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बगैर सीवेेज ट्रीटमेंट, कूड़ा निस्तारण के नहीं बन सकते स्मार्ट सिटी
बरेली
Updated Sat, 09 Dec 2017 02:20 AM IST
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स्मार्ट सिटी मिशन के बाद भी शहर स्मार्ट बने रहें इसके लिए दिल्ली में देश भर के नगर विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों को बुलाया गया। विज्ञान भवन में तीन घंटे से अधिक चली कार्यशाला में बताया गया कि शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को मुख्य एजेंडे के रूप में लेकर चलना होगा। जब तक ये चालू नहीं हो जाते तब तक किसी भी शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कल्पना नहीं की जा सकती है। सभी शहरों में नगर निगम एक ऐसी सड़क बनाए, जिसे अंडरग्राउंड वर्क के नाम पर उखाड़ना न पड़े। यह मॉडल सड़क कहलाएगी।
कार्यशाला में मुख्य रूप से स्मार्ट सिटी, अमृत योजना और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर बात की गई। केंद्र में आवास और शहरी मामलों के सचिव डीएस मिश्र ने नगर विकास विभागों के प्रमुख सचिव, नगर विकास अधिकारी और नगर आयुक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। अगर पैसे की कमी आड़े आ रही है तो पीपीपी मोड पर काम शुरू किया जा सकता है। दक्षिण भारत के अधिकतर शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिससे शहरों का अशुद्ध पानी नदियों और समुद्र में नहीं जा रहा है। पुणे और इंदौर की तारीफ की गई। बताया गया कि शहर में सीवर लाइन का काम पहले हो, उसके बाद सड़क बननी चाहिए। एक इलाके में सीवर लाइन डालकर सड़क बनाइए और उसके दोनों किनारों पर अंडरग्राउंड काम के लिए स्पेस दीजिए। बिजली, इंटरनेट और अन्य अंडरग्राउंड वर्क इसी स्पेस से होने चाहिए ताकि बार-बार सड़क न खोदनी पड़े। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के काम में भी तेजी लाने को कहा गया।
जनवरी में आएगी 10 नए शहरों की लिस्ट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 10 शहरों की घोषणा अगले साल जनवरी के अंत में करेगी। आवास और शहरी मामलों के सचिव डीएस मिश्र ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस चरण की स्पर्द्धा में 20 शहरों ने हिस्सा लिया था। इनमें से पांच शहरों के प्रस्ताव अंतिम तिथि तक प्राप्त नहीं हुए थे। लिहाजा अब 15 शहरों के बीच मुकाबला है। स्मार्ट सिटी परियोजना में 10 शहरों को शामिल किया जाएगा। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पांचवें चरण की दौड़ में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित 20 शहरों में सबसे ज्यादा सात शहर उत्तर प्रदेश से, तीन पश्चिम बंगाल और दो-दो महाराष्ट्र तथा तमिलनाडु से हैं। यूपी के मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, रामपुर, सहारनपुर, रायबरेली से प्रस्ताव भेजे गए हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना में अब तक चार चरणों में 90 शहरों को शामिल किया जा चुका है।
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कार्यशाला में मुख्य रूप से स्मार्ट सिटी, अमृत योजना और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर बात की गई। केंद्र में आवास और शहरी मामलों के सचिव डीएस मिश्र ने नगर विकास विभागों के प्रमुख सचिव, नगर विकास अधिकारी और नगर आयुक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। अगर पैसे की कमी आड़े आ रही है तो पीपीपी मोड पर काम शुरू किया जा सकता है। दक्षिण भारत के अधिकतर शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिससे शहरों का अशुद्ध पानी नदियों और समुद्र में नहीं जा रहा है। पुणे और इंदौर की तारीफ की गई। बताया गया कि शहर में सीवर लाइन का काम पहले हो, उसके बाद सड़क बननी चाहिए। एक इलाके में सीवर लाइन डालकर सड़क बनाइए और उसके दोनों किनारों पर अंडरग्राउंड काम के लिए स्पेस दीजिए। बिजली, इंटरनेट और अन्य अंडरग्राउंड वर्क इसी स्पेस से होने चाहिए ताकि बार-बार सड़क न खोदनी पड़े। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के काम में भी तेजी लाने को कहा गया।
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जनवरी में आएगी 10 नए शहरों की लिस्ट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 10 शहरों की घोषणा अगले साल जनवरी के अंत में करेगी। आवास और शहरी मामलों के सचिव डीएस मिश्र ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस चरण की स्पर्द्धा में 20 शहरों ने हिस्सा लिया था। इनमें से पांच शहरों के प्रस्ताव अंतिम तिथि तक प्राप्त नहीं हुए थे। लिहाजा अब 15 शहरों के बीच मुकाबला है। स्मार्ट सिटी परियोजना में 10 शहरों को शामिल किया जाएगा। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पांचवें चरण की दौड़ में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित 20 शहरों में सबसे ज्यादा सात शहर उत्तर प्रदेश से, तीन पश्चिम बंगाल और दो-दो महाराष्ट्र तथा तमिलनाडु से हैं। यूपी के मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, रामपुर, सहारनपुर, रायबरेली से प्रस्ताव भेजे गए हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना में अब तक चार चरणों में 90 शहरों को शामिल किया जा चुका है।
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