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अब आसान होगी सुअरों में दिमागी बुखार की पहचान
बरेली, ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 01:16 AM IST
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सुअरों में जापानी मस्तिष्क ज्वर (इंसेफेलाइटिस ) की पहचान अब आसानी से हो जाएगी। इसके लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर (आईवीआरआई) ने पहला स्वदेशी एलाइजा किट विकसित कर ली है। इस किट के जरिए सुअरों में जापानी मस्तिष्क ज्वर का पता लगा सकेगा। इसके बाद सुअरों से मनुष्यों में इंसेफेलाइटिस फैलने से रोकी जा सकेगी और उपचार संभव हो सकेगा। यह पहली स्वदेशी एलाइजा किट है। यह किट नई तकनीकी के रूप में शनिवार पांच नवंबर को होने वाले संस्थान के दीक्षांत समारोह में लांच की जाएगी।
किट विकसित करने में तीन साल लगे। आईवीआरआई के पशुजन स्वास्थ्य विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने इसको विकसित किया। टीम में डॉ. हिमानी धांजे, डॉ. केएन भिलेगा ओंकार, डॉ. श्रेया रावत, डॉ. अशोक कुमार और डॉ. चेतन कुमार शामिल रहे। जापानी मस्तिष्क ज्वर सुअरों में तेजी से फैलता है और इसका इलाज भी संभव है लेकिन सुअरों में इस बीमारी की सटीक पहचान करना मुश्किल होता है। अब तक संक्रमित सुअर में अनुमान के जरिए मस्तिष्क ज्वर मानकर उसका इलाज किया जाता रहा है लेकिन कई संक्रमित सुअरों में यह जांच न होने से उनका इलाज नहीं हो पाता था। नतीजतन, आईवीआरआई ने इसकी पहचान के लिए किट विकसित करने का निर्णय लिया था। इसमें कामयाबी मिल गई है। संस्थान इसको बड़ी कामयाबी मान रहा है। संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि जापानी मस्तिष्क ज्वर सुअरों से मनुष्यों में भी पहुंच जाता है। ऐसे में यह किट बेहद कारगर साबित होगी। किट के जरिए सुअरों में बीमारी की सटीक पहचाने के बाद मनुष्यों को इस बीमारी से बचाने के लिए रोकथाम और नियंत्रण के लिए उपाय किए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह किट काफी सस्ती है। इसका लाभ देश के वैज्ञानिकों और निदान प्रयोगशालाओं को होगा।
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किट विकसित करने में तीन साल लगे। आईवीआरआई के पशुजन स्वास्थ्य विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने इसको विकसित किया। टीम में डॉ. हिमानी धांजे, डॉ. केएन भिलेगा ओंकार, डॉ. श्रेया रावत, डॉ. अशोक कुमार और डॉ. चेतन कुमार शामिल रहे। जापानी मस्तिष्क ज्वर सुअरों में तेजी से फैलता है और इसका इलाज भी संभव है लेकिन सुअरों में इस बीमारी की सटीक पहचान करना मुश्किल होता है। अब तक संक्रमित सुअर में अनुमान के जरिए मस्तिष्क ज्वर मानकर उसका इलाज किया जाता रहा है लेकिन कई संक्रमित सुअरों में यह जांच न होने से उनका इलाज नहीं हो पाता था। नतीजतन, आईवीआरआई ने इसकी पहचान के लिए किट विकसित करने का निर्णय लिया था। इसमें कामयाबी मिल गई है। संस्थान इसको बड़ी कामयाबी मान रहा है। संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि जापानी मस्तिष्क ज्वर सुअरों से मनुष्यों में भी पहुंच जाता है। ऐसे में यह किट बेहद कारगर साबित होगी। किट के जरिए सुअरों में बीमारी की सटीक पहचाने के बाद मनुष्यों को इस बीमारी से बचाने के लिए रोकथाम और नियंत्रण के लिए उपाय किए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह किट काफी सस्ती है। इसका लाभ देश के वैज्ञानिकों और निदान प्रयोगशालाओं को होगा।
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