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बिना एटीएम कार्ड से उड़ रहे पैसे.. तो क्या बैंक वाले भी..!
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एसएसपी ने लीड बैंक मैनेजर को पत्र लिखकर किया इशारा, पूछा खुद कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते बैंक
धोखाधड़ी के मामलों में जरूरी डिटेल देने में भी हिचकिचाहट
बेहतर होगा कि पुलिस के बजाय बैंक अफसर ही करा लें जांच
बरेली। देवरनियां के रोहली गांव में रहने वाली प्रियंका चाहल हैरतअंगेज ढंग से ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गईं। इटौआ शरीफ में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में उनके एकाउंट से 25 हजार रुपये निकाल लिए गए, फिर भी बैंक के स्टाफ ने यह तक बताकर नहीं दिया कि यह रकम किस माध्यम से निकाली गई है। दिलचस्प यह कि प्रियंका एटीएम तक का इस्तेमाल नहीं करतीं। एसएसपी ने इस मामले में शिकायत के बाद लीड बैंक मैनेजर को पत्र लिखकर बैंकों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है, उनसे रिजर्व बैंक की गाइड लाइन भी मांगी है ताकि इन मामलों में पुलिस और बैंक दोनों स्तर पर कार्रवाई की सीमा साफ हो सके।
एसएसपी ने लीड बैंक मैनेजर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि प्रियंका ने पुलिस के पास शिकायत करने से पहले बैंक के कई चक्कर काटे, लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अब पुलिस को बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के ही खिलाफ शिकायत दी है। एसएसपी ने कहा है कि बेहतर है कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच की नौबत आने से पहले बैंक अधिकारी ही खुद जांच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करें। उन्होंने इस पत्र में यह भी कहा है कि जिस तरह पुलिस के पास इस तरह की शिकायतें पहुंच रही हैं, उससे साफ जाहिर है कि इन शिकायतों पर बैंक के स्तर पर न कोई सुनवाई हो रही है न कार्रवाई। यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों का उल्लंघन है। एसएसपी ने लीड बैंक मैनेजर से रिजर्व बैंक की गाइड लाइन भी उपलब्ध कराने को कहा है।
लगातार बढ़ रहे हैं बैंक खातों से रकम उड़ाने के मामले
पुलिस के पास आने वाली शिकायतें बता रही हैं कि बैंक खातों से रकम उड़ा देने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में पीड़ितों को न बैंक स्टाफ से कोई मदद मिलती है न ही पुलिस से। स्थिति यह है कि बैंक स्टाफ पीड़ित को पुलिस के पास जाने की सलाह देकर टालमटोल कर देता है और पुलिस उसे बैंक की तरफ टाल देती है। अगर धोखाधड़ी का मामला पुलिस दर्ज भी कर लेती है तो उसे छानबीन के लिए सर्विलांस सेल को ट्रांसफर कर दिया जाता है जहां ऐसे मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। आमतौर पर ठगी गई रकम भी ज्यादा बड़ी नहीं होती लिहाजा पीड़ित लोग कुछ दिन चक्कर काटने के बाद घर बैठ जाते हैं।
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धोखाधड़ी के मामलों में जरूरी डिटेल देने में भी हिचकिचाहट
बेहतर होगा कि पुलिस के बजाय बैंक अफसर ही करा लें जांच
बरेली। देवरनियां के रोहली गांव में रहने वाली प्रियंका चाहल हैरतअंगेज ढंग से ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गईं। इटौआ शरीफ में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में उनके एकाउंट से 25 हजार रुपये निकाल लिए गए, फिर भी बैंक के स्टाफ ने यह तक बताकर नहीं दिया कि यह रकम किस माध्यम से निकाली गई है। दिलचस्प यह कि प्रियंका एटीएम तक का इस्तेमाल नहीं करतीं। एसएसपी ने इस मामले में शिकायत के बाद लीड बैंक मैनेजर को पत्र लिखकर बैंकों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है, उनसे रिजर्व बैंक की गाइड लाइन भी मांगी है ताकि इन मामलों में पुलिस और बैंक दोनों स्तर पर कार्रवाई की सीमा साफ हो सके।
एसएसपी ने लीड बैंक मैनेजर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि प्रियंका ने पुलिस के पास शिकायत करने से पहले बैंक के कई चक्कर काटे, लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अब पुलिस को बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के ही खिलाफ शिकायत दी है। एसएसपी ने कहा है कि बेहतर है कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच की नौबत आने से पहले बैंक अधिकारी ही खुद जांच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करें। उन्होंने इस पत्र में यह भी कहा है कि जिस तरह पुलिस के पास इस तरह की शिकायतें पहुंच रही हैं, उससे साफ जाहिर है कि इन शिकायतों पर बैंक के स्तर पर न कोई सुनवाई हो रही है न कार्रवाई। यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों का उल्लंघन है। एसएसपी ने लीड बैंक मैनेजर से रिजर्व बैंक की गाइड लाइन भी उपलब्ध कराने को कहा है।
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लगातार बढ़ रहे हैं बैंक खातों से रकम उड़ाने के मामले
पुलिस के पास आने वाली शिकायतें बता रही हैं कि बैंक खातों से रकम उड़ा देने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में पीड़ितों को न बैंक स्टाफ से कोई मदद मिलती है न ही पुलिस से। स्थिति यह है कि बैंक स्टाफ पीड़ित को पुलिस के पास जाने की सलाह देकर टालमटोल कर देता है और पुलिस उसे बैंक की तरफ टाल देती है। अगर धोखाधड़ी का मामला पुलिस दर्ज भी कर लेती है तो उसे छानबीन के लिए सर्विलांस सेल को ट्रांसफर कर दिया जाता है जहां ऐसे मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। आमतौर पर ठगी गई रकम भी ज्यादा बड़ी नहीं होती लिहाजा पीड़ित लोग कुछ दिन चक्कर काटने के बाद घर बैठ जाते हैं।
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