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अपेक्स और दर्पिन अस्पताल पर एफआईआर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कोरोना संक्रमित बुजुर्ग के परिवार से जमकर वसूली के बावजूद की बदसलूकी, मौत होने के बाद शव भी बदल दिया
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एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर कमिश्नर ने डीएम को दिया था एफआईआर कराने का आदेश
विधायक की शिकायत पर हुई जांच, महामारी और आपदा अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस
बरेली। कमिश्नर के आदेश पर पीलीभीत बाईपास के दर्पिन और अपेक्स अस्पताल के खिलाफ थाना इज्जतनगर में महामारी और आपदा अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। दर्पिन अस्पताल पर कोरोना संक्रमित बुजुर्ग के इलाज में लापरवाही और उनके परिवार वालों से बदसलूकी का आरोप है जबकि अपेक्स अस्पताल के खिलाफ बुजुर्ग की मौत होने के बाद उनका शव बदल देने और परिवार वालों से मारपीट का आरोप है। दोनों अस्पतालों के खिलाफ मरीजों का बड़े पैमाने पर शोषण करने की भी शिकायत की गई थी।
बिथरी चैनपुर के विधायक राजेश मिश्र पप्पू भरतौल ने कमिश्नर से दोनों अस्पतालों की शिकायत की थी जिस पर कमिश्नर ने एसडीएम सदर विशु राजा को जांच का निर्देश दिया था। हाल ही में एसडीएम ने आरोपों की पुष्टि करते हुए दोनों अस्पतालों पर महामारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति के साथ अपनी जांच रिपोर्ट रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर आर. रमेश कुमार ने डीएम नितीश कुमार को मजिस्ट्रेटी जांच कराने और दोनों अस्पतालों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराने का आदेश दिया था। बुधवार को थाना इज्जतनगर में दोनों अस्पतालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।
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एसडीएम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक दर्पिन अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित हरीश गुप्ता के साथ वहां के डॉ. दर्पिन मेहरा और स्टाफ ने दुर्व्यवहार कर उन्हें जबरन डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद हरीश गुप्ता को अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने कोविड प्रोटोकॉल के विरुद्ध उनका शव सीधे श्मशान भूमि भेजने के बाद उनके परिजन को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोग श्मशान घाट पहुंचे तो शव हरीश के बजाय किसी और संक्रमित बुजुर्ग का निकला। अपेक्स अस्पताल में हरीश गुप्ता के परिजन से जमकर पैसा भी वसूला गया।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक हरीश के परिजन की आपत्ति के बावजूद दोनों अस्पतालों के प्रबंधन ने कोई सहयोग नहीं किया। मरीजों के इलाज में भी अनियमितताओं की पुष्टि हुई। अस्पताल प्रबंधन पर लगे सभी आरोप जांच में सही पाए गए। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर में किसी भी मरीज या तीमारदार के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई थी। जिस मरीज के परिजन ने आरोप लगाया था, उसने खुद अस्पताल के एक कर्मचारी को बुरी तरह पीटा था। ज्यादा फीस लेने का आरोप भी निराधार है।
पुलिस ने भी नहीं किया था सहयोग
अपेक्स अस्पताल में भर्ती हरीश की 22 अप्रैल को मौत हो गई थी। उनके परिजन का आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें मौत की सूचना नहीं दी। शव को सीधे श्मशान भूमि भेजने के बाद इस बारे में उन्हें बताया। वे लोग आननफानन श्मशान भूमि पहुंचे जहां शव को लावारिस मानकर चिता पर रख दिया गया था। उन्होंने चेहरा देखा तो वह किसी दूसरे बुजुर्ग का शव निकला। अस्पताल प्रबंधन से बात की तो उसने बदसलूकी की। पुलिस से शिकायत की लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। इसके बाद परिजन ने विधायक से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की थी।
मिशन अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
कोविड काल में चार पेड कोविड अस्पतालों के खिलाफ आठ संक्रमितों के परिजन ने साथ दुर्व्यवहार, मनमुताबिक लाखों का बिल बनाने आदि की शिकायतें की गईं थीं। मामला शासन तक पहुंचने पर जांच के निर्देश दिए गए। एसीएमओ डॉ. आरएन गिरि को जांच सौंपी गई। नोटिस जारी होने पर तीन अस्पतालों ने तो बिलों में तकनीकी खामी बताकर वसूली गई अतिरिक्त रकम संक्रमितों के परिजन को वापस कर दी लेकिन मिशन अस्पताल ने न तो रकम वापस की और न ही इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को कोई जवाब दिया है। एसीएमओ ने शासन स्तर से कार्रवाई की संस्तुति करने की बात कही है।
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एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर कमिश्नर ने डीएम को दिया था एफआईआर कराने का आदेश
विधायक की शिकायत पर हुई जांच, महामारी और आपदा अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस बरेली। कमिश्नर के आदेश पर पीलीभीत बाईपास के दर्पिन और अपेक्स अस्पताल के खिलाफ थाना इज्जतनगर में महामारी और आपदा अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। दर्पिन अस्पताल पर कोरोना संक्रमित बुजुर्ग के इलाज में लापरवाही और उनके परिवार वालों से बदसलूकी का आरोप है जबकि अपेक्स अस्पताल के खिलाफ बुजुर्ग की मौत होने के बाद उनका शव बदल देने और परिवार वालों से मारपीट का आरोप है। दोनों अस्पतालों के खिलाफ मरीजों का बड़े पैमाने पर शोषण करने की भी शिकायत की गई थी।
बिथरी चैनपुर के विधायक राजेश मिश्र पप्पू भरतौल ने कमिश्नर से दोनों अस्पतालों की शिकायत की थी जिस पर कमिश्नर ने एसडीएम सदर विशु राजा को जांच का निर्देश दिया था। हाल ही में एसडीएम ने आरोपों की पुष्टि करते हुए दोनों अस्पतालों पर महामारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति के साथ अपनी जांच रिपोर्ट रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर आर. रमेश कुमार ने डीएम नितीश कुमार को मजिस्ट्रेटी जांच कराने और दोनों अस्पतालों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराने का आदेश दिया था। बुधवार को थाना इज्जतनगर में दोनों अस्पतालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।
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एसडीएम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक दर्पिन अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित हरीश गुप्ता के साथ वहां के डॉ. दर्पिन मेहरा और स्टाफ ने दुर्व्यवहार कर उन्हें जबरन डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद हरीश गुप्ता को अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने कोविड प्रोटोकॉल के विरुद्ध उनका शव सीधे श्मशान भूमि भेजने के बाद उनके परिजन को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोग श्मशान घाट पहुंचे तो शव हरीश के बजाय किसी और संक्रमित बुजुर्ग का निकला। अपेक्स अस्पताल में हरीश गुप्ता के परिजन से जमकर पैसा भी वसूला गया।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक हरीश के परिजन की आपत्ति के बावजूद दोनों अस्पतालों के प्रबंधन ने कोई सहयोग नहीं किया। मरीजों के इलाज में भी अनियमितताओं की पुष्टि हुई। अस्पताल प्रबंधन पर लगे सभी आरोप जांच में सही पाए गए। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर में किसी भी मरीज या तीमारदार के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई थी। जिस मरीज के परिजन ने आरोप लगाया था, उसने खुद अस्पताल के एक कर्मचारी को बुरी तरह पीटा था। ज्यादा फीस लेने का आरोप भी निराधार है।