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बूढ़े होने पर 2009 में बंद हो गई थी हिस्ट्रीशीट

Sun, 07 Jun 2015 01:11 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 07 Jun 2015 01:11 AM IST
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 तय्यतपुर गांव के शेर सिंह की हत्या से लोग सन्न रह गए। शेर सिंह का भी गांव में अपना रुतबा था। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि कालीचरन और उसके साथी शेर सिंह की हत्या कर देंगे। घटना से गांव में सन्नाटा छाया हुआ है।
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शेर सिंह की पत्नी प्रेमवती का कहना था कि मुनेंद्र और उसके घरवालों ने संतोष की हत्या के मामले में समझौता करने के लिए रुपयों का ऑफर किया था। लेकिन उनके पति ने साफ मना कर दिया था। कालीचरन हर हाल में अपने बेटे को जेल से बाहर लाना चाहता था। लेकिन उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। उसके पूरे परिवार की जिंदगी जेल में ही कटेगी। उधर हत्या के बाद से कालीचरन के परिवार वाले घर में ताला लगाकर फरार हो गए हैं।

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-कोतवाली, बारादरी और बिथरी चैनपुर थानों में शेर सिंह में आधा दर्जन से ज्यादा मारपीट और बलवे की धाराओं में मुकदमे लिखे गए थे। पुलिस ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। लेकिन पुलिस ने अच्छा चाल-चलन और बूढ़े होने पर शेर सिंह की हिस्ट्रीशीट बंद कर दी थी।
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बंटू की हत्या की गुत्थी ही नहीं सुलझ पाई
23 मई 2009 को बंटू की कमुआ मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में राकेश पटेल को नामजद कर दिया था। लेकिन पुलिस ने बाद में इस मामले में राकेश के नाम को निकालकर परगवां के प्रधान मोहर सिंह और मेंहदी हसन आदि को मुल्जिम बनाया गया था। इस हत्या को जुए को लेकर हुए विवाद को भी जोड़ा गया था। लेकिन बात साफ नहीं हो पाई है। परिवार वाले पुलिस की विवेचना से संतुष्ट नहीं था।

बेखुदी में मारे गए बाप-बेटा
मुनेंद्र से विवाद होने के बाद संतोष ने भी कही खुद की जान को खतरा नहीं समझा। यही वजह रही कि उसे खेत से लौटते हुए नशे में धुत मुनेंद्र ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। पिता शेर सिंह का भी यही हाल था। संतोष की हत्या के मुकदमे में गवाही न देने के  लिए कई बार मुनेंद्र के परिवार वालों ने उन्हें घेर लिया था। लेकिन इसके बाद भी वह खुले मैदान में सोते थे। इसी बेखुदी में शेर सिंह की हत्या कर दी गई।

अब बाकी गवाहों की जान को खतरा
-संतोष की हत्या में उनकी पत्नी सोमवती के अलावा उनकी ग्यारह साल की बेटी मोनी और ससुर मिश्रीलाल गवाह हैं। इन तीनों गवाहों की जान को भी खतरा बना हुआ है। परिवार वालों ने गवाहों की सुरक्षा की मांग की है।


पुलिस टीम से भिड़ गए थे परिवार वाले
-संतोष कुमार की हत्या के दिन परिवार वाले पुलिस टीम से भिड़ गए थे। इस दौरान तत्कालीन एसओ घनश्याम तिवारी को भी इस दौरान काफी चोटें आई थीं। मामले में उन्होंने संतोष के परिवार वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। शेर सिंह को उस मामले में जमानत करानी पड़ी थी।
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