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सिविल एंक्लेवः सवा दो करोड़ से बने पोर्टा केबिन पर चढ़ी धूल की परत
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बरेली एअरपोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अब 40 करोड़ की लागत से बनवाई जा रही मेन बिल्डिंग
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पिछले साल मार्च में हवाई सेवाओं को शुरू कराने के लिए जल्दबाजी में कराए गए थे काम
बरेली। निर्माणाधीन सिविल एंक्लेव में करीब सवा दो करोड़ से बने पोर्टा केबिन का कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। पिछले साल मार्च में यहां से उड़ान शुरू करने की तैयारी थी मगर बाद में यह टल गया। अब अथॉरिटी यहां करीब 40 करोड़ की लागत से यात्रियों के लिए अस्थायी बिल्डिंग का निर्माण करा रही है। इसका करीब 60 फीसदी काम पूरा भी हो गया है।
पिछले साल मार्च में हवाई सेवा को शुरू करने के लिए हवाई अड्डे में पहले चरण के काम को जल्दबाजी में पूरा कराया गया था। इसमें हवाई पट्टी, एप्रेन और टैक्सी वे के साथ ही पोर्टा केबिन भी बनवाया गया था। इस अस्थायी पोर्टा केबिन में पैसेंजर के ठहरने के साथ ही वहां लगेज चेकिंग, एक्सरे मशीन, टिकट विंडों आदि का निर्माण कराया गया था। अकेले पोर्टा केबिन के लिए ही अथॉरिटी को करीब सवा दो करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले इसका उद्घाटन तो हो गया लेकिन उड़ान न शुरू होने से पोर्टा केबिन और उसमें लगाए गए उपकरण धूल फांक रहे हैं। इधर एयरपोर्ट अथॉरिटी अब करीब तीन हजार वर्गमीटर पर 40 करोड़ की लागत से हवाई अड्डे की मेन बिल्डिंग का निर्माण करा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर हवाई सेवा शुरू होने में इतनी देरी का पता होता तो पोर्टा केबिन के बजाय केवल मेन बिल्डिंग का ही निर्माण कराया जाता है। अफसरों का कहना है कि आगे पोर्टा केबिन का इस्तेमाल स्टोर के तौर किया जाएगा।
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पांच सौ केवीए का कनेक्शन मिलना बाकी, ड्रेनेज का काम भी अधूरा
पिछले साल हवाई अड्डे को शुरू करने के लिए हवाई अड्डे पर केवल 50 केवीए का ट्रांसफार्मर रख दिया गया था लेकिन मेन बिल्डिंग सहित पूरे हवाई अड्डे पर बिजली आपूर्ति के लिए पांच सौ केवीए की क्षमता वाले ट्रांसफार्मर की जरूरत है। एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि हवाई अड्डे में सब स्टेशन तो बन गया है लेकिन पावर कारपोरेशन को पांच सौ केवीए का कनेक्शन देना बाकी है। इसके अलावा हवाई अड्डे में जल निकासी की दिक्कत दूर करने के लिए करीब दो करोड़ से ड्रेनेज सिस्टम जल निगम को तैयार करना है लेकिन इस काम में देरी हो रही है।
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नागरिक उड्डयन मंत्री के सामने भी दिक्कत रखेंगे अफसर
29 मार्च को नागरिक उड्डयन मंत्री नंदगोपाल नंदी मुरादाबाद से वापस लखनऊ जाते वक्त यहां एयरपोर्ट पर रुककर निर्माण कार्यों की भी समीक्षा करेंगे। इस दौरान एयरपोर्ट के अधिकारी मंत्री के सामने हवाई अड्डे के निर्माण को लेकर आ रही बाधा के बारे में भी जानकारी देंगे।
‘हवाई अड्डे के लिए मेन बिजली कनेक्शन, ड्रेनेज आदि अभी व्यवस्थाएं पूरी होनी है। रही पोर्टा केबिन को आगे स्टोर या किसी दूसरी कामों के लिए इस्तेेमाल किया जाएगा।’
- राजीव कुलश्रेष्ठ, संयुक्त महाप्रंबंधक, एयरपोर्ट अथॉरिटी
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पिछले साल मार्च में हवाई सेवाओं को शुरू कराने के लिए जल्दबाजी में कराए गए थे काम बरेली। निर्माणाधीन सिविल एंक्लेव में करीब सवा दो करोड़ से बने पोर्टा केबिन का कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। पिछले साल मार्च में यहां से उड़ान शुरू करने की तैयारी थी मगर बाद में यह टल गया। अब अथॉरिटी यहां करीब 40 करोड़ की लागत से यात्रियों के लिए अस्थायी बिल्डिंग का निर्माण करा रही है। इसका करीब 60 फीसदी काम पूरा भी हो गया है।
पिछले साल मार्च में हवाई सेवा को शुरू करने के लिए हवाई अड्डे में पहले चरण के काम को जल्दबाजी में पूरा कराया गया था। इसमें हवाई पट्टी, एप्रेन और टैक्सी वे के साथ ही पोर्टा केबिन भी बनवाया गया था। इस अस्थायी पोर्टा केबिन में पैसेंजर के ठहरने के साथ ही वहां लगेज चेकिंग, एक्सरे मशीन, टिकट विंडों आदि का निर्माण कराया गया था। अकेले पोर्टा केबिन के लिए ही अथॉरिटी को करीब सवा दो करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले इसका उद्घाटन तो हो गया लेकिन उड़ान न शुरू होने से पोर्टा केबिन और उसमें लगाए गए उपकरण धूल फांक रहे हैं। इधर एयरपोर्ट अथॉरिटी अब करीब तीन हजार वर्गमीटर पर 40 करोड़ की लागत से हवाई अड्डे की मेन बिल्डिंग का निर्माण करा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर हवाई सेवा शुरू होने में इतनी देरी का पता होता तो पोर्टा केबिन के बजाय केवल मेन बिल्डिंग का ही निर्माण कराया जाता है। अफसरों का कहना है कि आगे पोर्टा केबिन का इस्तेमाल स्टोर के तौर किया जाएगा।
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पांच सौ केवीए का कनेक्शन मिलना बाकी, ड्रेनेज का काम भी अधूरा
पिछले साल हवाई अड्डे को शुरू करने के लिए हवाई अड्डे पर केवल 50 केवीए का ट्रांसफार्मर रख दिया गया था लेकिन मेन बिल्डिंग सहित पूरे हवाई अड्डे पर बिजली आपूर्ति के लिए पांच सौ केवीए की क्षमता वाले ट्रांसफार्मर की जरूरत है। एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि हवाई अड्डे में सब स्टेशन तो बन गया है लेकिन पावर कारपोरेशन को पांच सौ केवीए का कनेक्शन देना बाकी है। इसके अलावा हवाई अड्डे में जल निकासी की दिक्कत दूर करने के लिए करीब दो करोड़ से ड्रेनेज सिस्टम जल निगम को तैयार करना है लेकिन इस काम में देरी हो रही है।
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नागरिक उड्डयन मंत्री के सामने भी दिक्कत रखेंगे अफसर
29 मार्च को नागरिक उड्डयन मंत्री नंदगोपाल नंदी मुरादाबाद से वापस लखनऊ जाते वक्त यहां एयरपोर्ट पर रुककर निर्माण कार्यों की भी समीक्षा करेंगे। इस दौरान एयरपोर्ट के अधिकारी मंत्री के सामने हवाई अड्डे के निर्माण को लेकर आ रही बाधा के बारे में भी जानकारी देंगे।‘हवाई अड्डे के लिए मेन बिजली कनेक्शन, ड्रेनेज आदि अभी व्यवस्थाएं पूरी होनी है। रही पोर्टा केबिन को आगे स्टोर या किसी दूसरी कामों के लिए इस्तेेमाल किया जाएगा।’
- राजीव कुलश्रेष्ठ, संयुक्त महाप्रंबंधक, एयरपोर्ट अथॉरिटी