बरेली: नागरिकता कानून के खिलाफ दरगाह आला हजरत से उठी आवाज
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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अब बरेली दरगाह आला हजरत स्थित मरकज अहले सुन्नत से भी आवाज उठी है। मंगलवार को बयान जारी करते हुए काजी-ए-हिंदुस्तान जानशीन ताजुश्शरिया मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी ने कहा कि नया कानून संविधान को बदलने की एक कोशिश है।
यह कानून मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद-14 (कानून के अनुसार समानता का अधिकार) और अनुच्छेद-15 (सरकार धर्म जाति लिंग भाषा और क्षेत्र के आधार पर नागरिकों में भेद भाव नहीं करेगी) का घोर उल्लंघन करता है। असजद रजा खां कादरी ने कहा कि शांति से विरोध करना हमारा हक है।
इसकी इजाजत हमें संविधान का अनुच्छेद-19 देता है। विरोधियों को भी यह आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता को नागरिकता संशोधन कानून का बायकॉट करना चाहिए। ये कानून हर धर्म और जाति के लिए नुक्सानदायक है। मुफ्ती असजद मियां ने गृह मंत्री बात का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं देश के संविधान का है।
यह देश संविधान से चलेगा तानाशाही से नहीं। असजद मियां ने कहा कि गृह मंत्री के शब्दों से ऐसा लगता है कि दुनिया भर के हिंदू नागरिकता के लिए प्रयास कर रहे हैं। भारत के अलावा कोई भी देश उन्हें नागरिकता देने को तैयार नहीं है, जबकि वह अच्छी तरह वाकिफ हैं कि कई देशों ने पहले नागरिकता दे दी है।
उन्हें याद रखना चाहिए कि अगर उसी तरह की नागरिकता का पैमाना अन्य देशों में अपनाया जाता है तो सबसे बड़ा नुकसान भारत को होगा। विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में सबसे अधिक एक करोड़ 75 लाख भारतीय अन्य देशों के नागरिक हैं।