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नर्क से बदतर है जिला अस्पताल का आईसोलेशन वार्ड
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Thu, 26 Apr 2018 07:42 PM IST
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district hospital
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जिला अस्पताल में संचारी रोगों के लिए बनाया गए आईसोलेशन वार्ड में रहना किसी नर्क से कम नहीं है। लैटरीन चोक होने से पूरा वार्ड में बदबू है। मरीज और तीमारदार नाक पर कपड़ा रखकर बैठते हैं। तीमारदारों को दूसरी जगह शौच जाना पड़ता है और इसके लिए उन्हें पांच रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसकी शिकायत भी सीएमएस से कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। नए जिला अस्पताल का सिस्टम तो लंबे अरसे से खराब है ही अब गुंबद वाले अस्पताल में भी सीवर चोक होने लगे हैं।
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आइसोलेशन वार्ड का नाम सुनते ही मरीजों के मन में साफ सुथरे वार्ड की तस्वीर उभरती है, लेकिन जिला अस्पताल में उल्टा है। वार्ड में ज्यादातर मरीज डायरिया के भर्ती हैं। सबसे बड़ी दिक्कत लैटरीन और पीने के पानी है। दो दिन से लैटरीन चोक है। बदबू की वजह से वार्ड में बैठना मुश्किल है। वार्ड के बाहर लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। लिहाजा मरीजों को ओपीडी के पास लगे हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है। बाकरगंज की हाजरा तीन दिन से वार्ड में भर्ती हैं। उनका बेड भी लैटरीन के पास ही है। इससे बदबू के मारे उनका बुरा हाल है। बोलीं, कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसे माहौल में तो ठीक होने के बजाए और बीमार हो जाएंगे। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता का कहना है कि दो बार लैटरीन साफ करा चुके हैं, मरीजों को ऐतिहात बरतनी चाहिए।
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