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ट्रेनिंग के लिए आए, पहुंच गए जेल में

बरेली Updated Wed, 31 Dec 2014 02:03 AM IST
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जिन 12 युवकों पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र और शैक्षिक प्रमाण पत्रों के जरिये से सेना में नौकरी हासिल करने का आरोप है, उनका ट्रेनिंग का सेंटर भी तय हो गया था। कॉल लेटर मिलने के बाद ये सभी ट्रेनिंग पर ही जाने के लिए यहां पहुंचे थे लेकिन उन्हें ट्रेनिंग के बजाय जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
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कैंट थाने की हवालात में बंद राघवेंद्र ने बताया कि 24 अगस्त को वह दौड़ में पास हुआ था और 25 अगस्त को उसका मेडिकल हुआ। इसके बाद उसका सेना के अस्पताल में 17 सितंबर को री मेडिकल हुआ। भर्ती प्रक्रिया के तहत 26 अक्तूबर को आर्मी स्कूल में लिखित परीक्षा हुई और 14 नवंबर को रिजल्ट आया तो वह पास हो गया। 17 नवंबर को ज्वाइनिंग लेटर मिला। 23 दिसंबर को उसे फतेहगढ़ राजपूत रेजीमेंट में ट्रेनिंग के लिए जाना था। लेकिन कागजात के सत्यापन के लिए उसे पहले 27 फिर 29 दिसंबर को सेना भर्ती दफ्तर बुलाया गया और यहां उसकी अंक तालिका फर्जी बता दी गई। उसने दावा किया कि उसकी अंक तालिका बिल्कुल सही है लेकिन इंटरनेट पर शो नहीं हो रही। इसके अलावा मोहित को उड़ीसा, अरुन कुमार को नासिक, सनी देओल को सागर (मध्यप्रदेश), अमर यादव को हैदराबाद, सुमित को पूना, राहुल को फतेहगढ़, सचिन को नासिक, श्याम सिंह को कुमाऊं रेजीमेंट में 23 दिसंबर को ट्रेनिंग पर जाना था, लेकिन उन्हें भी कागजात सत्यापन के नाम पर पहले 27 फिर 29 दिसंबर को बरेली सेना भर्ती आफिस बुलाया गया और इनके निवास प्रमाण पत्र फर्जी बताते हुए सोमवार रात कैंट पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूरी रात हवालात में कटी और मंगलवार को जेल जाना पड़ा। युवकों ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप को गलत बताया है।

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पुलिस ने कराई रजाई की व्यवस्था
सेना पुलिस 11 आरोपियों को पकड़कर सोमवार रात कैंट थाने में लाई। यहां सभी को हवालात में डाल दिया गया। पुलिस ने इन्हें सरकारी कंबल देने की बजाए किराए पर रजाई मंगवाकर दीं।
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एफआईआर दर्ज करने में चूक
आरोपियों और उनके पिता का नाम तो कैंट थाने में दर्ज हुई कंप्यूटराइज्ड एफआईआर में ठीक लिखा है लेकिन उनका पता आधा-अधूरा ही फीड किया गया है।

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