कौन बेरहम कर गया शर्मनाक करतूत, कहानियां तमाम पर तस्वीर साफ नहीं
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बरेली जिला अस्पताल के शौचालय की सीट में नवजात का शव डालने वाले बेरहम शख्स का चेहरा साफ नहीं हो सका है। सीसीटीवी कैमरा अंदर है नहीं और बाहरी कैमरे से स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। इस मामले में अस्पताल स्टाफ और मरीजों की बातचीत से अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं पर ठोस बात पता नहीं चल पा रही है।
देर शाम उल्टी और पेट दर्द बताकर भर्ती हुई महिला का नाम भी सामने आ रहा है पर महिला अस्पताल की सीएमएस के मुताबिक उसे दो माह का गर्भ था। वह बच्चा नहीं चाहती थी तो दूसरी दिन आने की बात कहकर पति के साथ चली गई। भोजीपुरा की कुंवारी लड़की को लेकर भी शक है। सीएमएस के मुताबिक मंगलवार को जन्मे सब बच्चे सुरक्षित हैं।
अस्पताल परिसर में हुई घटना के बाद पुलिस और सीएमएस ने स्टाफ और मरीजों से जानकारी जुटाई। पता लगा कि मंगलवार शाम सात बजे के करीब तिलक कॉलोनी की एक विवाहिता उल्टी और पेट दर्द बताकर भर्ती हुई थी। हालत गंभीर देखकर उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। वहां स्टाफ ने गर्भ संबंधी समस्या भांपकर रात 1:15 बजे महिला अस्पताल को कॉल की।
सीएमएस के मुताबिक अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अनुपम कटियार ने चेकअप किया तो पाया कि महिला को दो माह का गर्भ था जो सही स्थिति में नहीं था। डॉक्टर ने उनसे सुबह अल्ट्रासाउंड कराने के बाद सफाई कराने को कहा तो महिला और उसका पति तैयार नहीं हुए और रात में ही निकल गए। चर्चा है कि बच्चा इसी महिला का है, जिसकी डिलीवरी की बात अस्पताल प्रशासन छिपा रहा है।
भोजीपुरा के एक गांव की 18 वर्षीय किशोरी 13 अक्तूबर की शाम भोजीपुरा सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर की गई थी। उसे सांस लेने संबंधी दिक्कत थी तो उसे आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया। अगले दिन उसे महिला अस्पताल लाया गया। मरीजों ने ही बताया कि लड़की कई महीने के गर्भ से थी, बच्चा उसी का है।
वहीं, इस मामले में सीएमएस अलका शर्मा कहती हैं कि कुछ दिन पहले स्टाफ ने उन्हें ऐसी लड़की के आने के बारे में सूचना दी थी। लड़की गर्भवती थी पर उसके साथ कोई अभिभावक नहीं था। डॉक्टर ने अभिभावक बुलाने को कहा तो लड़की ने हंगामा किया। डॉक्टर ने कॉल करके उनसे पूछा तो उन्होंने सलाह दी कि उसे भर्ती कर लो, लेकिन फिर लड़की कहीं चली गई।
अस्पताल में पहले भी हो चुकीं हैं घटनाएं, सुरक्षा बंदोबस्त नाकाफी
महिला अस्पताल में वर्ष 2013 में बच्चा चोरी की घटना हुई थी। तब तत्कालीन सीएमएस स्नेहलता ने डीएम से सुरक्षा पुख्ता कराने की मांग की। डीएम ने 12 महिला होमगार्ड जिला अस्पताल को आवंटित कर दीं। सीएमएस के मुताबिक अब केवल 10 होमगार्ड ही तैनात हैं।
रात में तीन से चार होमगार्ड अलग-अलग वार्ड में रहती हैं। उनके मुताबिक अस्पताल में 16 सीसीटीवी कैमरे हैं जो सही काम कर रहे हैं। बता दें कि दो महीने पहले ही अपने बच्चे की मौत के बाद एक महिला ने अस्पताल की तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।