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Bareilly News: इशारों की भाषा सीखकर मूकबधिरों ने लिखी सफलता की कहानी
Tue, 23 Sep 2025 02:16 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 23 Sep 2025 02:16 AM IST
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राजकीय सांकेतिक विद्यालय में पढ़ाई करते छात्र : संवाद
बरेली। सांकेतिक भाषा का केंद्र राजकीय सांकेतिक विद्यालय बना है जहां 125 छात्र सांकेतिक भाषा सीखने से पहले की भाषा टोटल कम्युनिकेशन सीख रहे हैं। इससे सांकेतिक भाषा का ज्ञान प्राप्त कर निकले मूकबधिरों का जीवन आसान बना है।
प्रधानाध्यापक बलवंत सिंह ने बताया कि सांकेतिक भाषा से पहले एलिमेंट्री कक्षाओं में छात्रों को केवल टोटल कम्युनिकेशन सिखाया जाता है। टोटल कम्युनिकेशन में बच्चे का प्रशिक्षण ऐसा होता है कि यदि वह सुनने या बोलने की थोड़ी भी क्षमता है तो उसका इस्तेमाल कर सके। इसके बाद वह सांकेतिक भाषा को आसानी से सीख सकता है। स्कूल में इंटरप्रेटर के दो पद चार साल से सृजित हुए हैं। कुछ समय से स्कूल में चल रही शिक्षक की कमी के कारण कर्मचारियों ने भी छात्रों के लिए टोटल कम्युनिकेशन सीख लिया है जो छात्रों को पढ़ने में सहायता कर रहे हैं।
प्रधानाचार्य का कहना है ये विद्यालय 1951 से संचालित है। यहां संसाधन कम होने के बावजूद छात्र कुछ बन पा रहे हैं। जिन बच्चों को अभिभावक अकेले बाहर तक भेजने से डरते हैं, उनका अपने पैरों पर खड़े होना गर्व की बात है।
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पहले सीखी अब सिखा रहे सांकेतिक भाषा
राजकीय सांकेतिक विद्यालय 2013 से पासआउट हुए हरेंद्र कुमार वर्तमान में हिमाचल के मंडी में कंपोजिट रीजनल सेंटर में मास्टर ट्रेनर हैं। हरेंद्र के अनुसार वह 2002 से विद्यालय से पढ़कर निकले जहां सांकेतिक भाषा के साथ अन्य विषयों का भी ज्ञान मिला। इसके बाद शिक्षकों के प्रोत्साहन से हिम्मत बढ़ी। नई दिल्ली से एडवांस कोर्स कर आज उन्होंने सफलता हासिल की है।
सांकेतिक भाषा सीख बना जीवन आसान
साउथ सिटी निवासी सुरेंद्र दत्त शर्मा राजकीय सांकेतिक विद्यालय से पासआउट हैं। सुरेंद्र, वस्त्र मंत्रालय की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री शाहजहांपुर में कार्यरत रहे। चार साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनका मानना है कि सांकेतिक भाषा ने उनका जीवन आसान बनाया है। अपने मूकबधिर होने के कारण परिवार को कभी दिक्कत नहीं होने दी।
मूक बधिरता को नहीं बनने दिया कमजोरी
बड़ा बाजार निवासी अनिल कुमार त्रिपाठी इफको कंपनी में 30 वर्ष की नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा लखनऊ से पूरी की। इसके बाद आईटी मशीन की ट्रेनिंग हैदराबाद में ली। दो साल पहले सेवानिवृत्त होने के बाद अन्य मूकबधिरों के साथ एक रेस्टोरेंट भी चला रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के डेफ टेनिस खिलाड़ी भी रह चुके हैं।
1296 मूकबधिर पा रहे पेंशन
जिले में वर्तमान में कुल 1296 मूकबधिर दिव्यांग पेंशन पा रहे हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 835 बधिर हैं और शहरी क्षेत्र के 461 बधिरों को पेंशन मिल रही है।
खेलों में मूकबधिर खिलाड़ी हमेशा से ही आगे रहे हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रिदम शर्मा का नाम प्रचलित है। इनके अलावा 2002-03 में ताइवान खेलने गए मेहताब हुसैन, आसिफ आयूबी ने भी एथलेटिक्स में नाम रोशन किया है।
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प्रधानाध्यापक बलवंत सिंह ने बताया कि सांकेतिक भाषा से पहले एलिमेंट्री कक्षाओं में छात्रों को केवल टोटल कम्युनिकेशन सिखाया जाता है। टोटल कम्युनिकेशन में बच्चे का प्रशिक्षण ऐसा होता है कि यदि वह सुनने या बोलने की थोड़ी भी क्षमता है तो उसका इस्तेमाल कर सके। इसके बाद वह सांकेतिक भाषा को आसानी से सीख सकता है। स्कूल में इंटरप्रेटर के दो पद चार साल से सृजित हुए हैं। कुछ समय से स्कूल में चल रही शिक्षक की कमी के कारण कर्मचारियों ने भी छात्रों के लिए टोटल कम्युनिकेशन सीख लिया है जो छात्रों को पढ़ने में सहायता कर रहे हैं।
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प्रधानाचार्य का कहना है ये विद्यालय 1951 से संचालित है। यहां संसाधन कम होने के बावजूद छात्र कुछ बन पा रहे हैं। जिन बच्चों को अभिभावक अकेले बाहर तक भेजने से डरते हैं, उनका अपने पैरों पर खड़े होना गर्व की बात है।
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पहले सीखी अब सिखा रहे सांकेतिक भाषा
राजकीय सांकेतिक विद्यालय 2013 से पासआउट हुए हरेंद्र कुमार वर्तमान में हिमाचल के मंडी में कंपोजिट रीजनल सेंटर में मास्टर ट्रेनर हैं। हरेंद्र के अनुसार वह 2002 से विद्यालय से पढ़कर निकले जहां सांकेतिक भाषा के साथ अन्य विषयों का भी ज्ञान मिला। इसके बाद शिक्षकों के प्रोत्साहन से हिम्मत बढ़ी। नई दिल्ली से एडवांस कोर्स कर आज उन्होंने सफलता हासिल की है।
सांकेतिक भाषा सीख बना जीवन आसान
साउथ सिटी निवासी सुरेंद्र दत्त शर्मा राजकीय सांकेतिक विद्यालय से पासआउट हैं। सुरेंद्र, वस्त्र मंत्रालय की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री शाहजहांपुर में कार्यरत रहे। चार साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनका मानना है कि सांकेतिक भाषा ने उनका जीवन आसान बनाया है। अपने मूकबधिर होने के कारण परिवार को कभी दिक्कत नहीं होने दी।
मूक बधिरता को नहीं बनने दिया कमजोरी
बड़ा बाजार निवासी अनिल कुमार त्रिपाठी इफको कंपनी में 30 वर्ष की नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा लखनऊ से पूरी की। इसके बाद आईटी मशीन की ट्रेनिंग हैदराबाद में ली। दो साल पहले सेवानिवृत्त होने के बाद अन्य मूकबधिरों के साथ एक रेस्टोरेंट भी चला रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के डेफ टेनिस खिलाड़ी भी रह चुके हैं।
1296 मूकबधिर पा रहे पेंशन
जिले में वर्तमान में कुल 1296 मूकबधिर दिव्यांग पेंशन पा रहे हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 835 बधिर हैं और शहरी क्षेत्र के 461 बधिरों को पेंशन मिल रही है।
खेलों में मूकबधिर खिलाड़ी हमेशा से ही आगे रहे हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रिदम शर्मा का नाम प्रचलित है। इनके अलावा 2002-03 में ताइवान खेलने गए मेहताब हुसैन, आसिफ आयूबी ने भी एथलेटिक्स में नाम रोशन किया है।