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Karnal News: 30 को टाइप किया नोट, 31 को पत्नी के नाम हाथ से संदेश लिख दोबारा किए हस्ताक्षर
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गीतू. राम फाइल फोटो
करनाल। बिजली निगम के निलंबित एसई गीतू राम तंवर ने 30 अगस्त को ही सुसाइड नोट टाइप करके हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके बाद 31 अगस्त को उन्होंने हाथ से पत्नी के नाम संदेश लिखा और दोबारा नई तारीख डालकर हस्ताक्षर किए। सुसाइड नोट में सोनीपत सर्कल के कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तीन पेज के नोट में उन्होंने खुद के खिलाफ कार्रवाई, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो, विभागीय जांच में देरी और अधिकारियों के कथित पक्षपात को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की मांग की है।
तंवर ने नोट में लिखा है कि सोनीपत सर्कल के अधिकारियों ने करीब चार महीने बाद उनके खिलाफ कुछ वीडियो प्रसारित किए। उनका आरोप है कि ये वीडियो फर्जी थे और उनके माध्यम से एक विशेष समुदाय को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि किसी तरह की हिंसा या विवाद की स्थिति पैदा न हो, इसलिए उन्होंने 2 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी थी।
बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
नोट के अनुसार तंवर ने 19 फरवरी से लेकर अगस्त 2026 तक कई तारीखों में प्रबंध निदेशक कार्यालय में अपनी शिकायतें और प्रतिवेदन दिए। उनका आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद वास्तविक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी लिखा कि वायरल वीडियो के मामले में जांच अधिकारी द्वारा उनकी ओर से दिया गया बयान तक दर्ज नहीं किया गया। तंवर ने दावा किया कि उन्हें 2 फरवरी 2026 को निलंबित किया गया और तीन महीने से अधिक समय बाद 2 जुलाई को चार्जशीट दी गई। इसके बाद उन्होंने चार्जशीट तैयार करने के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाने की मांग की लेकिन उनके अनुसार दस्तावेज नहीं दिए गए।
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आरटीआई में नहीं मिली जांच रिपोर्ट
सुसाइड नोट में तंवर ने आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि आरटीआई के जवाब में उन्हें बताया गया कि 2 जुलाई को जारी चार्जशीट के आधार में कोई जांच रिपोर्ट नहीं है। इसे उन्होंने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच पहले ही हो चुकी थी और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी थी लेकिन उनके मामले में कार्रवाई लंबित रखी गई।
दूसरे अधिकारियों के वीडियो पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप :
नोट में तंवर ने कुछ अन्य अधिकारियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके मामले में भी विभाग ने कार्रवाई नहीं की। उनका दावा है कि संबंधित वीडियो उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने में विभागीय अधिकारियों ने तेजी दिखाई, जबकि दूसरे मामलों में अलग रवैया अपनाया गया।
जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
तंवर ने पूरे घटनाक्रम को जातिगत भेदभाव से भी जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई और शिकायतों पर विभाग के रवैये से उन्हें लगा कि उन्हें अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण समान संरक्षण और अवसर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपने प्रभाव और ऊंचे पदों के कारण कार्रवाई से बच रहे हैं। नोट में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के नाम भी लिखे हैं और आरोप लगाया है कि ये अधिकारी उन्हें विभागीय कार्रवाई से बचाने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करवाने में सक्रिय रहे।
मुख्यमंत्री से एसआईटी जांच की मांग :
नोट के अंतिम हिस्से में तंवर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के समक्ष पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी में ऐसे वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी शामिल किए जाएं, जिनका इस प्रकरण से कोई संबंध न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ, उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच तथा मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
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तंवर ने नोट में लिखा है कि सोनीपत सर्कल के अधिकारियों ने करीब चार महीने बाद उनके खिलाफ कुछ वीडियो प्रसारित किए। उनका आरोप है कि ये वीडियो फर्जी थे और उनके माध्यम से एक विशेष समुदाय को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि किसी तरह की हिंसा या विवाद की स्थिति पैदा न हो, इसलिए उन्होंने 2 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी थी।
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बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
नोट के अनुसार तंवर ने 19 फरवरी से लेकर अगस्त 2026 तक कई तारीखों में प्रबंध निदेशक कार्यालय में अपनी शिकायतें और प्रतिवेदन दिए। उनका आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद वास्तविक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी लिखा कि वायरल वीडियो के मामले में जांच अधिकारी द्वारा उनकी ओर से दिया गया बयान तक दर्ज नहीं किया गया। तंवर ने दावा किया कि उन्हें 2 फरवरी 2026 को निलंबित किया गया और तीन महीने से अधिक समय बाद 2 जुलाई को चार्जशीट दी गई। इसके बाद उन्होंने चार्जशीट तैयार करने के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाने की मांग की लेकिन उनके अनुसार दस्तावेज नहीं दिए गए।
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आरटीआई में नहीं मिली जांच रिपोर्ट
सुसाइड नोट में तंवर ने आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि आरटीआई के जवाब में उन्हें बताया गया कि 2 जुलाई को जारी चार्जशीट के आधार में कोई जांच रिपोर्ट नहीं है। इसे उन्होंने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच पहले ही हो चुकी थी और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी थी लेकिन उनके मामले में कार्रवाई लंबित रखी गई।
दूसरे अधिकारियों के वीडियो पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप :
नोट में तंवर ने कुछ अन्य अधिकारियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके मामले में भी विभाग ने कार्रवाई नहीं की। उनका दावा है कि संबंधित वीडियो उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने में विभागीय अधिकारियों ने तेजी दिखाई, जबकि दूसरे मामलों में अलग रवैया अपनाया गया।
जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
तंवर ने पूरे घटनाक्रम को जातिगत भेदभाव से भी जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई और शिकायतों पर विभाग के रवैये से उन्हें लगा कि उन्हें अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण समान संरक्षण और अवसर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपने प्रभाव और ऊंचे पदों के कारण कार्रवाई से बच रहे हैं। नोट में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के नाम भी लिखे हैं और आरोप लगाया है कि ये अधिकारी उन्हें विभागीय कार्रवाई से बचाने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करवाने में सक्रिय रहे।
मुख्यमंत्री से एसआईटी जांच की मांग :
नोट के अंतिम हिस्से में तंवर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के समक्ष पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी में ऐसे वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी शामिल किए जाएं, जिनका इस प्रकरण से कोई संबंध न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ, उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच तथा मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।

गीतू. राम फाइल फोटो