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बड़े घर में अकेली थीं बूढ़ी अम्मा, बिस्तर में आग लगने से झुलसीं
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भतीजे को दी जेवर की पोटली, मकान पर दावा जताने वाले अधिवक्ता भी पहुंचे
बरेली। बड़े घर में बरसों से अकेली रह रहीं बूढ़ी अम्मा हीटर से बिस्तर में आग लगने से गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से परिजन निजी अस्पताल ले गए।
प्रेमनगर के मोहल्ला गुलाबनगर निवासी कौशल कुमारी को रविवार सुबह साठ फीसदी झुलसी हुई अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिवक्ता नरेंद्र कुमार नीरज इन्हें देखने आए। नीरज ने बताया कि उनके चाचा वरिष्ठ अधिवक्ता रहे गोविंद मुरारी लाल का कई साल पहले निधन हो चुका है। कौशल कुमारी कई साल से चाचा के ही साथ रहती थीं और उनकी मौत के बाद से उनके दो सौ वर्ग गज के मकान में अकेली रहती हैं। बताया कि कौशल कुमारी ने खुद को उनके चाचा की पत्नी बताकर संपत्ति पर दावा किया था लेकिन वह कोर्ट में यह बात साबित नहीं कर सकीं और केस हार गईं। चाचा की इनसे पहले या बाद में कोई संतान भी नहीं है। इस लिहाज से वह उस मकान के मालिक हैं जिसमें यह रहती हैं लेकिन कौशल कुमारी के जीवित रहने तक मकान खाली नहीं कराना चाहते। वहीं, कौशल कुमारी के भाई के बेटे दिपेक और उनकी पत्नी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल स्टाफ के मुताबिक वृद्धा ने इन लोगों को जेवरों से भरी पोटली दी। दोपहर के वक्त यही लोग वृद्धा को निजी अस्पताल ले गए। दिपेक ने बताया कि वे लोग करीब आधा किमी दूर अपने घर से रोज बुआ को खाना देने आते हैं। शनिवार शाम भी खाना देकर गए थे। बुआ रोज की तरह फोल्डिंग चारपाई पर सोई थीं, पास में हीटर लगा था। शायद रात में रजाई हीटर पर आने से बिस्तर में आग लग गई। इसी से वह झुलस गईं।
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बरेली। बड़े घर में बरसों से अकेली रह रहीं बूढ़ी अम्मा हीटर से बिस्तर में आग लगने से गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से परिजन निजी अस्पताल ले गए।
प्रेमनगर के मोहल्ला गुलाबनगर निवासी कौशल कुमारी को रविवार सुबह साठ फीसदी झुलसी हुई अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिवक्ता नरेंद्र कुमार नीरज इन्हें देखने आए। नीरज ने बताया कि उनके चाचा वरिष्ठ अधिवक्ता रहे गोविंद मुरारी लाल का कई साल पहले निधन हो चुका है। कौशल कुमारी कई साल से चाचा के ही साथ रहती थीं और उनकी मौत के बाद से उनके दो सौ वर्ग गज के मकान में अकेली रहती हैं। बताया कि कौशल कुमारी ने खुद को उनके चाचा की पत्नी बताकर संपत्ति पर दावा किया था लेकिन वह कोर्ट में यह बात साबित नहीं कर सकीं और केस हार गईं। चाचा की इनसे पहले या बाद में कोई संतान भी नहीं है। इस लिहाज से वह उस मकान के मालिक हैं जिसमें यह रहती हैं लेकिन कौशल कुमारी के जीवित रहने तक मकान खाली नहीं कराना चाहते। वहीं, कौशल कुमारी के भाई के बेटे दिपेक और उनकी पत्नी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल स्टाफ के मुताबिक वृद्धा ने इन लोगों को जेवरों से भरी पोटली दी। दोपहर के वक्त यही लोग वृद्धा को निजी अस्पताल ले गए। दिपेक ने बताया कि वे लोग करीब आधा किमी दूर अपने घर से रोज बुआ को खाना देने आते हैं। शनिवार शाम भी खाना देकर गए थे। बुआ रोज की तरह फोल्डिंग चारपाई पर सोई थीं, पास में हीटर लगा था। शायद रात में रजाई हीटर पर आने से बिस्तर में आग लग गई। इसी से वह झुलस गईं।
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