फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bareilly infant found in pot buried under ground people praying

तुम तंदुरुस्त हो जाओ बिटिया, तुम्हारे चाहने वाले हैं हजारों

Sat, 12 Oct 2019 02:42 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 12 Oct 2019 02:42 AM IST
विज्ञापन
Bareilly infant found in pot buried under ground people praying
घड़े में मिली बच्ची - फोटो : Social Media

बरेली के श्मशान घाट में जमीन के अंदर घड़े में मिली बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती है और उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ होते ही वार्न बेबी फोल्ड संस्था में लाया जाएगा। फिर विधिक प्रक्रिया से उसे किसी संपन्न व जरूरतमंद दंपति को सौंपा जा सकेगा। संस्था में उसके जैसे 13 बच्चे पहले से पल रहे हैं। इसी साल आठ अनाथ बच्चों को नए माता-पिता मिले हैं। ये बच्चे कर्नाटक, हैदराबाद, केरल के करोड़पति परिवारों का हिस्सा बने हैं।

विज्ञापन


संस्था की अधीक्षक प्रिमरोज एडमंड के मुताबिक बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को शासन ने अब ऑनलाइन और पारदर्शी कर दिया है। आवेदन के बाद सर्वे में अभिभावकों की आर्थिक स्थिति व बच्चे की जरूरत का ध्यान रखा जाता है। परिवार को बच्चा पसंद होने के बाद बच्चे की पसंद का भी ध्यान रखा जाता है कि वह संबंधित दंपति के साथ हिलमिल रहा है या नहीं। फिर कोर्ट के आदेश से बच्चा दिया जाता है। आजकर इतनी वेटिंग है कि आवेदन के बाद छह माह से दो साल तक इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


तीसरी जगह फावड़ा मारने पर निकली थी बच्ची

बुलंदशहर निवासी बिजनेसमैन हितेश अपनी एसआई पत्नी के साथ सीबीगंज में रह रहे हैं। उनकी पत्नी को पहली डिलीवरी हुई थी। प्री मैच्योर बेटी के मृत होने पर हितेश उसे सिटी श्मशान भूमि में दफनाने ले गए थे। वहां उनके साथ गए लड़कों ने बच्ची को दबाने के लिए जमीन में फावड़ा मारा तो एक जगह पहले से बच्चे का शव दबा मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसे छोड़कर दूसरी जगह फावड़ा मारा तो वहां भी बदबू आई। हितेश के मुताबिक उन्होंने जब तीसरी जगह चुनी तो वहां फावड़ा घड़े में लगने के बाद बच्चे के रोने की आवाज आई। पहले सोचा कि उनकी बच्ची तो जीवित नहीं पर बाद में घड़े से जीवित बच्ची निकल आई।

जिसे बोरे में बंद करके डाला, वो करोड़पति परिवार में पहुंचा
नवाबगंज में पिछली साल खेत में शौच को गई महिला को एक बच्चा बोरे में बंद मिला था। बच्चे के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। बस जान ही बाकी थी। संस्था से बच्चे को भी हैदराबाद के करोड़पति बिजनेसमैन ले गए हैं। दो कुंवारी युवतियों ने भी बच्चे गोद लिए हैं। नारी निकेतन की तीन मानसिक मंदित महिलाओं के बच्चे भी हैदराबाद, तेलंगाना और रुद्रपुर के बड़े परिवारों का हिस्सा बने हैं। भमोरा में नाले के किनारे मिली बच्ची भी बड़े घर में गई है।

बेटियों को अपनाने वाले सबसे ज्यादा: प्रिमरोज
संस्था में इस समय 13 अनाथ बच्चे हैं जिन्हें अभिभावकों को सौंपा जाना है। इनमें आठ बच्ची और पांच बच्चे हैं। संस्था प्रभारी के मुताबिक लावारिस मिलने वाले बच्चों में बेटियों की संख्या हमेशा ज्यादा रहती है पर दूसरा सुखद पहलू ये भी है कि अभिभावक भी बेटियां ही मांग रहे हैं।

भिखारी से मिले यासीन को नाम मिला आशीष
चार दिन पहले ट्रेन में भिखारी के पास मिले डेढ़ साल के बच्चे को देखकर लोगों ने शोर मचाया था। पुलिस ने तब भिखारी और बच्चे को कब्जे में ले लिया था। बाद में भिखारी पुलिस को गच्चा देकर भाग गया। बाल कल्याण समिति ने इस बच्चे को संस्था के हवाले कर दिया। यहां के स्टाफ से बच्चा घुलमिल गया है। उसका नाम यासीन बताया जा रहा था पर अब इसे लोग आशीष बोल रहे हैं।

चाइल्ड लाइन ने नहीं दी जानकारी: डीएन शर्मा
बाल कल्याण समिति के कार्यवाहक प्रभारी डीएन शर्मा ने बताया कि उन्होंने अखबारों में ही बच्ची के मिलने की खबर पढ़ी थी। उन्हें अभी तक चाइल्ड लाइन ने कोई सूचना नहीं दी है। वे इसमें लापरवाही की जांच करेंगे। साथ ही खुद बच्ची को देखने जाएंगे। उसके सही होते ही संस्था में भेजा जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed