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शास्त्री मार्केट का छापा प्रकरण- व्यापारियों के विरोध के बाद बाबू को हटाया
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20 लाख की परछाईं साहब पर आई.. तभी बाबू की ‘बलि’ नहीं चढ़ाई
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बरेली। कागजों पर दवा की दुकानें सस्पेंड होने के बावजूद कारोबार होने का मामला मुख्यालय तक पहुंच गया है। सस्पेंड दुकान से कारोबार चलने के बाद बीस लाख की वसूली से मामला गरमा गया है। व्यापारियों के विरोध के बाद जिला एफएसडीए कार्यालय पर तैनात प्रमुख लिपिक राजीव कमल को हटाकर सीएसओ कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। इससे विभाग में हड़कंप मच गया है। लेकिन चर्चा रही कि एफएसडीए के अफसरों ने पहले ही बाबू को क्यों नहीं हटाया। क्या बीस लाख की परछाईं उन पर भी पड़ गई थी।
शास्त्री मार्केट स्थित एक प्रतिष्ठान का लाइसेंस पिछले दिनों ड्रग इंस्पेक्टर विवेक कुमार ने बीस दिन के लिए निलंबित किया था। लाइसेंस निलंबित पर नियमानुसार दुकानदार कोई कारोबार नहीं कर सकता है, लेकिन एफएसडीए कार्यालय की मिलीभगत से प्रतिष्ठान के संचालक क ारोबार करते रहे। इसकी शिकायत होने पर फिर छापा कार्रवाई हुई और दुकान सीज कर दी गई। बताया जाता है कि लाइसेंस बहाल करने और कारोबार पूर्ववत् करने के लिए 20 लाख रुपये की डील भी हुई। अमर उजाला ने जब इसका खुलासा किया तब विभाग में हडकंप मच गया और मामला अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन तक जा पहुंचा। खुलासा हुआ तो पता चला कि कई दुकानें इससे पहले भी निलंबित हुईं, लेकिन कारोबार करती रहीं। उधर दवा व्यापारियों ने कहना था कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरा मार्केट बदनाम हो रहा है। इसमें विभाग के अफसर शामिल हैं। व्यापारियों के विरोध के बीच एफएसडीए के लिपिक राजेश कमल को हटा दिया गया। उसकी जगह पर शिवम जौहरी को तैनात किया गया है। लेकिन चर्चा रही कि इतना सब होने के बाद जिम्मेदार अफसर ने कार्रवाई पहले ही क्यों नहीं की। क्या बीस लाख की डील की परछाईं उन पर भी पड़ गई थी। उधर एफएसडीए के अफसरों का कहना है कि ये रूटीन ट्रांसफर है। चर्चा है कि भारत ट्रेडर्स के लाइसेंस बहाली की गुपचुप तैयारी हो रही है। क्योंकि निलंबन अवधि के दौरान दुकान से कारोबार हुआ या नहीं हुआ, इस रिपोर्ट में लीपापोती की जा सकती है।
छिड़ी बहस: सोशल मीडिया पर 20 लाख का मुद्दा छाया
सस्पेंड दुकान पर कारोबार करने और चुपचाप लाइसेंस बहाल करने का खेल काफी समय से चुपचाप हो रहा था। मामला समाचार पत्रों में उछलने के बाद केमिस्ट एसोसिएशन के इंटर्नल ग्रुपों में बहस का मुद्दा बन गया है। सोशल मीडिया के कारोबारी बहस कर रहे हैं कि आपसी फूट की वजह से ये हो रहा है। क्योंकि इस समय जिले में तीन एसोसिएशन काम कर रही है। कुछ कारोबारी कमेंट्स कर रहे हैं कि दाल में नमक खाया जाए, जनहित और जन स्वास्थ्य से जुड़े कारोबार में किसी भी तरह की गड़बड़ी ठीक नहीं। उनका कहना है कि फेंसिड्रिल सीरप, नारकोटिक्स दवाएं आदि अवैध कारोबार से बरेली पहले ही बदनाम हो चुका है। पिछले साल से एक कारोबारी समेत दो लोग दिल्ली में अभी तक बंद हैं। इसलिए मिलजुलकर और नियम कायदे से काम किया जाएगा। कुछ ने लिखा है कि फुटकर विक्रेताओं को दवा बेचे जाने से पहले उसके लाइसेंस की स्थिति जरूर जान ली जाए और उसके आधार कार्ड या अन्य आईडी जमा कराई जाए। सैंपल और अवैध दवाओं के कारोबारियों का बहिष्कार किया जाये।
शास्त्री मार्केट स्थित एक प्रतिष्ठान का लाइसेंस पिछले दिनों ड्रग इंस्पेक्टर विवेक कुमार ने बीस दिन के लिए निलंबित किया था। लाइसेंस निलंबित पर नियमानुसार दुकानदार कोई कारोबार नहीं कर सकता है, लेकिन एफएसडीए कार्यालय की मिलीभगत से प्रतिष्ठान के संचालक क ारोबार करते रहे। इसकी शिकायत होने पर फिर छापा कार्रवाई हुई और दुकान सीज कर दी गई। बताया जाता है कि लाइसेंस बहाल करने और कारोबार पूर्ववत् करने के लिए 20 लाख रुपये की डील भी हुई। अमर उजाला ने जब इसका खुलासा किया तब विभाग में हडकंप मच गया और मामला अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन तक जा पहुंचा। खुलासा हुआ तो पता चला कि कई दुकानें इससे पहले भी निलंबित हुईं, लेकिन कारोबार करती रहीं। उधर दवा व्यापारियों ने कहना था कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरा मार्केट बदनाम हो रहा है। इसमें विभाग के अफसर शामिल हैं। व्यापारियों के विरोध के बीच एफएसडीए के लिपिक राजेश कमल को हटा दिया गया। उसकी जगह पर शिवम जौहरी को तैनात किया गया है। लेकिन चर्चा रही कि इतना सब होने के बाद जिम्मेदार अफसर ने कार्रवाई पहले ही क्यों नहीं की। क्या बीस लाख की डील की परछाईं उन पर भी पड़ गई थी। उधर एफएसडीए के अफसरों का कहना है कि ये रूटीन ट्रांसफर है। चर्चा है कि भारत ट्रेडर्स के लाइसेंस बहाली की गुपचुप तैयारी हो रही है। क्योंकि निलंबन अवधि के दौरान दुकान से कारोबार हुआ या नहीं हुआ, इस रिपोर्ट में लीपापोती की जा सकती है।
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छिड़ी बहस: सोशल मीडिया पर 20 लाख का मुद्दा छाया
सस्पेंड दुकान पर कारोबार करने और चुपचाप लाइसेंस बहाल करने का खेल काफी समय से चुपचाप हो रहा था। मामला समाचार पत्रों में उछलने के बाद केमिस्ट एसोसिएशन के इंटर्नल ग्रुपों में बहस का मुद्दा बन गया है। सोशल मीडिया के कारोबारी बहस कर रहे हैं कि आपसी फूट की वजह से ये हो रहा है। क्योंकि इस समय जिले में तीन एसोसिएशन काम कर रही है। कुछ कारोबारी कमेंट्स कर रहे हैं कि दाल में नमक खाया जाए, जनहित और जन स्वास्थ्य से जुड़े कारोबार में किसी भी तरह की गड़बड़ी ठीक नहीं। उनका कहना है कि फेंसिड्रिल सीरप, नारकोटिक्स दवाएं आदि अवैध कारोबार से बरेली पहले ही बदनाम हो चुका है। पिछले साल से एक कारोबारी समेत दो लोग दिल्ली में अभी तक बंद हैं। इसलिए मिलजुलकर और नियम कायदे से काम किया जाएगा। कुछ ने लिखा है कि फुटकर विक्रेताओं को दवा बेचे जाने से पहले उसके लाइसेंस की स्थिति जरूर जान ली जाए और उसके आधार कार्ड या अन्य आईडी जमा कराई जाए। सैंपल और अवैध दवाओं के कारोबारियों का बहिष्कार किया जाये।
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