UP Election Result 2024: नोटा से भी हारे छोटे दल और निर्दलीय, बसपा प्रत्याशी भी नहीं बचा पाए जमानत
बरेली मंडल की सभी पांच लोकसभा सीटों पर ताल ठोंक रहे छोटे दलों के उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशी न केवल नोटा से हारे, बल्कि जमानत भी गंवा बैठे। ज्यादातर जगह बसपा प्रत्याशी की भी जमानत जब्त हो गई।
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रुहेलखंड के रण में प्रमुख प्रत्याशियों के बाद नोटा मतदाताओं की पसंद बना। बरेली मंडल की सभी पांच लोकसभा सीटों पर ताल ठोंक रहे छोटे दलों के उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशी न केवल नोटा से हारे, बल्कि जमानत भी गंवा बैठे। ज्यादातर जगह बसपा प्रत्याशी की भी जमानत जब्त हो गई। बरेली सीट पर भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी के बाद सबसे ज्यादा मत हासिल कर नोटा तीसरे स्थान पर रहा। बदायूं, शाहजहांपुर, आंवला और पीलीभीत में भी नोटा ने भाजपा, सपा-कांगेस गठबंधन और बसपा प्रत्याशी के बाद सबसे अधिक मत प्राप्त किए।
बदायूं सीट पर सबसे ज्यादा 8,562 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। आठ प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए नोटा चौथे स्थान पर रहा। पीलीभीत में सात प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले। यहां कुल 6,741 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। नोटा के बाद सबसे ज्यादा 3,809 वोट भारतीय कृषक दल के राजीव कुमार सक्सेना को मिले।
आंवला में भी 6,858 वोट पाकर नोटा ने छह प्रत्याशियों को मात दी। बरेली सीट पर नोटा का बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या 6,260 रही। यहां कुल 11 उम्मीदवारों से ज्यादा वोट नोटा को मिले। शाहजहांपुर में कुल 8,490 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
36,911 मतदाताओं को कोई प्रत्याशी पसंद नहीं
बरेली मंडल में 36,911 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। कह सकते हैं कि इन मतदाताओं को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया। मंडल में नोटा को सबसे ज्यादा वोट बदायूं में मिले। बरेली संसदीय सीट पर सबसे कम मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
बरेली में बढ़ा नोटा, अन्य जगह घटी संख्या
भले ही नोटा मंडल की सभी सीटों पर शीर्ष चार में जगह बनाने में सफल रहा मगर सिर्फ बरेली सीट पर नोटा को मिलने वाले मतों की संख्या 2019 की तुलना में बढ़ी है। बरेली सीट पर 2019 में 3,824 मतदाताओं ने नोटा को पसंद किया था। इस बार नोटा को 2,436 वोट ज्यादा मिले। वर्ष 2019 में बदायूं में 8,606, शाहजहांपुर में 9,037, आंवला में 9,198 और पीलीभीत में 9,973 मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को पसंद किया था। इस बार इन चारों सीटों पर नोटा को पसंद करने वाले मतदाता घटे हैं।
बरेली : यहां छत्रपाल गंगवार ने 5,67,127 वोट हासिल कर जीत हासिल की। जमानत बचाने के लिए 1,86,649 वोट चाहिए थे। प्रवीण सिंह ऐरन के अलावा कोई भी प्रत्याशी इस आंकड़े को पार नहीं कर सका। इरशाद अंसारी एडवोकेट (3,553), वसीम मियां (2,839), भूपेंद्र कुमार मौर्या (1,704), बुद्ध प्रिय कर्मराज राहुल (1,194), रोहताश कश्यप (847), जगपाल सिंह यादव (656), मोहम्मद नाजिम अली (633), रवि कुमार (627), नितिन मोहन (620), आशीष गंगवार (616) और आयशा बी (559) की जमानत नहीं बची।
आंवला : इस सीट पर सपा के नीरज मौर्या को 4,92,515 मत मिले। जमानत बचाने के लिए जरूरी 1,80,339 मतों का आंकड़ा भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप (4,76,546) ही पार कर पाए। बसपा के आबिद अली (95,630) के अलावा कौसर खान (4,213) प्रेमपाल सागर (3,330) मक्खन लाल को (2,953), राजकुमार पटेल (2,706), मोहम्मद आमिर खान (2,355), निर्मोद कुमार सिंह (1,790) की जमानत नहीं बची।
बदायूं : इस सीट पर सपा के आदित्य यादव ने 5,01,855 वोट हासिल कर जीत का सेहरा सजाया। जमानत बचाने के लिए जरूरी मतों का आंकड़ा भाजपा के दुर्विजय शाक्य (4,66,864) ही पार कर पाए। बसपा के मुस्लिम खां (97,751) के अलावा संजीव कुमार (3,836), दिनेश कुमार (2,674), लता यादव (2,578), नीलम रानी पाल (2,438), रामप्रताप मौर्य (1,543), इशरत अली (1,513), सुलेमान (1,240), हरिराज सिंह (910) की जमानत नहीं बची।
शाहजहांपुर : यहां भाजपा के अरुण सागर 5,92,718 मत प्राप्त कर विजेता बने। जमानत बचाने के लिए जरूरी मतों का आंकड़ा सपा की ज्योत्सना गौंड 5,37,339 ही पार कर पाईं। बसपा के डॉ. दोदराम वर्मा (91,710), किरण (6,588), शिवकुमार (2,805), मीना कश्यप (2,061), प्रदीप कुमार (2,005), प्रेमचंद्र हरिजन (1,687), धर्मपाल (1,423), रमेश चंद्र वर्मा (1,076) की जमानत जब्त हो गई।
पीलीभीत : यहां जितिन प्रसाद ने 6,07,158 वोट पाकर जीत हासिल की। यहां जमानत बचाने के लिए 1,93,491 मतों की जरूरत थी पर सपा के भगवत सरन (4,42,223) ही इस आंकड़े को पार कर सके। बसपा के अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू (89,697), राजीव कुमार सक्सेना (3,809), सुशील शुक्ला (2,727), आशीष कुमार (1,850), मोहम्मद शाहिद हुसैन (1,846), आदर्श पांडेय (1,726), संजय कुमार शुक्ला (1,631), प्रमोद भाई पटेल (1,539) की जमानत जब्त हो गई।