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अयोध्या फैसले पर रिव्यू पिटीशन के पक्ष में इमाम
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कहा, सियासत कर रहें हैं मुखालफत करने वाले, सर्व समाज ने किया समर्थन
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बरेली। शहर के तमाम इमामों ने अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इत्तेफाक न करने की बात कही है। उन्होंने साफ किया है कि वह रिव्यू पिटीशन के पक्ष में हैं, रिव्यू पिटीशन की मुखालफत करने वाले इस मुद्दे पर सियासत कर रहे हैं।
यह बात यहां कुतुबखाना सब्जी मंडी स्थित कुदरत उल्लाह मस्जिद में इमामों की आयोजित बैठक में कही गई। इस मुद्दे पर पांच सूत्री एक प्रस्ताव भी पास किया गया। जिसका सर्व समाज संगठन ने समर्थन किया है। साथ ही इस मामले में रिव्यू पिटीशन को लेकर अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के बढ़ते कदम का इस्तकबाल करते हुए उन्हें कौम का सच्चा रहबर बताया।
इस मौके पर सर्व समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाफिज फैजान रजा ने कहा कि शरई मामलों में राजनीति करना अच्छी बात नहीं बात नहीं है। रही बात मजहब की आड़ में राजनीति करने की तो इसमें शहर का तमाम सुन्नी मुसलमान उनकी नियत और नीति को भलीभांति जान चुका है। इस मौके पर मौलाना आरिफ मिसवाही, मौलाना खुर्शीद, मुफ्ती राहत खान कादरी, मौलाना राशिद रजा मरकजी, मौलाना सज्जाद कादरी, मौलाना तौसीफ रजा, मौलाना फिरोज, मौलाना नूरुल हसन आदि मौजूद रहे।
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यह प्रस्ताव हुए पास ---
ॎ बाबरी मस्जिद मामले में जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है हम उस फैसले से खुश नहीं।
ॎ मजहबे इस्लाम का यह मानना है कि मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है। कयामत तक उसको बदला नहीं जा सकता।
ॎ बाबरी मस्जिद बहाली के लिए कोई भी तंजीम या तहरीक कानूनी कोशिश करेगी हम में से उसकी कोई भी मुखालिफत नहीं करेगा।
ॎ बाबरी मस्जिद की जगह पर जो लोग मंदिर बनाने की हिमायत कर रहे हैं बरेली के इमाम उलमा उनके हिमायती नहीं।
ॎ शहर के इमाम का किसी भी सियासी तंजीम व तहरीक से कोई ताल्लुक नहीं है लेकिन मुसलमानों के हुकूक की बहाली के लिए मिल जुल कर कोशिश करेंगे।
यह बात यहां कुतुबखाना सब्जी मंडी स्थित कुदरत उल्लाह मस्जिद में इमामों की आयोजित बैठक में कही गई। इस मुद्दे पर पांच सूत्री एक प्रस्ताव भी पास किया गया। जिसका सर्व समाज संगठन ने समर्थन किया है। साथ ही इस मामले में रिव्यू पिटीशन को लेकर अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के बढ़ते कदम का इस्तकबाल करते हुए उन्हें कौम का सच्चा रहबर बताया।
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इस मौके पर सर्व समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाफिज फैजान रजा ने कहा कि शरई मामलों में राजनीति करना अच्छी बात नहीं बात नहीं है। रही बात मजहब की आड़ में राजनीति करने की तो इसमें शहर का तमाम सुन्नी मुसलमान उनकी नियत और नीति को भलीभांति जान चुका है। इस मौके पर मौलाना आरिफ मिसवाही, मौलाना खुर्शीद, मुफ्ती राहत खान कादरी, मौलाना राशिद रजा मरकजी, मौलाना सज्जाद कादरी, मौलाना तौसीफ रजा, मौलाना फिरोज, मौलाना नूरुल हसन आदि मौजूद रहे।
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यह प्रस्ताव हुए पास ---
ॎ बाबरी मस्जिद मामले में जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है हम उस फैसले से खुश नहीं।
ॎ मजहबे इस्लाम का यह मानना है कि मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है। कयामत तक उसको बदला नहीं जा सकता।
ॎ बाबरी मस्जिद बहाली के लिए कोई भी तंजीम या तहरीक कानूनी कोशिश करेगी हम में से उसकी कोई भी मुखालिफत नहीं करेगा।
ॎ बाबरी मस्जिद की जगह पर जो लोग मंदिर बनाने की हिमायत कर रहे हैं बरेली के इमाम उलमा उनके हिमायती नहीं।
ॎ शहर के इमाम का किसी भी सियासी तंजीम व तहरीक से कोई ताल्लुक नहीं है लेकिन मुसलमानों के हुकूक की बहाली के लिए मिल जुल कर कोशिश करेंगे।