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Bareilly News: टीकाकरण में बेपरवाही... गर्भस्थ शिशुओं को चपेट में ले रहा रुबेला वायरस

Sat, 23 Aug 2025 06:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 06:13 AM IST
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Negligence in vaccination... Rubella virus is affecting unborn babies
बरेली। गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण की अनदेखी गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भारी पड़ रही है। रुबेला कैटरेक्ट गर्भ में ही शिशुओं को चपेट में ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत कराए गए सर्वे में पांच बच्चे जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए। चिकित्सा विज्ञान में इसे कंजेटियल रुबेला कैटरेक्ट (सीआरएस) कहते हैं। पीड़ित पाए गए सभी पांच बच्चों की जिला अस्पताल में निशुल्क सर्जरी कराई गई।
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वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक, एमएमआर टीकाकरण से पहले सीआरएस के कई मामले सामने आते थे। अब टीकाकरण से इस रोग में काफी कमी आई है। अगर गर्भवती रुबेला वायरस के संपर्क में आ जाए तभी गर्भस्थ शिशु को यह बीमारी होने की आशंका रहती है। अगर जन्मे शिशु में सीआरएस की समस्या है तो इसका ऑपरेशन करा लेना चाहिए। अनदेखी से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
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आरबीएसके मैनेजर डॉ. पारस गुप्ता के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई तक चले सर्वे के दौरान टीम को 47 बच्चे जन्मजात दोषों से ग्रसित मिले। इनमें पांच बच्चे सीआरएस से पीड़ित मिले। जिला अस्पताल में इनकी निशुल्क सर्जरी कराई गई, जो निजी अस्पताल में करीब 40 हजार रुपये में होती है।
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जिला अस्पताल में भी सीआरएस की सर्जरी शुरू
डॉ. पारस के मुताबिक, करीब दो माह पूर्व तक जिला अस्पताल में जन्मजात मोतियाबिंद की सर्जरी नहीं होती थी। लिहाजा, बच्चों में रोग की पुष्टि होने पर उन्हें सीतापुर स्थित नेत्र चिकित्सालय में सर्जरी के लिए भेजा जाता था। अब दो माह से जिला अस्पताल में भी यह सर्जरी शुरू हो गई है। संवाद

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38 प्रकार के जन्मजात दोषों का निशुल्क इलाज
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, आरबीएसके के तहत 38 प्रकार के जन्मजात दोषों का निशुल्क इलाज होता है। इसमें दिल का छेद, कटे होंठ, तालू, डाउन सिंड्रोम, क्लब फुट, हिप डिस्प्लेसिया, कॉग्नेशियल कैटरेक्ट, रेटिनोथेरेपी व अन्य दोष शामिल हैं। अगर कोई बच्चा जन्मजात दोष से पीड़ित है तो अभिभावक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर आरबीएसके टीम से संपर्क कर सकते हैं। दोष की पुष्टि के बाद बच्चे के इलाज आदि का पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाता है।
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