भूमि अधिग्रहण घोटाला: अब छोटे भुगतान की भी जांच करेगी टीम, खरीद-फरोख्त के अभिलेख खोलेंगे हकीकत
बरेली में प्रशासन की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम छोटे मामलों की भी पड़ताल करेगी। 40-50 लाख रुपये तक के भुगतान से संबंधित अभिलेख भी खंगाले जाएंगे।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की जांच टीम ने एक करोड़ रुपये से अधिक भुगतान वाले मामलों में घोटाले पकड़े हैं। अब बरेली जिला प्रशासन की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम छोटे मामलों की भी पड़ताल करेगी। 40-50 लाख रुपये तक के भुगतान से संबंधित अभिलेख भी खंगाले जाएंगे। इससे फर्जीवाड़े के कुछ और मामले सामने आ सकते हैं।
बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में फर्जीवाड़ा किए जाने की आशंका पर एनएचएआई मुख्यालय ने अगस्त के पहले सप्ताह में टीम भेजकर जांच कराई थी। चार दिन की जांच में टीम सिर्फ बड़े मामले ही खंगाल पाई। इसी में 37 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया था। टीम छोटे मामलों को खंगाल नहीं सकी थी। अब प्रशासन की ओर से गठित टीम ऐसे मामलों को खंगालेगी। टीम ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी से भुगतान से संबंधित अभिलेख मांगे हैं। इसके बाद शक के आधार पर कुछ मामलों की जांच की जाएगी।
खरीद-फरोख्त के अभिलेख खोलेंगे हकीकत
मामले की तह तक जाने के लिए जांच टीम को ऊधमसिंह नगर, बरेली और पीलीभीत के 58 गांवों में भूमि अधिग्रहण संबंधी अभिलेख खंगालने होंगे। जिस जमीन को कृषि से अकृषि घोषित कर अधिक मुआवजा हासिल करने का खेल रचा गया, उसकी पत्रावली अधिकारियों और कर्मचारियों की कारगुजारी की पोल खोलेगी।
सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचना जारी होने के बाद न तो भूमि का उपयोग बदला जाता है, न ही भूमि की खरीद-फरोख्त हो सकती है। अगर हेराफेरी कर ऐसा किया गया है तो अभिलेखों की जांच से हकीकत सामने आएगी।