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नशे के सौदागरों की पालतू बन गई बरेली पुलिस

Sun, 07 Feb 2016 02:07 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 07 Feb 2016 02:07 AM IST
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Bareilly became the pet of a drug smuggler police
केस-वन
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फरीदपुर के पड़ेरा और बेरा गांव में  दिल्ली की क्राइम ब्रांच छापामारी करके नशे के सौदागरों को उठा ले जाती है। वहां के सुभाष जायसवाल और रामू जायसवाल को दिल्ली पुलिस ने पकड़कर जेल भेजा था। स्थानीय पुलिस ने उन पर इसलिए हाथ नहीं डाला कि क्योंकि वे सबको मैनेज करके ही काम करते थे।

केस-दो
बहेड़ी के शराफत को  एसटीएफ ने सात किलो अफीम के साथ फतेहगंज पश्चिमी से पकड़कर ले गई थी। इसके बाद भी वह कई बार पकड़ा गया। हर बार उसे बाहर की पुलिस ने पकड़ा। लोकल पुलिस से उसने भी नशे का कारोबार करने के लिए मौखिक सहमति ले रखी थी। इसके बदले शराफत पुलिस को मोटी रकम देता था।
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केस-तीन
फरीदपुर के सपा नेता अजीज मुल्ला से भी पुलिस मिली हुई थी। सत्ता की आड़ में झारखंड से अफीम की खेप लाकर अजीज फरीदपुर में ढाबों के जरिए पंजाब और दिल्ली भिजवा रहा था। एसटीएफ ने उसे पकड़ा तो पुलिस उसकी मेहमान की तरह खातिर करने लगी। मामला आला अफसरों तक पहुंचा तो उसे हवालात में डाला गया।
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बरेली। चंद नेताओं और पुलिस की मेहरबानी से बरेली शहर नशे की मंडी बनता जा रहा है। यहां गली-मोहल्लों में आसानी से नशे की पुड़िया मिल जाती हैं। स्मैक की यह पुड़िया युवाओं के खून में जहर घोल रही है। नशे के सौदागरों की शिकायतें भी होती हैं, लेकिन पुलिस उनके हाथों इस तरह से बिकी हुई हैं उन्हें कोई पकड़ता ही नहीं। नशे के कारोबार से पुलिस हर महीने मोटी रकम वसूलती है। यही वजह है कि दिल्ली और दूसरे प्रांतों की पुलिस नशे के कारोबारियों को पकड़ती है जबकि बरेली की पुलिस उन्हें पाल रही है।
बारादरी इलाके का गंगापुर, सूफीटोला और जोगीनवादा इलाके में तो सड़कों पर सरेराह नशा करने वाले नजर आ जाते हैं। शाहजहांपुर रोड पर सेमलखेड़ा इलाके में खाली पड़े प्लाट में तो दिन भर नशेड़ियों का हुजूम लगा रहता है। थाना बारादरी के सामने रेलवे के पुराने माल गोदाम को तो नशा करने वालों की अड्डा बन गया है, लेकिन यहां की पुलिस को कोई नशेड़ी नजर नहीं आता है। नशे का सामान बेचने वालों ने नाम भी पुलिस की अंगुलियों पर हैं, लेकिन किसी को पकड़ा इसलिए नहीं जाता है कि उनसे हर महीने मोटी रकम ली जाती है।
 दो दिन पहले मोहल्ला जोगीनवादा के शाकिर हुसैन और बिशारतगंज के नसीम अहमद को दिल्ली क्राइम ब्रांच उठाकर ले गई है। दोनों के पास के स्मैक की बरामदगी होने के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि शाकिरतीन बार पहले भी वह स्मैक की तस्करी के आरोप में दिल्ली में पकड़ा जा चुका है। बिशारतगंज का नसीम भी उसी का साथी है। ये दोनों झारखंड और मध्यप्रदेश से स्मैक की खेप लाकर पंजाब और दिल्ली में सप्लाई करते हैं। शाकिर हुसैन के नेटवर्क में कई महिलाएं भी शामिल हैं। दोनों महिलाओं का इस्तेमाल कैरियर के तौर पर करते हैं। दिल्ली पुलिस के छापे के बाद शाकिर की पत्नी और परिवार वाले घर छोड़कर फरार हो गई है। उसके घर में किराएदार रह रहे हैं। पत्नी के बारे में उन्हें भी जानकारी नहीं है। शाकिर और नसीम के नेटवर्क में शामिल लोगों की दिल्ली पुलिस ने सूची बना रखी है। जल्द ही कई और भी लोगों के पकड़े जाने की संभावना है।


-नशे का कारोबार करने वाले इलाकों के अलावा यह काम करने वालों को चिहिन्त करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें पुलिस की भूमिका भी जांच कराकर कार्रवाई कराएंगे
-आरके भारद्वाज, एसएसपी
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