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दूसरे प्रदेश के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण पर उलझन
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बरेली। बरेली कॉलेज के प्रॉस्पेक्टस से दूसरे प्रदेश के छात्र-छात्राओं के एडमिशन के लिए एक लाइन गायब होने से गफलत की स्थिति बन गई है। इसके चलते छात्र-छात्राएं कॉलेज प्रशासन से उलझ रहे हैं।
पिछले साल बरेली कॉलेज के प्रॉस्पेक्टस में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले दूसरे प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए योग्यता के आधार पर प्रत्येक पाठ्यक्रम में एडमिशन के लिए सिर्फ पांच प्रतिशत सीटें ही आरक्षित की जाएंगी। इन अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी का माना जाएगा। लेकिन इस बार जब आरक्षण लागू किया गया तो प्रॉस्पेक्टस में से दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों के लिए पिछले साल वाला नियम हटा दिया गया। इसके चलते छात्र नेता मोहित कुमार सिंह ने दूसरे राज्य के कुछ छात्रों के साथ प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा से शिकायत करके आरक्षण देने की मांग की थी। लेकिन विश्वविद्यालय की प्रवेश नियमावली में दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों के आरक्षण का कोई जिक्र न होने से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकी। इसके चलते असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस संबंध में जब रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एसके पांडेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दूसरे राज्य के अधिकतम पांच प्रतिशत छात्र एडमिशन ले सकते हैं और उन्हें सामान्य श्रेणी का ही माना जाएगा। इसमें आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
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पिछले साल बरेली कॉलेज के प्रॉस्पेक्टस में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले दूसरे प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए योग्यता के आधार पर प्रत्येक पाठ्यक्रम में एडमिशन के लिए सिर्फ पांच प्रतिशत सीटें ही आरक्षित की जाएंगी। इन अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी का माना जाएगा। लेकिन इस बार जब आरक्षण लागू किया गया तो प्रॉस्पेक्टस में से दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों के लिए पिछले साल वाला नियम हटा दिया गया। इसके चलते छात्र नेता मोहित कुमार सिंह ने दूसरे राज्य के कुछ छात्रों के साथ प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा से शिकायत करके आरक्षण देने की मांग की थी। लेकिन विश्वविद्यालय की प्रवेश नियमावली में दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों के आरक्षण का कोई जिक्र न होने से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकी। इसके चलते असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस संबंध में जब रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एसके पांडेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दूसरे राज्य के अधिकतम पांच प्रतिशत छात्र एडमिशन ले सकते हैं और उन्हें सामान्य श्रेणी का ही माना जाएगा। इसमें आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
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