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सोलह श्रृंगार कर सुहागिनों ने किया अपने ‘चांद’ का दीदार
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बरेली। महिलाओं ने सोलह शृंगार करके पति की लंबी आयु की कामना के लिए 14 घंटे से अधिक का निर्जल व्रत रखा। शाम को पूजा के बाद चलनी में चांद देखकर और पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला। उधर, बांके बिहारी और हरि मंदिर में भी महिलाएं तैयार होकर पहुंचीं और पूजा के बाद सामूहिक व्रत खोला। पतियों ने भी गिफ्ट देकर ऐसे पलों को कैमरे में सहेजकर रखा। पूजा अर्चना के बाद विवाहिताएं अपने पतियों के साथ मंदिरों में दर्शनों के लिए भी पहुंचीं। इस दौरान कालीबाड़ी स्थित काली माता के मंदिर पर काफी भीड़ रही।
महिलाओं ने पूरे मनोयोग से 14 घंटे का निर्जल व्रत रखकर शाम को चंद्र दर्शन किए। महिलाएं चंद्रोदय के बाद से ही चंद्रमा के दर्शन के लिए उत्सुक रहीं। शाम को उन्होंने विधि विधान से शंकर, पार्वती और कार्तिकेय की पूजा अर्चना की। रात में करीब 8.39 बजे चंद्रमा निकलने पर उनके चेहर पर खुशी झलक उठी। इस दौरान पूजा अर्चना करने के लिए मंदिरों में घरों में सजधज कर तैयार महिलाएं दुल्हन की भांति लग रही थीं। सभी पति ऐसे पलों को मोबाइल में कैद करने के लिए बेसब्री से इंतजार करते दिखे। कुछ ने यह काम अपने बच्चों को सौंप रखा था तो कुछ खुद ही अपनी पत्नियों के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। चांद निकलते ही महिलाओं ने चलनी में पति को देखकर पूजा की और उनके हाथों पानी पीकर व्रत खोला।
मंदिरों में भी धूमधाम से मनाई गई करवाचौथ
शाम चार बजे के बाद महिलाएं सजधजकर मंदिर पहुंचने लगीं। हरि मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, रोहली टोला के नव दुर्गा मंदिर, टीबरी नाथ मंदिर, रामजानकी आदि मंदिरों में महिलाओं ने पूजा की। इस दौरान पुजारी ने सभी को करवाचौथ की कथा सुनाई। इसके बाद सभी महिलाएं अपने-अपने घरों में पहुंचीं और चंद्रमा निकलने का इंतजार करने लगीं।
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देखते ही बनता था सीनियर सिटीजन महिलाओं का उल्लास
सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में ग्रीन पार्क में महिलाओं ने रंग बिरंगे परिधानों में सजधजकर करवाचौथ का व्रत पूरा किया। इस दौरान गणेश वंदना के बाद कई प्रतियोगिताएं र्हुइं। सूरज गेम में निशी-पूठिया-प्रथम, मृदुला त्रिवेदी-द्वितीय, नीलम मेहरोत्रा-तृतीय, कॉइन गेम में प्रतिमा-प्रथम, रानी उपाध्याय-द्वितीय, मृदुला-तृतीय, लकी ड्रा में मंजू महेंद्र-प्रथम, प्रतिमा-द्वितीय और निशी पूठिया तीसरे स्थान पर रहीं। कार्यक्रम के बाद सभी महिलाओं को एक-एक पौधा भी दिया गया।
दिवंगत पत्नी के लिए रखा व्रत
वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण स्वरूप सक्सेना ने दिवंगत पत्नी की आत्मा की शांति के लिए करवाचौथ का व्रत रखा। उनकी पत्नी का स्वर्गवास दस मई 2009 को हुआ था। इसके बाद लगातार वह निर्जल व्रत रखकर विधि विधान से चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत से संतोष और आत्मबल मिलता है।
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महिलाओं ने पूरे मनोयोग से 14 घंटे का निर्जल व्रत रखकर शाम को चंद्र दर्शन किए। महिलाएं चंद्रोदय के बाद से ही चंद्रमा के दर्शन के लिए उत्सुक रहीं। शाम को उन्होंने विधि विधान से शंकर, पार्वती और कार्तिकेय की पूजा अर्चना की। रात में करीब 8.39 बजे चंद्रमा निकलने पर उनके चेहर पर खुशी झलक उठी। इस दौरान पूजा अर्चना करने के लिए मंदिरों में घरों में सजधज कर तैयार महिलाएं दुल्हन की भांति लग रही थीं। सभी पति ऐसे पलों को मोबाइल में कैद करने के लिए बेसब्री से इंतजार करते दिखे। कुछ ने यह काम अपने बच्चों को सौंप रखा था तो कुछ खुद ही अपनी पत्नियों के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। चांद निकलते ही महिलाओं ने चलनी में पति को देखकर पूजा की और उनके हाथों पानी पीकर व्रत खोला।
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मंदिरों में भी धूमधाम से मनाई गई करवाचौथ
शाम चार बजे के बाद महिलाएं सजधजकर मंदिर पहुंचने लगीं। हरि मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, रोहली टोला के नव दुर्गा मंदिर, टीबरी नाथ मंदिर, रामजानकी आदि मंदिरों में महिलाओं ने पूजा की। इस दौरान पुजारी ने सभी को करवाचौथ की कथा सुनाई। इसके बाद सभी महिलाएं अपने-अपने घरों में पहुंचीं और चंद्रमा निकलने का इंतजार करने लगीं।
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देखते ही बनता था सीनियर सिटीजन महिलाओं का उल्लास
सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में ग्रीन पार्क में महिलाओं ने रंग बिरंगे परिधानों में सजधजकर करवाचौथ का व्रत पूरा किया। इस दौरान गणेश वंदना के बाद कई प्रतियोगिताएं र्हुइं। सूरज गेम में निशी-पूठिया-प्रथम, मृदुला त्रिवेदी-द्वितीय, नीलम मेहरोत्रा-तृतीय, कॉइन गेम में प्रतिमा-प्रथम, रानी उपाध्याय-द्वितीय, मृदुला-तृतीय, लकी ड्रा में मंजू महेंद्र-प्रथम, प्रतिमा-द्वितीय और निशी पूठिया तीसरे स्थान पर रहीं। कार्यक्रम के बाद सभी महिलाओं को एक-एक पौधा भी दिया गया।
दिवंगत पत्नी के लिए रखा व्रत
वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण स्वरूप सक्सेना ने दिवंगत पत्नी की आत्मा की शांति के लिए करवाचौथ का व्रत रखा। उनकी पत्नी का स्वर्गवास दस मई 2009 को हुआ था। इसके बाद लगातार वह निर्जल व्रत रखकर विधि विधान से चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत से संतोष और आत्मबल मिलता है।