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Saharanpur News: कई महीनों से चल रहा था जाली नोटों का खेल, आरोपियों ने छापे 3.40 लाख नोट
Thu, 03 Sep 2026 01:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:06 AM IST
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सहारनपुर। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जाली नोट रखे जाने का खेल कई माह से चल रहा था। प्राथमिक जांच में आया कि एक-दूसरे के साथ मिलीभगत कर आरोपी पिछले कई माह से जाली नोटों की अदला-बदली में लगे हुए थे। अभी तक 17 करोड़ के जाली नोट मिले हैं, जो 500-500 के नोट हैं। यानी कि आरोपियों ने 3.40 लाख जाली नोट तैयार किए।
करेंसी चेस्ट में जाली नोट के मिलने का मामला सामने आने पर हर कोई हैरान है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी पर भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। जांच में अभी तक 17 करोड़ रुपये के जाली नोट पकड़े गए हैं। खास बात है कि पकड़े गए सभी नोट 500 रुपये मूल्य के हैं। 17 करोड़ रुपये के नोट छापने के लिए कुल 3,40,000 नोट छापे गए।
इतनी बड़ी संख्या में नोट छापना और उन्हें असली नोट के बदले करेंसी चेस्ट में रखना सप्ताह या दस दिनों की बात नहीं है। माना जा रहा है कि यह खेल कई महीनों से चल रहा था, जिसकी भनक तक भी किसी अधिकारी को नहीं लग सकी। बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में जमा नोट सर्कुलेशन में नहीं आए थे। यदि नोट सर्कुलेशन में आते तो इसकी जानकारी पहले ही लग जाती। आरोपियों ने बड़ी सफाई से इस पूरे खेल को अंजाम दिया। करेंसी चेस्ट में जो भी बंडल आए, उन्हें बड़ी सफाई से चेस्ट में व्यवस्थित किया गया।
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आरोपियों ने इस बात का भी ध्यान रखा कि यदि चेस्ट से बंडलों को बैंक, एटीएम में जमा कराने के लिए भेजना भी पड़े तो एकदम से ही फर्जी नोटों वाले बंडल न चले जाएं। अभी तक की जांच में यह सामने भी आ चुका है कि स्ट्रांग रूम में रखी शुरुआती रैक में कोई भी जाली नोट नहीं मिला था। बाद वाली रैक में ही जाली नोटों की गड्डियां रखी गई थीं। आरोपियों के इतने शातिराना अंदाज से माना जा रहा है कि इस खेल की फूल प्रूफ प्लानिंग की गई थी।
प्रयोगशाला भी भेजे जा सकते हैं कुछ नोट
फर्जी पाए गए नोटों के आगे की जांच के लिए उन्हें विधि प्रयोगशाला भी जा सकता है। प्रयोगशाला में विशेषज्ञों द्वारा नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही, वॉटरमार्क और सुरक्षा धागे आदि की बारीकी से जांच की जाती है। माना जा रहा है कि मिले जाली नोट में से कुछ को प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। इससे स्थिति और भी स्पष्ट हो सकेगी।
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करेंसी चेस्ट में जाली नोट के मिलने का मामला सामने आने पर हर कोई हैरान है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी पर भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। जांच में अभी तक 17 करोड़ रुपये के जाली नोट पकड़े गए हैं। खास बात है कि पकड़े गए सभी नोट 500 रुपये मूल्य के हैं। 17 करोड़ रुपये के नोट छापने के लिए कुल 3,40,000 नोट छापे गए।
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इतनी बड़ी संख्या में नोट छापना और उन्हें असली नोट के बदले करेंसी चेस्ट में रखना सप्ताह या दस दिनों की बात नहीं है। माना जा रहा है कि यह खेल कई महीनों से चल रहा था, जिसकी भनक तक भी किसी अधिकारी को नहीं लग सकी। बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में जमा नोट सर्कुलेशन में नहीं आए थे। यदि नोट सर्कुलेशन में आते तो इसकी जानकारी पहले ही लग जाती। आरोपियों ने बड़ी सफाई से इस पूरे खेल को अंजाम दिया। करेंसी चेस्ट में जो भी बंडल आए, उन्हें बड़ी सफाई से चेस्ट में व्यवस्थित किया गया।
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आरोपियों ने इस बात का भी ध्यान रखा कि यदि चेस्ट से बंडलों को बैंक, एटीएम में जमा कराने के लिए भेजना भी पड़े तो एकदम से ही फर्जी नोटों वाले बंडल न चले जाएं। अभी तक की जांच में यह सामने भी आ चुका है कि स्ट्रांग रूम में रखी शुरुआती रैक में कोई भी जाली नोट नहीं मिला था। बाद वाली रैक में ही जाली नोटों की गड्डियां रखी गई थीं। आरोपियों के इतने शातिराना अंदाज से माना जा रहा है कि इस खेल की फूल प्रूफ प्लानिंग की गई थी।
प्रयोगशाला भी भेजे जा सकते हैं कुछ नोट
फर्जी पाए गए नोटों के आगे की जांच के लिए उन्हें विधि प्रयोगशाला भी जा सकता है। प्रयोगशाला में विशेषज्ञों द्वारा नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही, वॉटरमार्क और सुरक्षा धागे आदि की बारीकी से जांच की जाती है। माना जा रहा है कि मिले जाली नोट में से कुछ को प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। इससे स्थिति और भी स्पष्ट हो सकेगी।