Diksha Death Case: डॉ. दीक्षा की मौत को परिवार ने माना हादसा, पिता बोले- अब नहीं चाहते कोई कार्रवाई
बरेली की रहने वाली दीक्षा ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमबीबीएस किया था। 12 जून को वह अपने दो साथी डॉक्टरों के साथ कॉलेज के परीक्षा हॉल की पांचवीं मंजिल पर गई थीं। वहां से डक्ट में नीचे आ गिरीं और उनकी मौत हो गई थी। उनके पिता ने पहले साजिश की आशंका जताई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद परिवार ने इस हादसा मान लिया है।
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पांचवीं मंजिल से गिरकर हुई डॉ. दीक्षा की मौत के मामले में अब उनके परिजन कोई कार्रवाई नहीं चाहते। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद परिजन यह मान गए हैं कि हादसे के दौरान ही दीक्षा की मौत हुई है। परिजन अब कानपुर जाकर बेटी का सामान लेकर आएंगे।
डॉ. दीक्षा की मौत के मामले में शनिवार को उनके पिता प्रदीप तिवारी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने किसी भी कार्रवाई से इनकार कर दिया है। प्रदीप तिवारी का कहना है कि अब वह कोई कार्रवाई नहीं चाहते। घटना को वह हादसा मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब वह कानपुर जाकर बेटी का सामान लेकर आ जाएंगे। इस बारे में और कुछ नहीं कहना।
पांचवीं मंजिल से गिरकर हुई थी मौत
डॉ. दीक्षा बरेली के सुरेश शर्मा नगर की निवासी थीं। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमबीबीएस किया था। बीते बुधवार को वह अपने दो साथी डाक्टरों के साथ मेडिकल कॉलेज के परीक्षा भवन की पांचवीं मंजिल पर गई थीं। वहां से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर उनकी मौत हो गई थी। उस समय डॉ.दीक्षा के साथ उनके दो दोस्त डॉक्टर भी थे।
घटना के बाद पिता प्रदीप तिवारी कानपुर पुलिस से बेटी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांग रहे थे। शनिवार को पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट भेज दी। इसमें चोटों के कारण मौत होना पाया गया था। इसके बाद परिजन भी कानपुर पुलिस के तर्क से सहमत हो गए। अब वह कोई कार्रवाई नहीं चाहते।
पिता ने जताई थी साजिश की आशंका
दीक्षा के पिता प्रदीप तिवारी ने पहले साजिश की आशंका जताई थी। उन्होंने बताया था कि एक महीने पहले दीक्षा घर आई थीं। कानपुर में एमबीबीएस पूरा होने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में दो साल के अनुबंध पर उन्हें नौकरी मिली थी। इसी महीने 25 जून को उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन करना था। दस जून को वह मेरठ जाकर बेटी की ज्वाइनिंग संबंधी कागजी औपचारिकता पूरी कराकर आए थे। वह काफी खुश थी। दीक्षा की मौत से पूरा परिवार टूट गया।