साहब पर सख्त हुई सरकार तो 30 घंटे में 81 एफआईआर
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लखनऊ से आने वाले आदेशों पर कागजी घोड़े दौड़ाकर काम चलाने वाला सिस्टम पराली जलाने के मामलों में झटका खा गया। सेटेलाइट के जरिये पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि के बाद मुख्यमंत्री और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बावजूद पराली जलाने पर कार्रवाई न करने का कारण पूछा गया तो पूरी प्रशासनिक मशीनरी एकाएक हरकत में आ गई।
नतीजा यह हुआ कि 30 घंटों के अंदर जिले में 81 किसानों पर रिपोर्ट दर्ज कराकर आनन-फानन में शासन को रिपोर्ट भेज दी गई। इन किसानों से 87 हजार रुपये से ज्यादा जुर्माना भी वसूल किया गया है।
दिवाली से पहले ही देश के कई बड़े शहरों के भारी प्रदूषण की चपेट में आने के बाद एनजीटी ने पराली जलाने पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी जिलाधिकारियों को किसानों को पराली न जलाने देने की हिदायत दी थी। हालांकि अफसरों ने इसके बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई।
सेटेलाइट से बरेली समेत तमाम जिलों में पराली जलाने की घटनाएं पकड़ में आईं तो शासन ने दो दिन पहले डीएम नितीश कुमार को नोटिस जारी किया था। शासन की सख्ती का अंदाजा लगते ही पूरा प्रशासन सक्रिय हो गया। डीएम ने कृषि विभाग और राजस्व विभाग के स्टाफ पर शिकंजा कसा तो सोमवार दोपहर से जिले भर में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर और दूसरी कार्रवाई करने का ताबड़तोड़ सिलसिला शुरू हो गया जो मंगलवार को भी जारी रहा।
दो दिन में बहेड़ी, आंवला, फरीदपुर सहित दूसरी तहसीलों में किसानों के खिलाफ कुल मिलाकर 81 केस दर्ज कराकर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना डाला गया। इसमें से 87 हजार पांच सौ रुपये वसूल भी लिए गए। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक बहेड़ी में सबसे ज्यादा 40 किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मंगलवार देर शाम डीएम नितीश कुमार ने शासन को रिपोर्ट भी भेज दी। इसके मुताबिक अब तक पराली जलाने के 106 मामले सामने आने की बात कहते हुए 81 किसानों पर एफआईआर दर्ज कराए जाने की सूचना भेजी गई है।
जिला कृषि अधिकारी और उपनिदेशक को नोटिस, 15 लेखपालों का भी स्पष्टीकरण मांगा
सख्त निर्देशों के बावजूद पराली जलाने के मामलों को गंभीरता से न लेने पर शासन ने शिकंजा कसा तो प्रशासन के अफसरों ने भी सख्ती दिखानी शुरू कर दी। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी और उपनिदेशक अशोक यादव को डीएम नितीश कुमार ने नोटिस जारी कर दिया। इसके अलावा जिले भर में उन 15 लेखपालों को भी नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है जिनके इलाके में सेटेलाइट के जरिये पराली जलाने की घटनाएं होने की पुष्टि हुई है। बता दें कि यह कार्रवाई तब हो रही है जब जिले के ज्यादातर अपने खेतों में धान की फसल काटने के बाद उसकी पराली जला चुके हैं। अब गिनेचुने इलाकों में ही धान की फसल काटना बाकी रह गया है।
सोमवार को आठ, मंगलवार को दर्ज हुईं 73 एफआईआर
पराली जलाने के मामलों में सोमवार को शासन को भेजी गई प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में आठ एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद सोमवार देर रात भी जिले के विभिन्न थानों में कुछ और केस दर्ज हुए। मंगलवार को भी यह सिलसिला जारी रहा। मंगलवार की देर शाम को जिला प्रशासन ने शासन को भेजी रिपोर्ट में 81 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की सूचना भेजी है।
पराली जलाने के मामलों में सख्ती की जा रही है। पराली जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करें। -नितीश कुमार, जिलाधिकारी