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तो बच्चा चोर गैंग से मिली हुई है जीआरपी
बरेली
Updated Tue, 23 Jun 2015 01:06 AM IST
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कहने में तो यह हैरत भरा है लेकिन हालात तो यही कह रहे हैं कि जीआरपी और आरपीएफ बच्चा चोर गिरोह से मिली हुई है। पांच घंटे तक जंक्शन पर बच्ची के चोरी के मामले में हंगामा होता रहा , लेकिन जीआरपी और आरपीएफ के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। यही नहीं बच्ची चुराने के आरोपी तांत्रिक को पकड़कर जीआरपी को दे भी दिया गया, फिर भी उससे न पूछताछ हुई और न ही कोई कार्रवाई। बच्चा चोरी के आरोप में पकड़े तांत्रिक को यूं ही छोड़ दिया गया।
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महिलाओं, बाल अपराध के प्रति सख्त कार्रवाई के सरकार कितने भी आदेश दे, पर बरेली आरपीएफ, जीआरपी पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। दूसरी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आपरेशन मुस्कान एक जुलाई से एक महीने के लिए चलना है। लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद यहां की पुलिस संवेदहीन बनी हुई है।
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पब्लिक के बच्चा चोर तांत्रिक के पकड़कर देने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और उसे ऐसे ही छोड़ दिया। ये देख लोग साफ कह रहे थे कि क्या पुलिस की बच्चा चोर गिरोह से साठ-गांठ है, जो बच्चा बरामद होने के बाद भी आरोपी को छोड़ दिया गया।
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फिर क्यों नहीं दी सिविल पुलिस को सूचना
अगर जीआरपी बच्चा चोरी का मामला सिविल पुलिस के क्षेत्र का बता रही है तो फिर बच्चा बरामद और आरोपी पकड़ जाने के बाद उसने सिविल पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। जीआरपी को चाहिेए था कि वह सिविल पुलिस को वायरलैस मीमों के माध्यम से तांत्रिक को गिरफ्तार करने की सूचना देती। लेकिन ऐसा नहीं किया। और अपने स्तर से ही मामले को दफन कर दिया। जीआरपी की इस तरह की चुप्पी से उसकी भूमिका पर सवाल उठा रहा है कि वह जरूर बच्चा चोर से मिली हुई है।
बच्ची चोरी होने के बाद थाने पहुंची बदहवास मां का हाल अनदेखा कर भले ही आरपीएफ, जीआरपी ने पसीजने की बजाए आंखें मूंद लीं, पर खानाबदोश की तरह जंक्शन पर जिंदगी काट रहे मूक वधिर ने तांत्रिक का इशारों में हुलिया बताकर बच्ची को बरामद करकर बदहवास हुई मां के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। बच्ची को पाकर महिला ने इस मूक वधिर का न सिर्फ शुक्रिया अदा किया, बल्कि उसे दुआएं भी दीं।
आंवला के बजरिया मोहल्ले के रिक्शा चालक जावेद की पत्नी सिम्मी एक साल की उमेरा के चोरी होने के बाद बदहवास हो गई थी। वह बच्ची बरामदगी की मांग को लेकर आरपीएफ, जीआरपी थाने पहुंची, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनीं। दोनों थानों की पुलिस आंखें मूंदकर बहरी बनी बैठी रही और बदहवास मां अपनी बच्ची को बरामद करने की मिन्नतें करती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। बेचैन मां जंक्शन पर कभी प्लेटफार्म नंबर एक पर आती तो कभी दो पर जाती। पास आने वाले लोगों से भी वह मदद की आस लगाती। इसी दौरान जंक्शन पर ही खानाबदोश की तरह घूमने वाला मूकवधिर भी यहां पहुंच गया, जो बोल नहीं सकता था, लेकिन उसने एक मां की बेचैनी को भांप लिया और बच्ची चुराकर ले जाने वाले तांत्रिक का हुलिया इशारों में बयां कर दिया। यही नहीं मूक वधिर ने एक कागज पर लिखकर भी बताया कि जिस बाबा ने बच्चे को चुराया है, उसकी एक आंख भी नहीं है। इसी आधार पर बाद में आरोपी पकड़ा गया।