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बढ़ सकती है पासपोर्ट की फीस
बरेली, ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 01:18 AM IST
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केंद्र वित्त मंत्रालय अब पासपोर्ट,रेलवे, केंद्रीय परीक्षाएं, बैंकिंग समेत कई सेवाओं पर फीस बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय द्वारा गठित व्यय प्रबंधन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि जनता को प्रदत्त सेवा और खर्चों में सामंजस्य जरूरी है। इसलिए पासपोर्ट समेत सभी संबंधित विभागों में फीस बढ़ाने की सिफारिशों पर कवायद शुरू हो गई है।
केरोसिन, गैस और खाद्यान्न आदि पर धीरे-धीरे सब्सिडी खत्म करने और लाभार्थी के खाते में सीधे धनराशि उपलब्ध कराने की कवायद पहले से ही चल रही है। घरेलू रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी पिछले वर्ष जनवरी 2015 से ही खातों में पहुंचना शुरू हो गई। अक्तूबर माह से केरोसिन कोटा आधा कर दिया गया है। लोगों को अब जरूरत के मुताबिक सफेद केरोसिन खुले बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी इसी माह से है। इसका लाइसेंस उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को दिया गया है। राशन की दुकानों पर मिल रहे चावल और गेहूं की सब्सिडी भी अगले वर्ष से सीधे खातों में पहुंचाने की योजना है। इससे कालाबाजारी और मनमानी पर अंकुश लगेगा और सही व्यक्ति को लाभ मिलेगा।
अब वित्त मंत्रालय द्वारा गठित व्यय प्रबंधन आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न केंद्रीय विभाग परीक्षाएं आयोजित कर काफी खर्चा करते हैं। इसका बोझ बजट पर ही आता है। केंद्रीय लोक सेवा आयोग सौ रुपये में फार्म उपलब्ध कराकर लाखों रुपये परीक्षा पर खर्च कर रहा है। पासपोर्ट 1500 रुपये में तैयार हो रहा है, जबकि वास्तविक लागत कहीं ज्यादा है। रेलवे और बैंकिंग क्षेत्र में भी ऐसी कई सार्वजनिक सेवाएं हैं, जिन पर करोड़ों रुपये व्यय हो रहे हैं। आयोग ने कहा है कि सभी विभाग कास्ट कटिंग करें और आत्मनिर्भर बनें।
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क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी राम सिंह ने बताया कि चार वर्ष पहले पासपोर्ट बनवाने की फीस एक हजार से बढ़कर 1500 रुपये हुई थी। इस दौरान खर्च भी बढे़ हैं। यह जरूरी नहीं है कि आयोग की रिपोर्ट पर फीस परिवर्तन हो।
वर्जन
केंद्र सरकार परीक्षा, रेलवे, बैंक, पासपोर्ट, खाद्य, पेट्रोलियम आदि तमाम सेक्टरों पर जनहित में रियायती दरों पर सेवाएं उपलब्ध कराती है। संबंधित विभाग खर्चों पर अंकुश लगाएं और बेहतर सेवाएं दें, इस पर जोर दिया जा रहा है।’
- संतोष गंगवार, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री
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केरोसिन, गैस और खाद्यान्न आदि पर धीरे-धीरे सब्सिडी खत्म करने और लाभार्थी के खाते में सीधे धनराशि उपलब्ध कराने की कवायद पहले से ही चल रही है। घरेलू रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी पिछले वर्ष जनवरी 2015 से ही खातों में पहुंचना शुरू हो गई। अक्तूबर माह से केरोसिन कोटा आधा कर दिया गया है। लोगों को अब जरूरत के मुताबिक सफेद केरोसिन खुले बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी इसी माह से है। इसका लाइसेंस उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को दिया गया है। राशन की दुकानों पर मिल रहे चावल और गेहूं की सब्सिडी भी अगले वर्ष से सीधे खातों में पहुंचाने की योजना है। इससे कालाबाजारी और मनमानी पर अंकुश लगेगा और सही व्यक्ति को लाभ मिलेगा।
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अब वित्त मंत्रालय द्वारा गठित व्यय प्रबंधन आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न केंद्रीय विभाग परीक्षाएं आयोजित कर काफी खर्चा करते हैं। इसका बोझ बजट पर ही आता है। केंद्रीय लोक सेवा आयोग सौ रुपये में फार्म उपलब्ध कराकर लाखों रुपये परीक्षा पर खर्च कर रहा है। पासपोर्ट 1500 रुपये में तैयार हो रहा है, जबकि वास्तविक लागत कहीं ज्यादा है। रेलवे और बैंकिंग क्षेत्र में भी ऐसी कई सार्वजनिक सेवाएं हैं, जिन पर करोड़ों रुपये व्यय हो रहे हैं। आयोग ने कहा है कि सभी विभाग कास्ट कटिंग करें और आत्मनिर्भर बनें।
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क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी राम सिंह ने बताया कि चार वर्ष पहले पासपोर्ट बनवाने की फीस एक हजार से बढ़कर 1500 रुपये हुई थी। इस दौरान खर्च भी बढे़ हैं। यह जरूरी नहीं है कि आयोग की रिपोर्ट पर फीस परिवर्तन हो।
वर्जन
केंद्र सरकार परीक्षा, रेलवे, बैंक, पासपोर्ट, खाद्य, पेट्रोलियम आदि तमाम सेक्टरों पर जनहित में रियायती दरों पर सेवाएं उपलब्ध कराती है। संबंधित विभाग खर्चों पर अंकुश लगाएं और बेहतर सेवाएं दें, इस पर जोर दिया जा रहा है।’
- संतोष गंगवार, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री