{"_id":"5e502f188ebc3ef40403cba3","slug":"military-officer-under-tension-from-high-tension-line-bareilly-news-bly3968442160","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरेलीः हाईटेंशन लाइन से टेंशन में सैन्य अफसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरेलीः हाईटेंशन लाइन से टेंशन में सैन्य अफसर
विज्ञापन
सेटेलाइट पुल।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
प्रैक्टिस के दौरान हेलीकॉप्टर के हाईटेंशन लाइन से टकराने की आशंका
विज्ञापन
घोड़ा बटालियन में हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने को लेकर फंस सकता है पेच
बरेली। सेटेलाइट फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान दोहना-बरेली शहर और बरेली शहर-फरीदपुर को जाने वाली हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई बढ़ाने और पोल शिफ्टिंग को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि सैन्य अफसरों ने बिजली विभाग की ओर से लाइन शिफ्टिंग के बाबत मांगी गई अनुमति पर आर्मी इंजीनियरिंग विंग से तकनीकी जांच कराएगी। आशंका जताई जा रही है कि हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई वर्तमान स्थिति से करीब तीन गुना से भी ज्यादा की जा सकती है। ऐसे में आर्मी एविएशन में प्रैक्टिस के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटना हो सकते हैं।
सैन्य अफसरों के मुताबिक 883 एटी घोड़ा बटालियन के मैदान में लगे पोल की शिफ्टिंग समेत उसकी ऊंचाई बढ़ाने के लिए बिजली विभाग के एक्सईएन ने अनुमति मांगी है। बिजली विभाग से मिले पत्र के बाबत पिछले दिनों सेना की एक टीम ने फौरी तौर पर निरीक्षण किया था। मौके पर फ्लाईओवर पर कार्यरत् कर्मचारियों से उन्होंने बातचीत भी की थी। उनके मुताबिक फ्लाईओवर पर बस, ट्रक समेत डबल डेकर बस व अन्य बड़े वाहन भी गुजरेंगे। लिहाजा, वर्तमान में लगाए गए पोल से करीब तीन गुना ऊंचाई पर हाईटेंशन शिफ्ट की जा सकती है। कर्मचारियों की ओर से मिले इनपुट की रिपोर्ट जब टीम ने सैन्य अफसरों को सौंपी तो खलबली मच गई। पोल की शिफ्टिंग के लिए अनुमति देने की पूरी तैयारी कर चुकी सेना ने हाथ खींच लिए। ऐसे में अफसरों ने बैठक कर पोल की शिफ्टिंग और ऊंचाई बढ़ाने के बाबत आर्मी इंजीनियर विंग से तकनीकी जांच कराने के बाद ही अनुमति पर विचार किए जाने की बात कही है।
विज्ञापन
कैंट सीईओ का इनकार, स्टेशन हेडक्वॉर्टर सेल को भेजा पत्र
बिजली विभाग के एक्सईएन की ओर से जारी मांग पत्र के मुताबिक सेटेलाइट तिराहे पर बन रहे फ्लाईओवर की वजह से 132 केवीए डबल सर्किट ट्रांसमिशन की शिफ्टिंग और ऊंचाई बढ़ाने का कार्य किया जाना है। इसके लिए दो मोनोपोल लगाए जाएंगे। इस काम को 7.60 वर्ग मीटर भूमि की जरूरत है। इसके अलावा दोनों सर्किट और कंडक्टर्स के बीच 6.5 मीटर का लाइन कॉरीडोर रहेगा। जनहित को देखते हुए पोल शिफ्टिंग के चलते 7.60 वर्ग मीटर भूमि अन्य कहीं देने की मांग की है। पत्र के साथ उन्होंने संबंधित कार्य का मैप भी संलग्न किया है। मामले पर कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. अनुपम तलवाड ने स्टेशन हेड क्वॉर्टर को पत्र भेजकर बिजली विभाग के मांग पत्र की जानकारी दे दी है। साथ ही, उचित निर्णय लेने को कहा है। सीईओ के पत्र के मुताबिक संबंधित भूमि कैंट बोर्ड की नहीं है, ऐसे में वह अनुमति नहीं दे सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एनओसी की जरूरत नहीं, पहले मिल चुकी है परमिशन
सैन्य अफसरों ने बताया कि घोड़ा बटालियन में वर्ष 1989 में दोहना-बरेली शहर और बरेली शहर-फरीदपुर को विद्युत ट्रांसमिशन के लिए बिजली विभाग ने एक पोल लगाया था। इसकी परमिशन उन्हें मिल चुकी है। पोल शिफ्टिंग के लिए लिखे गए पत्र में भी पूर्व में स्वीकृत जमीन के क्षेत्रफल के बराहर ही घोड़ा बटालियन में अन्य कहीं जमीन देने को कहा है, ताकि फ्लाईओवर पर वाहन गुजरने के दौरान हाईटेंशन लाइन से कोई हादसा न हो। ऐसे में उन्हेें पोल शिफ्ट करने के बाबत अनुमति दे दी जाएगी। लेकिन किसी स्थान का चयन करते हैं, जहां से सेना के कार्य प्रभावित होंगे तो सैन्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
घोड़ा बटालियन में हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने को लेकर फंस सकता है पेच
बरेली। सेटेलाइट फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान दोहना-बरेली शहर और बरेली शहर-फरीदपुर को जाने वाली हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई बढ़ाने और पोल शिफ्टिंग को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि सैन्य अफसरों ने बिजली विभाग की ओर से लाइन शिफ्टिंग के बाबत मांगी गई अनुमति पर आर्मी इंजीनियरिंग विंग से तकनीकी जांच कराएगी। आशंका जताई जा रही है कि हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई वर्तमान स्थिति से करीब तीन गुना से भी ज्यादा की जा सकती है। ऐसे में आर्मी एविएशन में प्रैक्टिस के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटना हो सकते हैं।
सैन्य अफसरों के मुताबिक 883 एटी घोड़ा बटालियन के मैदान में लगे पोल की शिफ्टिंग समेत उसकी ऊंचाई बढ़ाने के लिए बिजली विभाग के एक्सईएन ने अनुमति मांगी है। बिजली विभाग से मिले पत्र के बाबत पिछले दिनों सेना की एक टीम ने फौरी तौर पर निरीक्षण किया था। मौके पर फ्लाईओवर पर कार्यरत् कर्मचारियों से उन्होंने बातचीत भी की थी। उनके मुताबिक फ्लाईओवर पर बस, ट्रक समेत डबल डेकर बस व अन्य बड़े वाहन भी गुजरेंगे। लिहाजा, वर्तमान में लगाए गए पोल से करीब तीन गुना ऊंचाई पर हाईटेंशन शिफ्ट की जा सकती है। कर्मचारियों की ओर से मिले इनपुट की रिपोर्ट जब टीम ने सैन्य अफसरों को सौंपी तो खलबली मच गई। पोल की शिफ्टिंग के लिए अनुमति देने की पूरी तैयारी कर चुकी सेना ने हाथ खींच लिए। ऐसे में अफसरों ने बैठक कर पोल की शिफ्टिंग और ऊंचाई बढ़ाने के बाबत आर्मी इंजीनियर विंग से तकनीकी जांच कराने के बाद ही अनुमति पर विचार किए जाने की बात कही है।
विज्ञापन
कैंट सीईओ का इनकार, स्टेशन हेडक्वॉर्टर सेल को भेजा पत्र
बिजली विभाग के एक्सईएन की ओर से जारी मांग पत्र के मुताबिक सेटेलाइट तिराहे पर बन रहे फ्लाईओवर की वजह से 132 केवीए डबल सर्किट ट्रांसमिशन की शिफ्टिंग और ऊंचाई बढ़ाने का कार्य किया जाना है। इसके लिए दो मोनोपोल लगाए जाएंगे। इस काम को 7.60 वर्ग मीटर भूमि की जरूरत है। इसके अलावा दोनों सर्किट और कंडक्टर्स के बीच 6.5 मीटर का लाइन कॉरीडोर रहेगा। जनहित को देखते हुए पोल शिफ्टिंग के चलते 7.60 वर्ग मीटर भूमि अन्य कहीं देने की मांग की है। पत्र के साथ उन्होंने संबंधित कार्य का मैप भी संलग्न किया है। मामले पर कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. अनुपम तलवाड ने स्टेशन हेड क्वॉर्टर को पत्र भेजकर बिजली विभाग के मांग पत्र की जानकारी दे दी है। साथ ही, उचित निर्णय लेने को कहा है। सीईओ के पत्र के मुताबिक संबंधित भूमि कैंट बोर्ड की नहीं है, ऐसे में वह अनुमति नहीं दे सकती हैं।
विज्ञापन