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50 लाख की स्टांप चोरी में फंसे शराब कारोबारी सतीश जायसवाल
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पीलीभीत। शराब कारोबारी व डेवलपर्स सतीश कुमार जायसवाल, उनके बेटे और बहू को जिलाधिकारी न्यायालय ने 50 लाख से ज्यादा की स्टांप चोरी के मामले में दोषी पाया है। शराब कारोबारी ने इनकम टैक्स बचाने के लिए मान्या डेवलपर्स के नाम से एक फर्म बनाकर करीब 50 लाख से ज्यादा की स्टांप चोरी की। डीएम ने अब फर्म से ब्याज समेत वसूली के आदेश दिए हैं।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने तीन सितंबर 2019 को डीएम के यहां शिकायत की थी कि राजाबाग कालोनी निवासी सतीश जायसवाल ने ग्राम बिलगवां में 2.37 हेक्टेयर भूमि को वर्ष 2012 में अकृषिक घोषित कराकर ‘राम विहार‘ नाम से एक कालोनी बना ली। इसका विधिवत मानचित्र स्वीकृत कराया गया। प्लॉटों की बिक्री से होने वाली आय में इनकम टैक्स न देना पड़े इसलिए कागजों में मान्या डेवलपर्स नाम से एक फर्म बना ली। इसके बाद प्लॉटों को फर्म के नाम से ही बेचना शुरू कर दिया गया। शिकायत पर डीएम ने उपजिलाधिकारी एवं सहायक महानिरीक्षक निबंधन को मामले की जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि जमीन को प्लॉटिंग कर बेचने से पहले फर्म को उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत कराया जाना चाहिए था। स्टांप चोरी की नीयत से ऐसा किया गया।
बाद में डीएम न्यायालय में चले मुकदमे के दौरान पाया गया कि टैक्स को बचाने के लिए सतीश जायसवाल ने कागजों पर ‘‘मान्या डेवलपर्स‘‘ के नाम से एक फर्म बना ली। इस तरह से फर्म बनाकर 50,14,260 रुपये का स्टांप शुल्क चोरी की गई। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने कोर्ट में आदेश दिया कि मान्या डेवलपर्स के तीनों पार्टनरों से स्टांप शुल्क के 50,14,260 रुपये व 10 प्रतिशत अर्थदंड 5,01,426 रुपये वसूल किए जाएं।
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श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने तीन सितंबर 2019 को डीएम के यहां शिकायत की थी कि राजाबाग कालोनी निवासी सतीश जायसवाल ने ग्राम बिलगवां में 2.37 हेक्टेयर भूमि को वर्ष 2012 में अकृषिक घोषित कराकर ‘राम विहार‘ नाम से एक कालोनी बना ली। इसका विधिवत मानचित्र स्वीकृत कराया गया। प्लॉटों की बिक्री से होने वाली आय में इनकम टैक्स न देना पड़े इसलिए कागजों में मान्या डेवलपर्स नाम से एक फर्म बना ली। इसके बाद प्लॉटों को फर्म के नाम से ही बेचना शुरू कर दिया गया। शिकायत पर डीएम ने उपजिलाधिकारी एवं सहायक महानिरीक्षक निबंधन को मामले की जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि जमीन को प्लॉटिंग कर बेचने से पहले फर्म को उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत कराया जाना चाहिए था। स्टांप चोरी की नीयत से ऐसा किया गया।
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बाद में डीएम न्यायालय में चले मुकदमे के दौरान पाया गया कि टैक्स को बचाने के लिए सतीश जायसवाल ने कागजों पर ‘‘मान्या डेवलपर्स‘‘ के नाम से एक फर्म बना ली। इस तरह से फर्म बनाकर 50,14,260 रुपये का स्टांप शुल्क चोरी की गई। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने कोर्ट में आदेश दिया कि मान्या डेवलपर्स के तीनों पार्टनरों से स्टांप शुल्क के 50,14,260 रुपये व 10 प्रतिशत अर्थदंड 5,01,426 रुपये वसूल किए जाएं।
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