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फसलों की बर्बादी का मामला सीएम तक पहुंचा
बरेली।
Updated Mon, 25 Sep 2017 01:21 AM IST
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िककिसान
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मानसून के अंतिम दौर में हुई तीन दिन की बारिश से अगैती प्रजाति के गन्ना और धान समेत खरीफ की अन्य फसलों के खेत में बिछने से नुकसान का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। प्रगतिशील किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को न सिर्फ फसल की बर्बादी की जानकारी ट्वीटर पर दी है बल्कि कृषि विभाग की लापरवाही की शिकायत भी की है।
अमर उजाला ने 24 सितंबर के अंक में ‘लगातार बारिश से किसान तबाह, अफसर बेपरवाह’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर बारिश और तेज हवा से धान और गन्ने की अगैती प्रजाति की फसलों में हुए नुकसान का मामला उठाया था। यह भी जिक्र किया था कि 48 घंटे के अंदर नुकसान का सर्वे कराने का नियम होने के बाद भी इंश्योरेंस कंपनी की ओर से खेतों में बिछी फसलों में हुए नुकसान का कोई सर्वे नहीं कराया गया। गन्ना, बागवानी और कृषि विभाग के अफसरों ने भी सारी जिम्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी बजाज आलिंयाज पर डालकर पल्ला झाड़ लिया। खुद कहीं भी मुआयना करने नहीं गए। अफसरों के रवैये से खफा अनिल साहनी समेत कई प्रगतिशील किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्वीटर पर अमर उजाला के समाचार के पीडीएफ साथ बारिश और तेज हवाओं से गन्ना, धान की अगैती प्रजाति के अलावा बागवानी फसलों के नुकसान की जानकारी दी।
पुराने अफसरों को हटाएं, गांवों में जाना अनिवार्य करें
अनिल साहनी ने मुख्यमंत्री से की शिकायत में कहा है कि बरेली में कृषि, गन्ना और बागवानी विभागों में अफसर पांच से 10 साल से जमे हैं जो किसानों के लिए काम न करके आंकड़ेबाजी से शासन प्रशासन को गुमराह करके सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। ऐसे अफसरों को हटाकर नए अफसरों की तैनाती की जाए। साथ ही तीनों विभाग के अफसरों को रोजाना कम से कम तीन घंटे गांव में किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुनना अनिवार्य करें। इस व्यवस्था की निगरानी जीपीएस से हो ताकि कोई भी गलत सूचना देकर शासन प्रशासन को गुमराह ना कर सके।
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किसान बारिश से अपनी फसलों के नुकसान के आवेदन कृषि विभाग, बैंक और बीमा कंपनी के दफ्तर में दें। इसके आधार पर खेत का सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के आकलन के बाद उनको क्लेम मिलेगा। शुभाशीष रावत, जोनल मैनेजर बजाज आलियांज इंश्योरेंस कंपनी
अमर उजाला ने 24 सितंबर के अंक में ‘लगातार बारिश से किसान तबाह, अफसर बेपरवाह’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर बारिश और तेज हवा से धान और गन्ने की अगैती प्रजाति की फसलों में हुए नुकसान का मामला उठाया था। यह भी जिक्र किया था कि 48 घंटे के अंदर नुकसान का सर्वे कराने का नियम होने के बाद भी इंश्योरेंस कंपनी की ओर से खेतों में बिछी फसलों में हुए नुकसान का कोई सर्वे नहीं कराया गया। गन्ना, बागवानी और कृषि विभाग के अफसरों ने भी सारी जिम्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी बजाज आलिंयाज पर डालकर पल्ला झाड़ लिया। खुद कहीं भी मुआयना करने नहीं गए। अफसरों के रवैये से खफा अनिल साहनी समेत कई प्रगतिशील किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्वीटर पर अमर उजाला के समाचार के पीडीएफ साथ बारिश और तेज हवाओं से गन्ना, धान की अगैती प्रजाति के अलावा बागवानी फसलों के नुकसान की जानकारी दी।
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पुराने अफसरों को हटाएं, गांवों में जाना अनिवार्य करें
अनिल साहनी ने मुख्यमंत्री से की शिकायत में कहा है कि बरेली में कृषि, गन्ना और बागवानी विभागों में अफसर पांच से 10 साल से जमे हैं जो किसानों के लिए काम न करके आंकड़ेबाजी से शासन प्रशासन को गुमराह करके सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। ऐसे अफसरों को हटाकर नए अफसरों की तैनाती की जाए। साथ ही तीनों विभाग के अफसरों को रोजाना कम से कम तीन घंटे गांव में किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुनना अनिवार्य करें। इस व्यवस्था की निगरानी जीपीएस से हो ताकि कोई भी गलत सूचना देकर शासन प्रशासन को गुमराह ना कर सके।
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किसान बारिश से अपनी फसलों के नुकसान के आवेदन कृषि विभाग, बैंक और बीमा कंपनी के दफ्तर में दें। इसके आधार पर खेत का सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के आकलन के बाद उनको क्लेम मिलेगा। शुभाशीष रावत, जोनल मैनेजर बजाज आलियांज इंश्योरेंस कंपनी