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सर्दियों में सिकुड़ती पटरियों में 54 जगह आए गैप
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बरेली। मुरादाबाद से लखनऊ के बीच रेलखंड पर पटरियां सिकुड़ने से 54 जगह गैप मिलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू करा दिए गए हैं। कोहरा गहराने के बाद पटरियों के चटखने की आशंका को देखते हुए ट्रैक पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।
सर्दियों में पटरियों के चटखने के साथ ही सिकुड़ने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ट्रैक पेट्रोलिंग वाली टीमों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि मुरादाबाद मंडल के ऑपरेटिंग डिपार्टमेंट में मुरादाबाद से वाया बरेली लखनऊ रेलखंड तक कई जगह पटरी में गैप आने की अलग-अलग रिपोर्ट भेजी गईं हैं। अधिकारी सीधे तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक करीब 54 जगह पर पटरियों में गैप मिला है। कर्मचारियों की माने तो सर्दियां आने पर यह रूटीन वर्क है। विभिन्न जगह सामने आए गैप में पटरी के टुकड़े फिट किए जा रहे हैं, ताकि हादसे की आशंका टाली जा सके।
छह इंच से अधिक पर होता है खतरा
इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पटरी में चार से पांच इंच तक आने वाले गैप से गुजरने वाली ट्रेन को खतरा नहीं होता है, लेकिन छह इंच या उससे ज्यादा का गैप मिलने पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि गैप का पता चलने के बाद तत्काल मरम्मत कराई जाती है।
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सर्दियों में पटरियों के चटखने के साथ ही सिकुड़ने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ट्रैक पेट्रोलिंग वाली टीमों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि मुरादाबाद मंडल के ऑपरेटिंग डिपार्टमेंट में मुरादाबाद से वाया बरेली लखनऊ रेलखंड तक कई जगह पटरी में गैप आने की अलग-अलग रिपोर्ट भेजी गईं हैं। अधिकारी सीधे तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक करीब 54 जगह पर पटरियों में गैप मिला है। कर्मचारियों की माने तो सर्दियां आने पर यह रूटीन वर्क है। विभिन्न जगह सामने आए गैप में पटरी के टुकड़े फिट किए जा रहे हैं, ताकि हादसे की आशंका टाली जा सके।
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छह इंच से अधिक पर होता है खतरा
इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पटरी में चार से पांच इंच तक आने वाले गैप से गुजरने वाली ट्रेन को खतरा नहीं होता है, लेकिन छह इंच या उससे ज्यादा का गैप मिलने पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि गैप का पता चलने के बाद तत्काल मरम्मत कराई जाती है।
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