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नहीं रहे बार सचिव अमर भारती
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बरेली। आंतों के कैंसर से जूझ रहे बार एसोसिएशन के सचिव 60 वर्षीय अमर भारती का शनिवार शाम दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। करीब एक सप्ताह पहले अचानक हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था। अमर भारती के निधन से वकीलों में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार के मुताबिक कुछ दिन पहले मस्तिष्क में खून का थक्का जम जाने की वजह से उन्हें शहर के ही एक अस्पताल मे भर्ती किया गया था जिसके बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट आए थे। कुछ ही दिन बाद उन्हें पेट में तकलीफ महसूस हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया लेकिन फिर भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें दिल्ली ले जाया गया। अमर भारती के भाई डॉ. अजय भारती ने बताया कि उन्हें बड़ी आंत का कैंसर था। अमर भारती के दो बेटी और एक बेटा है। उन्होंने बरेली कॉलेज से कानून की डिग्री लेने के बाद 1983 में कचहरी में वकालत शुरू की थी। 2003 में बरेली बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, फिर 2004 और 2005 में वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए। 2006 में सचिव पद पर विजयी हुए और फिर 2012 तक लगातार सचिव रहे। 2014 के बाद वह फिर लगातार सचिव चुने जाते रहे। अमर भारती के पिता रवींद्र भारती भी अधिवक्ता हैं। उन्हीं के नाम पर बरेली बार में रवींद्र भारती बार भवन बनाया गया था।
अमर भारती के निधन से बरेली बार को अपूर्णनीय क्षति हुई है। अधिवक्ताओं में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कभी चुनाव नहीं हारे। उनकी मौत के बाद सभी साथियों को अपने स्वास्थ्य का और अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है। -शिरीष मेहरोत्रा, सदस्य बार काउंसिल ऑफ यूपी
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अमर भारती के निधन से बरेली बार को अपार हानि हुई है और मेरा एक निकट सहयोगी भी चला गया जिसकी कमी पूरी नहीं हो पाएगी। वकीलों में वह बहुत लोकप्रिय थे। उनके परिवार को मेरी ओर से बहुत सांत्वना। - घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष बरेली बार एसोसिएशन
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परिवार के मुताबिक कुछ दिन पहले मस्तिष्क में खून का थक्का जम जाने की वजह से उन्हें शहर के ही एक अस्पताल मे भर्ती किया गया था जिसके बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट आए थे। कुछ ही दिन बाद उन्हें पेट में तकलीफ महसूस हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया लेकिन फिर भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें दिल्ली ले जाया गया। अमर भारती के भाई डॉ. अजय भारती ने बताया कि उन्हें बड़ी आंत का कैंसर था। अमर भारती के दो बेटी और एक बेटा है। उन्होंने बरेली कॉलेज से कानून की डिग्री लेने के बाद 1983 में कचहरी में वकालत शुरू की थी। 2003 में बरेली बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, फिर 2004 और 2005 में वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए। 2006 में सचिव पद पर विजयी हुए और फिर 2012 तक लगातार सचिव रहे। 2014 के बाद वह फिर लगातार सचिव चुने जाते रहे। अमर भारती के पिता रवींद्र भारती भी अधिवक्ता हैं। उन्हीं के नाम पर बरेली बार में रवींद्र भारती बार भवन बनाया गया था।
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अमर भारती के निधन से बरेली बार को अपूर्णनीय क्षति हुई है। अधिवक्ताओं में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कभी चुनाव नहीं हारे। उनकी मौत के बाद सभी साथियों को अपने स्वास्थ्य का और अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है। -शिरीष मेहरोत्रा, सदस्य बार काउंसिल ऑफ यूपी
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अमर भारती के निधन से बरेली बार को अपार हानि हुई है और मेरा एक निकट सहयोगी भी चला गया जिसकी कमी पूरी नहीं हो पाएगी। वकीलों में वह बहुत लोकप्रिय थे। उनके परिवार को मेरी ओर से बहुत सांत्वना। - घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष बरेली बार एसोसिएशन