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धोखाधड़ी के 10 साल पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया सदाकत
Wed, 23 Oct 2019 02:01 AM IST
बरेली ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2019 02:01 AM IST
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टेरर फंडिंग के मामले में एटीएस को गच्चा देकर परतापुर निवासी सरगना सदाकत शनिवार को ही सीजेएम कोर्ट बरेली में हाजिर होकर जेल चला गया। सदाकत धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के 10 साल पुराने मामले में बहनोई से जमानत तुड़वाकर जेल गया है। सब कुछ इतनी खामोशी से किया गया कि किसी को भनक तक नहीं लगी। मंगलवार को जब सदाकत की ओर से लखीमपुर खीरी कोर्ट में अर्जी पेश हुई तो उसके जेल चले जाने का पता चला।
प्रेमनगर थाने में 10 साल पहले एक रेलवे कर्मचारी ने मोबाइल नंबर के आधार पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महाराष्ट्र के अकोला जिले में रेलवे क्वार्टर आकोट निवासी विजय सहदेव तेलगोटे ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धारा में छह नवंबर, 2009 को तहरीर दी थी। इसमें जांच के बाद प्रेमनगर थाने में 28 जनवरी, 2010 को रिपोर्ट लिखी गई। विजय के मुताबिक वह बामसेफ संगठन से जुड़े थे। उनके मोबाइल पर 15 अक्तूबर, 2009 को एक मेसेज पहुंचा था। इसमें कहा गया था कि उन्होंने मोबाइल के लकी ड्रॉ में दो लाख पाउंड जीते हैं। संपर्क करने के लिए एक मोबाइल नंबर दिया था। संपर्क किया तो ईमेल पर उनकी जानकारी मांगी गई।
बाद में बताया गया कि 20 अक्तूबर, 2009 को उनके लकी ड्रॉ की रकम लंदन से रवाना होगी। बाद में बताया कि रकम भारत आ गई है पर कस्टम अफसरों ने हवाई अड्डे पर पकड़ लिया है। कथित कस्टम अफसर से फोन पर बात कराई तो उसने टैक्स भरने के बाद ही इनाम की रकम छोड़ने को कहा। एक अकाउंट नंबर दिया गया। इस पर प्रेमनगर थाने की एसबीआई शास्त्रीनगर ब्रांच में विजय ने 35 हजार रुपये जमा करा दिए गए। बाद में 40 हजार रुपये और मांगे गए जो उन्होंने नहीं दिए।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सदाकत और उसके गांव के ही साथी मुकीम के नाम इस मामले में खोले। दोनों के खिलाफ चार्जशीट भी लगाई गई।
चर्चा रही कि सदाकत ने कुछ रुपये वापस करके पीड़ित पक्ष को समझौते के लिए मना लिया है पर कोर्ट में मामले की सुनवाई अब भी चल रही थी जो गवाही, सबूत आदि के बाद आखिरी स्टेज में थी। नाम खुलने पर सदाकत ने शाही थाने के चकरपुर लमकन गांव निवासी बहनोई नफीस अहमद से जमानत कराई थी। शनिवार को नफीस ने बरेली सीजेएम कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी जमानत वापस ले ली। कहा, आरोपी सदाकत गलत संगत में फंस गया है, लिहाजा वह उसकी जमानत के दायित्व से मुक्ति चाहता है। उसकी जमानत खारिज कर दी जाए। जमानत खारिज होने के साथ ही सदाकत कोर्ट में बतौर आरोपी हाजिर हो गया। इस तरह जुगाड़ से सदाकत ने सरेंडर कर दिया और एटीएस उसकी गिरफ्तारी के लिए फील्डिंग लगाए ही रह गई।
प्रेमनगर थाने में 10 साल पहले एक रेलवे कर्मचारी ने मोबाइल नंबर के आधार पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महाराष्ट्र के अकोला जिले में रेलवे क्वार्टर आकोट निवासी विजय सहदेव तेलगोटे ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धारा में छह नवंबर, 2009 को तहरीर दी थी। इसमें जांच के बाद प्रेमनगर थाने में 28 जनवरी, 2010 को रिपोर्ट लिखी गई। विजय के मुताबिक वह बामसेफ संगठन से जुड़े थे। उनके मोबाइल पर 15 अक्तूबर, 2009 को एक मेसेज पहुंचा था। इसमें कहा गया था कि उन्होंने मोबाइल के लकी ड्रॉ में दो लाख पाउंड जीते हैं। संपर्क करने के लिए एक मोबाइल नंबर दिया था। संपर्क किया तो ईमेल पर उनकी जानकारी मांगी गई।
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बाद में बताया गया कि 20 अक्तूबर, 2009 को उनके लकी ड्रॉ की रकम लंदन से रवाना होगी। बाद में बताया कि रकम भारत आ गई है पर कस्टम अफसरों ने हवाई अड्डे पर पकड़ लिया है। कथित कस्टम अफसर से फोन पर बात कराई तो उसने टैक्स भरने के बाद ही इनाम की रकम छोड़ने को कहा। एक अकाउंट नंबर दिया गया। इस पर प्रेमनगर थाने की एसबीआई शास्त्रीनगर ब्रांच में विजय ने 35 हजार रुपये जमा करा दिए गए। बाद में 40 हजार रुपये और मांगे गए जो उन्होंने नहीं दिए।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सदाकत और उसके गांव के ही साथी मुकीम के नाम इस मामले में खोले। दोनों के खिलाफ चार्जशीट भी लगाई गई।
चर्चा रही कि सदाकत ने कुछ रुपये वापस करके पीड़ित पक्ष को समझौते के लिए मना लिया है पर कोर्ट में मामले की सुनवाई अब भी चल रही थी जो गवाही, सबूत आदि के बाद आखिरी स्टेज में थी। नाम खुलने पर सदाकत ने शाही थाने के चकरपुर लमकन गांव निवासी बहनोई नफीस अहमद से जमानत कराई थी। शनिवार को नफीस ने बरेली सीजेएम कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी जमानत वापस ले ली। कहा, आरोपी सदाकत गलत संगत में फंस गया है, लिहाजा वह उसकी जमानत के दायित्व से मुक्ति चाहता है। उसकी जमानत खारिज कर दी जाए। जमानत खारिज होने के साथ ही सदाकत कोर्ट में बतौर आरोपी हाजिर हो गया। इस तरह जुगाड़ से सदाकत ने सरेंडर कर दिया और एटीएस उसकी गिरफ्तारी के लिए फील्डिंग लगाए ही रह गई।