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नर्स डे:::नर्सों के हौसले को सलाम, कोरोना महामारी में पूरी शिद्दत से अपने फर्ज को दिया अंजाम

Thu, 12 May 2022 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 01:45 AM IST
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Nurses Day: Salute to the spirits of the nurses, fulfilling their duty diligently during the Corona period
ुमन मिल्टन - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। कोरोनाकाल के दौरान एक ऐसा समय भी आया, जब कोविड-19 से पीड़ित मरीजों से अपनों ने भी दूरी बना ली। ऐसे समय में डॉक्टर और नर्सों ने पूरी शिद्दत के साथ काम करते हुए अपने फर्ज को अंजाम दिया। राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स सुमन मिल्टन और रेनू देवी ने मरीज और नर्स के बीच की दूरी को कम किया। इन नर्सों ने मरीजों की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। कोविड से खुद का बचाव करते हुए अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया। लगातार मास्क लगाए रहने के चलते उनके चेहरे पर निशान तक बन गए थे। अंतरराष्ट्रीय नर्स डे पर ऐसी नर्सों को सलाम।
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घर पर बीमार पति थे तो दूसरी ओर मरीज, दोनों ही फर्ज सुमन ने निभाए
58 साल की सुमन मिल्टन की हिम्मत और हौसले को हर कोई सलाम करता है। गोविंदगंज स्थित चर्च कॉलोनी निवासी सुमन मिल्टन के लिए यह दौर काफी संकट भरा था। एक तरफ बीमार पति सुरेश मिल्टन की देखभाल का जिम्मा था। दूसरी तरफ मरीजों के प्रति सेवाभाव का जज्बा। उन्होंने दोनों ही फर्ज को बखूबी से अंजाम दिया।
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पुवायां के स्वास्थ्य केंद्र पर संविदा पर काम करने वाली सुमन मिल्टन ने 2011 में जिला अस्पताल में ड्यूटी पाई थी। अपने कार्य के प्रति उनमें हमेशा से जुनून सवार था। समय से ड्यूटी पर आना और मरीजों की सेवा करने से पीछे नहीं थी। उनके लिए परीक्षा की घड़ी कोविड की पहली लहर के दौरान आई। जब उनके पति हृदय रोग से पीड़ित हो गए। उन्हें पति की देखभाल के साथ अपने नर्स के पेशे को अंजाम भी देना था। उनकी ड्यूटी होल्डिंग एरिया में लगा दी गई थी। सुमन बताती हैं कि वह समय काफी मुश्किल भरा था। उस समय होल्डिंग एरिया में सभी तरीके के मरीज आते थे। उसमें पॉजिटिव और सामान्य रोगी के बारे में पता नहीं चल पाता था। कई घंटे तक ड्यूटी के दौरान मास्क और ग्लब्स पहने रखा, जिसके चलते चेहरे पर निशान पड़ गए। हाथ भी सुन्न पड़ जाते थे। फिर भी अपने पेशे से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने बताया कि सच्चे दिल से सेवा करने के कारण ही मरीजों के बीच रहने के बावजूद एक बार भी वह संक्रमित नहीं हुईं। रेनू ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के बीच रहने के कारण रिश्तेदारों ने भी दूरी बनाना शुरू कर दी थी।
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दूसरी लहर की भयावह तस्वीर के बाद भी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे कदम
राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स रेनू देवी ने कोविड-19 की दूसरी लहर की भयावह हालत के बाद भी अपने फर्ज से कदम पीछे नहीं हटाए। उनकी ड्यूटी ही पोस्ट कोविड वार्ड में लगी थी। ये मरीज निगेटिव थे, लेकिन उनके अंदर लक्षण सारे संक्रमित वाले थे। उन मरीजों की सेवा करते हुए रेनू देवी ने अपने कर्तव्यों को बखूबी अंजाम दिया। रेनू बताती हैं कि उस समय एक-एक ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए मारा-मारी थी, लेकिन उन्होंने अपने प्रयास से मरीजों को ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी।

वाडूजई प्रथम निवासी सरजू प्रसाद की पत्नी रेनू देवी ने 2006 में लखीमपुर में ड्यूटी को ज्वाइन किया था। इसके कुछ वर्ष के बाद ही वह शाहजहांपुर के जिला अस्पताल में आ गईं। वर्तमान में फीमेल सर्जिकल वार्ड की इंचार्ज रेनू देवी की कोरोना की दूसरी लहर में पोस्ट कोविड वार्ड में ड्यूटी लगाई गई। उनसे जब ड्यूटी के लिए कहा गया तो कुछ देर के लिए उनकी हिम्मत जवाब दे गई। कोरोना की दूसरी लहर में आए दिन होने वाली मौतों की भयावह स्थिति के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। रेनू बताती हैं कि मरीजों में निगेटिव होने के बाद भी कोविड जैसे लक्षण वाले वार्ड में 36-36 रोगी रहते थे। उनकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने व्यक्तिगत प्रयास से आक्सीजन की कोई कमी नहीं होने दी। हमने सावधानी से अपनी ड्यूटी कर फर्ज को अंजाम दिया।

ेणु देवी

ेणु देवी- फोटो : SHAHJAHANPUR

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