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आयुष्मान कार्ड लिया नहीं... पांच घंटे शव रोके रहे अस्पताल वाले
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बरेली। प्राइवेट अस्पतालों ने आयुष्मान योजना का मजाक बनाकर रख दिया है। चौकी चौराहा स्थित एक अस्पताल ने पहले तो आयुष्मान कार्ड से इलाज करने को ही मना कर दिया। परिजनों से पांच हजार रुपये जमाकर इलाज शुरू किया, लेकिन पांच दिन बाद महिला की मौत हो गई। परिजनों ने शव लेना चाहा तो कहा गया कि पहले 32 हजार का बिल जमा कराएं। बाद में 13 हजार रुपये जमा करवाकर शव परिजनों को सौंपा गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों हीलाहवाली का ही नतीजा है कि शहर के अधिकांश निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज करने से मना कर देते हैं। चौकी चौराहा स्थित एक निजी हॉस्पिटल में शनिवार को आंवला के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी 48 वर्षीय नीलम भारद्वाज पत्नी हरिओम भारद्वाज को तबीयत बिगड़ने पर भर्ती कराया गया। अस्पताल में बताया गया कि ब्रेन हैमरेज हुआ है। परिजनों ने आयुष्मान कार्ड से इलाज करने को कहा तो मना कर दिया गया। बाद में पांच हजार रुपये जमा करवाकर ही इलाज शुरू किया। गुरुवार सुबह नीलम की मौत हो गई। लेकिन अस्पताल ने ये कहकर शव देने से इंकार कर दिया कि पहले 32 हजार का बिल जमा करवाएं। परिजनों की सूचना पर पुलिस पहुंची ने दोनों पक्षों में समझौता कर दिया। परिजनों को 13 हजार रुपये जमा करने पड़े, तब जाकर महिला का शव दिया गया। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
‘मुझे इस मामले में अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।’
डा. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ
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स्वास्थ्य अधिकारियों हीलाहवाली का ही नतीजा है कि शहर के अधिकांश निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज करने से मना कर देते हैं। चौकी चौराहा स्थित एक निजी हॉस्पिटल में शनिवार को आंवला के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी 48 वर्षीय नीलम भारद्वाज पत्नी हरिओम भारद्वाज को तबीयत बिगड़ने पर भर्ती कराया गया। अस्पताल में बताया गया कि ब्रेन हैमरेज हुआ है। परिजनों ने आयुष्मान कार्ड से इलाज करने को कहा तो मना कर दिया गया। बाद में पांच हजार रुपये जमा करवाकर ही इलाज शुरू किया। गुरुवार सुबह नीलम की मौत हो गई। लेकिन अस्पताल ने ये कहकर शव देने से इंकार कर दिया कि पहले 32 हजार का बिल जमा करवाएं। परिजनों की सूचना पर पुलिस पहुंची ने दोनों पक्षों में समझौता कर दिया। परिजनों को 13 हजार रुपये जमा करने पड़े, तब जाकर महिला का शव दिया गया। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
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‘मुझे इस मामले में अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।’
डा. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ