बरेली में उत्कर्ष के 57 वर्ष: अमर उजाला के सफर से रूबरू हुए हिमवीर और बीएसएफ के जवान, देखिए तस्वीरें
अमर उजाला के बरेली संस्करण के 58वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को आईटीबीपी के हिमवीर और बीएसएफ के जवान शामिल हुए। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी भी पहुंचे। सभी अमर उजाला के सफर से रूबरू हुए।
विस्तार
अमर उजाला के बरेली संस्करण के 58वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को श्यामगंज स्थित कार्यालय परिसर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के हिमवीरों और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों ने सहभागिता की। वह अमर उजाला के अब तक के सफर से रूबरू हुए। डॉक्यूमेंट्री के जरिये स्थापना से लेकर अब तक के बदलते स्वरूप को जाना। पूर्व सैनिकों ने अमर उजाला से जुड़े संस्मरण साझा किए।
आईटीबीपी बुखारा कैंप तृतीय वाहिनी के उप सेनानी मोहित वर्मा ने कहा कि समाचार पत्र सिर्फ कागज भर नहीं, बल्कि ज्ञान, सूचना, जागरूकता का जरिया है। सोशल मीडिया पर वायरल फेक न्यूज के दौर में प्रमाणिक और विश्वसनीय सूचना सिर्फ समाचार पत्र से ही मिलती है। अखबार हमें देश का जिम्मेदार नागरिक बनाता है। ये जनसमस्याओं को उठाकर सरकार की जवाबदेही तय कराते हैं। जनता और प्रशासन के बीच संवाद का अहम जरिया हैं।
मोहित वर्मा ने कहा कि समाचार पत्र से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलती है। इसमें विभिन्न आयुवर्ग के अनुसार सामग्री प्रकाशित होती है। जवानों के साथ ही उनके परिजन और शहर के नागरिकों से समाचार पत्र पढ़ने की अपील की, ताकि समसामायिक मुद्दों से जुड़े। ज्ञानवर्धन हो।
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के पदाधिकारियों और सदस्यों ने संस्मरण साझा किए। महासचिव प्रथमेश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1970 में वह अमर उजाला से जुड़े। तब दस पैसे का अखबार मिलता था। तब से अब तक अमर उजाला ही पढ़ रहे हैं।