नीलम के हौसले को सलाम: हाथों से दिव्यांग, पैरों से पास कर रहीं जिंदगी का हर इम्तिहान
नीलम मौर्य बरेली कॉलेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। वो दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नीलम अपने पैरों से सारे इम्तिहान पास कर रही हैं।
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कड़ाके की सर्दी, कॉलेज से 24 किलोमीटर की दूरी और तमाम चुनौतियां... दिव्यांग नीलम रोज ही इन सबका सामना करती हैं। वह समय से पहले ही कक्षा में पहुंच जाती हैं। जन्मजात दिव्यांग होने से उनके हाथ काम नहीं करते हैं। अन्य छात्रों जैसी तेजी से ही वह पैरों से प्रश्नपत्र को हल करती हैं। वह मानती हैं कि शिक्षा ही उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। इसलिए हजारों बाधाओं के बाद भी शिक्षक बनने के सपने को संजोए वह निरंतर प्रयासरत हैं।
बरेली के पितांबरपुर रेलवे स्टेशन रोड निवासी नीलम मौर्य बरेली कॉलेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने किशोर चंद कन्या इंटर कॉलेज से 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। गणित में विशेष रुचि होने के कारण वह इस विषय की शिक्षिका बनना चाहती हैं।
नीलम की मां गायत्री देवी गृहिणी और पिता तेजराम सब्जी विक्रेता हैं। वह पांच बहनों में चौथे नंबर की हैं। नीलम बताती हैं कि उनकी कमजोरियों को लेकर लोग ताने भी देते हैं, लेकिन वह इस पर ध्यान नहीं देती हैं।
हर कदम पर कठिनाइयां
नीलम बताती हैं कि दिव्यांगता के कारण हर कदम पर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वह बस के बजाय ऑटो में ही सफर करती हैं, क्योंकि उसमें किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती है। वह बताती हैं कि कोविड काल में पैर में फ्रैक्चर हो जाने के बाद वह अधिक समय तक लिखती हैं तो पैर में सूजन आ जाती है। वह पैर के सहारे से ही सभी कार्य करती हैं।
दोस्तों का रहता है सहयोग
नीलम बताती हैं कि हर कदम पर उन्हें दोस्तों का सहयोग मिला है। स्कूल में भी दोस्तों ने काफी मदद की। कॉलेज में परीक्षाओं के समय भी दोस्त ही उनके जूते खोलते और पहनाते हैं। हाल में ही वह गणित की प्रयोगात्मक परीक्षा देने आई थीं तो दोस्तों ने ही जूते पहनाए। वह कहती हैं कि उनके दोस्त खास हैं। वे उनकी कमजोरी का मजाक नहीं उड़ाते, बल्कि हर कदम पर उनका सहयोग करते हैं।