UP Budget 2024: पूर्वांचल विकास निधि से भी कम था वर्ष 1972 का पूरा बजट, नारायण दत्त तिवारी ने किया था पेश
मार्च 1972 में तत्कालीन वित्तमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 509 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। वर्ष 2024 के बजट में इससे अधिक तो पूर्वांचल विकास निधि के रूप में 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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सोमवार को योगी सरकार ने 7.36 लाख करोड़ का बजट पेश किया। यह प्रदेश का अब तक सबसे बड़ा बजट है। इसमें पूर्वांचल विकास निधि के रूप में 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 56 साल पहले प्रदेश का पूरा बजट ही महज 509 करोड़ रुपये का था। 1972 में तत्कालीन वित्तमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 509 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह सभी तथ्य अमर उजाला आर्काइव के पुराने पन्नों पर दर्ज हैं।
मार्च 1972 में तत्कालीन वित्तमंत्री नारायण दत्त तिवारी की ओर से पेश किए गए बजट में राजस्व घाटा 18.14 करोड़ और पूंजीगत घाटा 42.45 करोड़ दिखाया गया था। इस घाटे को पूरा करने के लिए राजस्व वसूली में कड़ाई और शराब की दुकानों की नीलामी के आदेश दिए गए थे। इसके अलावा 31.39 करोड़ रुपये के नए कर लगाए गए थे।
तत्कालीन वित्तमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि सरकार ने ग्रामीण विकास निधि स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए धन जुटाने के उद्देश्य से बड़ी जोतों पर क्षेत्रफल के अनुसार शुल्क लगाया जाएगा। इससे चार करोड़ रुपये की आय होगी। वित्त मंत्री ने कहा था कि राजस्व व्यय का अनुमान 528.04 करोड़ रुपये है। इसमें 57.16 करोड़ रुपये विगत योजनाओं के लिए हैं।
राज्यकर्मियों की मिली थी 35 रुपये तक की राहत
20 मार्च 1972 को पेश हुए बजट में राज्यकर्मियों को उस समय 35 रुपये तक की राहत मिली थी। 85 रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले को पांच रुपये, 86 से 209 रुपये तक वेतन पाने वालों को 15 रुपये, 210 से 499 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मियों को 20 रुपये और 500 से 1200 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मियों को 35 रुपये तक की राहत दी गई थी। सरकार ने उस समय यह वेतन आयोग की सिफारिश पर किया था। वित्तमंत्री ने कहा था कि यह राहत देने से राज्यकोष पर 15.70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
नए करों की घोषणा नहीं हुई, फिर भी हुई वसूली
वित्तमंत्री ने उस समय नए करों की घोषणा नहीं की थी, मगर इसके बावजूद नए कर लागू हुए थे। यानी कह सकते हैं कि घुमा कर कान पकड़ा गया। जैसे घाटे की पूर्ति के लिए नए शुल्क लागू किए गए थे। ग्रामीण विकास कोष में छह करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी गई थी। शराब की दुकानों की नीलामी से 50 लाख रुपये जुटाए गए थे। छह करोड़ रुपये राजस्व वसूली के लिए कड़े कदम उठाए गए थे।