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चिन्मयानंद प्रकरण : पीड़ित छात्रा और उसके भाई को बरेली में मिला एडमिशन
Fri, 18 Oct 2019 08:49 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 18 Oct 2019 08:49 PM IST
सार
- सुबह ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पिता के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे भाई-बहन
- छात्रा बोली- पढ़ाई पूरी करके बनना चाहती है प्रोफेसर, पीसीएस जे की कर रही तैयारी
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पुलिस के साथ विश्वविद्यालय जाती छात्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली छात्रा और उसके भाई को बरेली के कॉलेजों में एडमिशन मिल गया है। शुक्रवार को दोनों कड़ी सुरक्षा के बीच रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंचे और अपनी एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराई। मगर विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति में है कि छात्रा जेल में बंद है तो वह परीक्षा के लिए निर्धारित 75 फीसदी उपस्थिति कैसे पूरी करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पीड़िता और उसका भाई शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े आठ बजे ही विश्वविद्यालय पहुंच गए। उस समय तक अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी विश्वविद्यालय नहीं पहुंचे थे लेकिन छात्रा के आने की सूचना पर सभी तत्काल पहुंचे। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एके जैतली और लॉ के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने छात्रा के कॉलेज ट्रांसफर, उपस्थिति रजिस्टर, एडमिशन फॉर्म, परीक्षा फॉर्म, आईकार्ड और छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया शुरू कराई गई। इसे पूरा होने में करीब दो घंटे लगे।
इसके बाद बरेली के ही एक कॉलेज में छात्रा के भाई की एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराई गई। छात्रा ने एलएलएम तृतीय सेमेस्टर और उसके भाई ने एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में ट्रांसफर लिया है। मीडिया से बातचीत में छात्रा ने कहा कि वह एलएलएम की पढ़ाई पूरी करके प्रोफेसर बनना चाहती है। साथ ही पीसीएस (जे) की भी तैयारी कर रही है। अपना केस खुद लड़ने के सवाल पर उसने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट से वकील मिला हुआ है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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उपस्थिति पर फंसेगा पेच
संस्थागत छात्र-छात्राओं के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान छात्रा की पढ़ाई कैसे पूरी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर विधिक राय लेने की बात कही है। साथ ही छात्रा के पिता ने इस संबंध में कोर्ट में प्रार्थनापत्र देने को कहा है। बता दें कि 20 नवंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं भी शुरू हो रही हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन इसको लेकर भी परेशान है कि छात्रा के पेपर कैसे होंगे।
कोर्ट के निर्देशानुसार छात्रा और उसके भाई की एडमिशन प्रक्रिया पूरी करा दी गई है। उपस्थिति के मानकों के संबंध में विधिक राय ली जाएगी और कोर्ट के निर्देशानुसार ही कार्य किया जाएगा। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पीड़िता और उसका भाई शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े आठ बजे ही विश्वविद्यालय पहुंच गए। उस समय तक अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी विश्वविद्यालय नहीं पहुंचे थे लेकिन छात्रा के आने की सूचना पर सभी तत्काल पहुंचे। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एके जैतली और लॉ के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने छात्रा के कॉलेज ट्रांसफर, उपस्थिति रजिस्टर, एडमिशन फॉर्म, परीक्षा फॉर्म, आईकार्ड और छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया शुरू कराई गई। इसे पूरा होने में करीब दो घंटे लगे।
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इसके बाद बरेली के ही एक कॉलेज में छात्रा के भाई की एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराई गई। छात्रा ने एलएलएम तृतीय सेमेस्टर और उसके भाई ने एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में ट्रांसफर लिया है। मीडिया से बातचीत में छात्रा ने कहा कि वह एलएलएम की पढ़ाई पूरी करके प्रोफेसर बनना चाहती है। साथ ही पीसीएस (जे) की भी तैयारी कर रही है। अपना केस खुद लड़ने के सवाल पर उसने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट से वकील मिला हुआ है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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उपस्थिति पर फंसेगा पेच
संस्थागत छात्र-छात्राओं के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान छात्रा की पढ़ाई कैसे पूरी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर विधिक राय लेने की बात कही है। साथ ही छात्रा के पिता ने इस संबंध में कोर्ट में प्रार्थनापत्र देने को कहा है। बता दें कि 20 नवंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं भी शुरू हो रही हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन इसको लेकर भी परेशान है कि छात्रा के पेपर कैसे होंगे।
कोर्ट के निर्देशानुसार छात्रा और उसके भाई की एडमिशन प्रक्रिया पूरी करा दी गई है। उपस्थिति के मानकों के संबंध में विधिक राय ली जाएगी और कोर्ट के निर्देशानुसार ही कार्य किया जाएगा। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय