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अपनों ने ही खींच ली मंत्री भगवत की कुर्सी
बरेली
Updated Fri, 30 Oct 2015 02:08 AM IST
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बरेली। समाजवादी पार्टी में जिलाध्यक्ष और विधायक की गुटबाजी से तटस्थ रहकर एकला चलो की रणनीति भगवतसरन को भारी पड़ गई। एक पक्ष उनके खिलाफ रणनीति बना रहा था लेकिन उन्होंने अपना पक्ष बनाने के लिए किसी का साथ लेने की बजाए अपने आप को नवाबगंज तक सीमित कर लिया था। प्रापर्टी में दखल रखने वाले पार्टी के नेता एक बिल्डर के मामले में उनके खिलाफ हो गए। उधर नवाबगंज में चेयरमैन से पंगा लेने पर तो वह सीधे शिवपाल सिंह के निशाने पर आ गए थे। पुराने भाजपाई होने के नाते भाजपा के कुछ नेताओं से उनका संपर्क बना हुआ है । इसको लेकर भी पार्टी के लोगों ने ही उनके बारे में एक प्रजेंटेशन लखनऊ में दिया और भगवत की कुर्सी खींच ली गई।
समाजवादी पार्टी में स्थानीय स्तर पर लंबे समय से गुटबाजी चल रही है। पार्टी के कार्यक्रमों में भगवतसरन गंगवार ने दोनों धड़ों से समान दूरी बनाए रखने की कोशिश की। इस बीच उन्होंने एक नई संस्था बना कर कुछ सामाजिक गतिविधियां शुरू की तो उसमें ऐसे लोग भी उनके साथ थे जिन्हें भाजपाई माना जाता है। मंत्री के खिलाफ सरकार में शिकायतें जाने लगी। सरकारी जमीन बता कर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने से रोकने के मामले में भगवतसरन के खिलाफ मीर्िडया में खबरें दी गई। इस मामले में भगवत के जिद पकड़ने पर बीडीए और प्रशासन को हरकत में आना पड़ा और निर्माण रोक दिया गया। तब सपा में ही जमीनों का कारोबार करने वाले बड़े नेता और एक विधायक ने खुल कर बिल्डर का साथ दिया। पिछले साल नवाबगंज में सपा चेयरमैन और भाजपा नेता के बीच विवाद बढ़ा तो वहां के इंस्पेक्टर ने भाजपा नेता के खिलाफ एक दिन में 38 मुकदमे लिख दिए। भगवत ने इसे भी सही नहीं माना। बताया जाता है कि भगवत की पहल पर ही सपा के पारिवारिक माने जाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर को नवाबगंज से हटना पड़ा। इससे राज्य सरकार के एक कद्दावर मंत्री भी भगवत से नाराज हो गए।
कुछ नहीं कहना
बरेली में ही मौजूद भगवत शरण मुख्यमंत्री के इस फैसले पर कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं है। बोले मुझे भी खबर मिल रही है लेकिन इस बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहता।
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समाजवादी पार्टी में स्थानीय स्तर पर लंबे समय से गुटबाजी चल रही है। पार्टी के कार्यक्रमों में भगवतसरन गंगवार ने दोनों धड़ों से समान दूरी बनाए रखने की कोशिश की। इस बीच उन्होंने एक नई संस्था बना कर कुछ सामाजिक गतिविधियां शुरू की तो उसमें ऐसे लोग भी उनके साथ थे जिन्हें भाजपाई माना जाता है। मंत्री के खिलाफ सरकार में शिकायतें जाने लगी। सरकारी जमीन बता कर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने से रोकने के मामले में भगवतसरन के खिलाफ मीर्िडया में खबरें दी गई। इस मामले में भगवत के जिद पकड़ने पर बीडीए और प्रशासन को हरकत में आना पड़ा और निर्माण रोक दिया गया। तब सपा में ही जमीनों का कारोबार करने वाले बड़े नेता और एक विधायक ने खुल कर बिल्डर का साथ दिया। पिछले साल नवाबगंज में सपा चेयरमैन और भाजपा नेता के बीच विवाद बढ़ा तो वहां के इंस्पेक्टर ने भाजपा नेता के खिलाफ एक दिन में 38 मुकदमे लिख दिए। भगवत ने इसे भी सही नहीं माना। बताया जाता है कि भगवत की पहल पर ही सपा के पारिवारिक माने जाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर को नवाबगंज से हटना पड़ा। इससे राज्य सरकार के एक कद्दावर मंत्री भी भगवत से नाराज हो गए।
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कुछ नहीं कहना
बरेली में ही मौजूद भगवत शरण मुख्यमंत्री के इस फैसले पर कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं है। बोले मुझे भी खबर मिल रही है लेकिन इस बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहता।
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