फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Court rejected the application of Sheeran Raza of Aala Hazrat family in Bareilly

Bareilly News: अदालत ने खारिज की आला हजरत खानदान के शीरान रजा की अर्जी, देना होगा हर्जाना

Fri, 16 Feb 2024 02:31 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 16 Feb 2024 02:31 PM IST
सार

 आला हजरत खानदान के शीरान रजा को राहत नहीं मिली है। घरेलू हिंसा के मुकदमे में निदा खान के लिए तीन लाख रुपये का हर्जाना व 15 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश कोर्ट ने दिया था। इस आदेश को एकतरफा बताते हुए शीरान ने कोर्ट में अर्जी देकर इसे खारिज करने की अपील की थी। इस अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। 

विज्ञापन
Court rejected the application of Sheeran Raza of Aala Hazrat family in Bareilly
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बरेली में घरेलू हिंसा के मुकदमे में निदा खान को तीन लाख रुपये का हर्जाना व 15 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश कोर्ट ने दिया था। आला हजरत खानदान के शीरान रजा ने इस आदेश को एकतरफा बताते हुए कोर्ट में अर्जी देकर इसे खारिज करने की अपील की थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजुला मिश्रा की कोर्ट ने शीरान की इस अर्जी को खारिज कर दिया।

विज्ञापन


कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छह माह में इस मुकदमे की कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया हुआ है। निदा खान की ओर से 13 सितंबर 2021 को अपनी गवाही दाखिल की गई थी। इसके बाद कई तारीखों पर बचाव पक्ष की ओर से निदा खान से जिरह की गई। समयाभाव के कारण जिरह पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने जिरह पूरी करने के लिए बचाव पक्ष को कई मौके दिए, लेकिन जिरह पूरी नहीं की गई। न तो वह खुद आए और न ही कोई स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया। 
विज्ञापन


Bareilly News: गवाही के लिए अदालत में हाजिर न होने पर इंस्पेक्टर के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद 19 अप्रैल 2023 को मोईन हसन की गवाही दाखिल की गई। इस गवाह से जिरह करने के लिए अदालत ने कई मौके दिए पर बचाव पक्ष की ओर से कोई हाजिर नहीं हुआ और न ही कोई स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया। कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष को साक्ष्य देने के लिए भी कई अवसर दिए गए, लेकिन कोई साक्ष्य न देने के कारण बचाव पक्ष का गवाही का मौका समाप्त करते हुए अंतिम बहस के बाद यह फैसला दिया गया। बचाव पक्ष का यह कहना सही नहीं है कि एकपक्षीय गवाही हुई है। कई मौके दिए जाने के बाद भी गवाहों से जिरह नहीं की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed