकिन अपने हक की आवाज उठाने पर हमें विलेन बनाया जाता है। हम सरकार की न इंसाफी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जो रसूल-ए-आजम के गुस्ताखों को संरक्षण दे रही है। दूसरी तरफ हिंदू भाइयों को यह सोचना चाहिए के उनके नौजवान बच्चों को कौन लोग सिखा रहे हैं कि किसी मस्जिद पर चढ़ जाओ, भगवा झंडा लगा दो, मस्जिदों के सामने डीजे पर अभद्र गाने बजाओ, दाढ़ी वाले बुजुर्गों के साथ ट्रेन में हादसे करने वालों के पीछे कौन है। इसपर सोचना चाहिए, नफरतों से कुछ हासिल नहीं होने वाला, इससे मुल्क की बदनामी होती है। संवाद
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मौलाना तौकीर ने कहा कि रसूल-ए-आजम की शान में गुस्ताखियां की जा रही हैं। इससे हर आशिक-ए-रसूल बेहद तकलीफ में है। मुस्लिम नौजवानों में गुस्सा है। हमने हमारे उलेमाओं ने नौजवानों को रोक रखा है। उन्होंने कहा कि गुस्ताखियां करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अब वक्त आ गया है कि मुसलमान रसूल-ए-आजम के लिए संविधान के दायरे में तिरंगा लेकर शांति के साथ विरोध दर्ज कराएं।
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उन्होंने कहा कि हम कभी हिंदू-मुसलमान की बात नहीं करते लेकिन अपने हक की आवाज उठाने पर हमें विलेन बनाया जाता है। हम सरकार की न इंसाफी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जो रसूल-ए-आजम के गुस्ताखों को संरक्षण दे रही है। दूसरी तरफ हिंदू भाइयों को यह सोचना चाहिए के उनके नौजवान बच्चों को कौन लोग सिखा रहे हैं कि किसी मस्जिद पर चढ़ जाओ, भगवा झंडा लगा दो, मस्जिदों के सामने डीजे पर अभद्र गाने बजाओ, दाढ़ी वाले बुजुर्गों के साथ ट्रेन में हादसे करने वालों के पीछे कौन है। इसपर सोचना चाहिए, नफरतों से कुछ हासिल नहीं होने वाला, इससे मुल्क की बदनामी होती है। संवाद
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