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Bareilly News: दक्षिण भारत के विद्यार्थियों को हिंदी का पाठ पढ़ा रहा आईवीआरआई
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने दक्षिण भारत के विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने की पहल की है। उनको हिंदी लेखन व बोलचाल के आसान शब्दों का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के निर्देशानुसार संस्थान में आयोजित हिंदी कार्यशाला में अहिंदी भाषी क्षेत्र के 100 विद्यार्थियों को हिंदी की जानकारी दी जा चुकी है। संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता ने बताया कि विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को सामंजस्य बनाने में मदद मिलेगी। देश के ज्यादातर हिस्सों में हिंदी का प्रयोग होता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद हिंदी भाषी प्रदेश में नौकरी मिलने पर दिक्कत नहीं होगी।
रविवार को कार्यशाला में परास्नातक और पीएचडी के 45 छात्र-छात्राओं को हिंदी का पाठ पढ़ाया गया। हिंदी उपाध्यक्ष, कार्यशाला निदेशक और विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि हिंदी के ज्ञान से व्यक्तित्व का विकास होगा। व्यावहारिक विज्ञान की समझ बढ़ेगी।
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डाॅ. रमेश सोमवंशी, अजीत कुमार, डाॅ. एएम पावड़े, डाॅ. मोहिनी सैनी, डाॅ. गीता चौहान, डाॅ. अंजू काला, डॉ. हरिओम पांडेय।
कार्यशाला समापन के दौरान राजभाषा प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों के हिंदी ज्ञान की परख हो सके। राजभाषा अनुभाग प्रभारी डाॅ. केएन कांडपाल ने कार्यशाला के दौरान हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। बताया कि हिंदी अब सिर्फ बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि यह कौशल विकास कर बहुभाषा ज्ञान को बढ़ाने का भी जरिया है।
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निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के निर्देशानुसार संस्थान में आयोजित हिंदी कार्यशाला में अहिंदी भाषी क्षेत्र के 100 विद्यार्थियों को हिंदी की जानकारी दी जा चुकी है। संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता ने बताया कि विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को सामंजस्य बनाने में मदद मिलेगी। देश के ज्यादातर हिस्सों में हिंदी का प्रयोग होता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद हिंदी भाषी प्रदेश में नौकरी मिलने पर दिक्कत नहीं होगी।
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रविवार को कार्यशाला में परास्नातक और पीएचडी के 45 छात्र-छात्राओं को हिंदी का पाठ पढ़ाया गया। हिंदी उपाध्यक्ष, कार्यशाला निदेशक और विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि हिंदी के ज्ञान से व्यक्तित्व का विकास होगा। व्यावहारिक विज्ञान की समझ बढ़ेगी।
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डाॅ. रमेश सोमवंशी, अजीत कुमार, डाॅ. एएम पावड़े, डाॅ. मोहिनी सैनी, डाॅ. गीता चौहान, डाॅ. अंजू काला, डॉ. हरिओम पांडेय।
कार्यशाला समापन के दौरान राजभाषा प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों के हिंदी ज्ञान की परख हो सके। राजभाषा अनुभाग प्रभारी डाॅ. केएन कांडपाल ने कार्यशाला के दौरान हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। बताया कि हिंदी अब सिर्फ बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि यह कौशल विकास कर बहुभाषा ज्ञान को बढ़ाने का भी जरिया है।