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दुधवा ग्रीन से पहले इंफोकेयर नाम से बैंक चलाते थे ठग
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लखीमपुर खीरी। कोलकाता की एस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड दुधवा ग्रीन का प्रोजेक्ट चलाने से पहले बैंक चला रही थी, जिसमें भी हजारों लोगों से करीब 35 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। बाद में बैंक बंद कर दी और ग्राहक आज तक अपनी रकम लेने को भटक रहे हैं। इसकी रिपोर्ट करीब एक साल पहले पलिया थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन केस की जांच लंबित है। इसके बाद कंपनी के लोगों ने दुधवा ग्रीन के नाम से कॉलोनी विकसित करने की योजना बनाई। दुधवा टाइगर रिजर्व रोड पर बोर्ड लगाए, शहर से सटे खीरी रोड पर राजापुर में भूखंड पर मंदिर बनवाया और ग्राहकों को विला बनाकर देने की बात समझाई, किश्तें भी लेनी शुरू कर दीं। कंपनी से जुड़कर काम करने वाले एजेंटों की मानें तो करीब 10 करोड़ रुपये लेकर कंपनी मालिक फरार हो गए हैं।
पलिया में मालगोदाम रोड पर पुलिस चौकी के निकट इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड नाम की कंपनी ने बैंक (चिट फंड) चलाई थी, जिसमें आरडी, एफडी के नाम पर लोगों से पैसे जमा कराए गए थे। 10 मार्च 2018 से कंपनी का आफिस बंद हो गया, जिसके बाद मोहल्ला किसान निवासी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कौशिक पात्रा, डायरेक्टर सुरेश रेड्डी, अभिजीत चक्रवर्ती, आलोक सिंह, मनीष सिंह देवल, रवि देवल, मुकेश सिंह, विश्वनाथ प्रसाद निषाद, योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ पलिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नौ आरोपियों में से चार आरोपी कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के निवासी हैं। बैंक के ग्राहकों के करीब 35 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं। इसके बाद लखीमपुर में खीरी रोड पर दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट में ठगी का खुलासा हुआ है। भूमि मालिक मोहन तोलानी ने कहा है कि आरोपी कंपनी के साथ सौदे की बात चल रही थी, लेकिन जमीन की बिक्री नहीं की थी। इसी बीच कंपनी के कोलकाता निवासी मालिकों ने धोखाधड़ी करते हुए प्लाटिंग शुरू कर दी, जिसकी जानकारी मिलते ही मोहन तोलानी ने कंपनी मालिकों के खिलाफ कोर्ट केस कर दिया। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
नाम बदलकर करते हैं धोखाधड़ी
इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड कंपनी ने कई और नामों से फर्जी कंपनियां बना रखी हैं। उसी कड़ी में एस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई। कंपनी के मालिक सुरेश रेड्डी, कौशिक पात्रा आदि ने प्रापर्टी डीलिंग के दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट बनाया और लखीमपुर निवासी तोलानी बंधुओं को प्लाट बेचकर बड़े मुनाफे का गणित समझाया था।
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मंदिर का निर्माण कराकर जमाया विश्वास
खीरी रोड पर धर्मकांटे के सामने तोलानी बंधुओं की जमीन के पास ही कंपनी मालिकों ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया, जिससे लोगों का विश्वास मजबूत होता गया। इसके बाद कंपनी ने तेजी से फर्जी रसीद बुक के सहारे प्लाट बेचने शुरू कर दिए। तो प्लाट खरीदने वालों ने भी जमीन के कागज देखने की जरूरत नहीं समझी। इसकी भनक जब तोलानी बंधुओं को हुई, तो उन्होंने एस्टल इंफ्रास्टक्चर प्राइवेट कंपनी के मालिक सुरेश रेड्डी, अभिजीत चक्रवर्ती के खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया, जहां मामला विचाराधीन है।
तोलानी बंधुओं को टोकनमनी के मिले थे 1.16 करोड़
लखीमपुर खीरी। एस्टल इंफ्रास्टक्चार प्राइवेट लिमिटेड ने दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले तोलानी बंधुओं से एग्रीमेंट किया था, जिसके लिए कंपनी मालिकों ने 1.16 करोड़ रुपये टोकन मनी दी थी। इसके बाद कंपनी ने जमीन पर प्लाटिंग शुरू कर दी और एडवांस बुकिंग के नाम पर लोगों से 25-25 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद कंपनी मालिकों और तोलानी बंधुओं के बीच विवाद बढ़ता चला गया और मामला कोर्ट में पहुंच गया।
कंपनी मालिक अभिजीत चक्रवर्ती, कौशिक पात्रा और सुरेश रेड्डी ने लखीमपुर निवासी झम्मन दास तोलानी, सीताराम तोलानी, योगेंद्र पाल तोलानी और मोहन तोलानी से मिलकर उनकी खीरी रोड स्थित राजापुर धर्मकांटा के सामने 16 एकड़ जमीन पर दुधवा ग्रीन के नाम से प्रोजेक्ट बनाकर प्लाटिंग शुरू की थी। करीब एक साल से कंपनी के मालिक फरार हैं और ग्राहक जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। तोलानी बंधुओं ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए कंपनी से पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन संलिप्तता उजागर हुई है। मौजूदा समय में इस जमीन पर प्लाटिंग का जिम्मा दूसरे प्रापर्टी डीलर को दिया गया है। मोहन तोलानी बताते हैं कि कंपनी मालिकों के साथ एग्रीमेंट हुआ था, जिसके एवज में 1.16 करोड़ की टोकन मनी मिली थी। कंपनी ने एग्रीमेंट के अनुबंधों का उल्लघंन किया, तो उन्होंने कोर्ट में कंपनी मालिकों को चुनौती दी है।
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पलिया में मालगोदाम रोड पर पुलिस चौकी के निकट इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड नाम की कंपनी ने बैंक (चिट फंड) चलाई थी, जिसमें आरडी, एफडी के नाम पर लोगों से पैसे जमा कराए गए थे। 10 मार्च 2018 से कंपनी का आफिस बंद हो गया, जिसके बाद मोहल्ला किसान निवासी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कौशिक पात्रा, डायरेक्टर सुरेश रेड्डी, अभिजीत चक्रवर्ती, आलोक सिंह, मनीष सिंह देवल, रवि देवल, मुकेश सिंह, विश्वनाथ प्रसाद निषाद, योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ पलिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नौ आरोपियों में से चार आरोपी कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के निवासी हैं। बैंक के ग्राहकों के करीब 35 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं। इसके बाद लखीमपुर में खीरी रोड पर दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट में ठगी का खुलासा हुआ है। भूमि मालिक मोहन तोलानी ने कहा है कि आरोपी कंपनी के साथ सौदे की बात चल रही थी, लेकिन जमीन की बिक्री नहीं की थी। इसी बीच कंपनी के कोलकाता निवासी मालिकों ने धोखाधड़ी करते हुए प्लाटिंग शुरू कर दी, जिसकी जानकारी मिलते ही मोहन तोलानी ने कंपनी मालिकों के खिलाफ कोर्ट केस कर दिया। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
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नाम बदलकर करते हैं धोखाधड़ी
इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड कंपनी ने कई और नामों से फर्जी कंपनियां बना रखी हैं। उसी कड़ी में एस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई। कंपनी के मालिक सुरेश रेड्डी, कौशिक पात्रा आदि ने प्रापर्टी डीलिंग के दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट बनाया और लखीमपुर निवासी तोलानी बंधुओं को प्लाट बेचकर बड़े मुनाफे का गणित समझाया था।
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मंदिर का निर्माण कराकर जमाया विश्वास
खीरी रोड पर धर्मकांटे के सामने तोलानी बंधुओं की जमीन के पास ही कंपनी मालिकों ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया, जिससे लोगों का विश्वास मजबूत होता गया। इसके बाद कंपनी ने तेजी से फर्जी रसीद बुक के सहारे प्लाट बेचने शुरू कर दिए। तो प्लाट खरीदने वालों ने भी जमीन के कागज देखने की जरूरत नहीं समझी। इसकी भनक जब तोलानी बंधुओं को हुई, तो उन्होंने एस्टल इंफ्रास्टक्चर प्राइवेट कंपनी के मालिक सुरेश रेड्डी, अभिजीत चक्रवर्ती के खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया, जहां मामला विचाराधीन है।
तोलानी बंधुओं को टोकनमनी के मिले थे 1.16 करोड़
लखीमपुर खीरी। एस्टल इंफ्रास्टक्चार प्राइवेट लिमिटेड ने दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले तोलानी बंधुओं से एग्रीमेंट किया था, जिसके लिए कंपनी मालिकों ने 1.16 करोड़ रुपये टोकन मनी दी थी। इसके बाद कंपनी ने जमीन पर प्लाटिंग शुरू कर दी और एडवांस बुकिंग के नाम पर लोगों से 25-25 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद कंपनी मालिकों और तोलानी बंधुओं के बीच विवाद बढ़ता चला गया और मामला कोर्ट में पहुंच गया।
कंपनी मालिक अभिजीत चक्रवर्ती, कौशिक पात्रा और सुरेश रेड्डी ने लखीमपुर निवासी झम्मन दास तोलानी, सीताराम तोलानी, योगेंद्र पाल तोलानी और मोहन तोलानी से मिलकर उनकी खीरी रोड स्थित राजापुर धर्मकांटा के सामने 16 एकड़ जमीन पर दुधवा ग्रीन के नाम से प्रोजेक्ट बनाकर प्लाटिंग शुरू की थी। करीब एक साल से कंपनी के मालिक फरार हैं और ग्राहक जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। तोलानी बंधुओं ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए कंपनी से पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन संलिप्तता उजागर हुई है। मौजूदा समय में इस जमीन पर प्लाटिंग का जिम्मा दूसरे प्रापर्टी डीलर को दिया गया है। मोहन तोलानी बताते हैं कि कंपनी मालिकों के साथ एग्रीमेंट हुआ था, जिसके एवज में 1.16 करोड़ की टोकन मनी मिली थी। कंपनी ने एग्रीमेंट के अनुबंधों का उल्लघंन किया, तो उन्होंने कोर्ट में कंपनी मालिकों को चुनौती दी है।