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दुर्घटनाओं में युवराज, लवजोत और शशांक की मौत से दहला सिस्टम
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बरेली। पीलीभीत बाईपास पर सेटेलाइट से बड़ा बाईपास फ्लाईओवर के बीच खूनी मोड़ों पर मौतों का सिलसिला जब युवराज और लवतोज से होकर शशांक तक पहुंच गया तब जाके सिस्टम दहला है। युवराज की मौत के बाद ही अमर उजाला ने एक मुहिम शुरू की। कोशिश थी पीलीभीत बाईपास के यह खूनी मोड़ अब किसी और के ‘युवराज’ की जान न लें। इसके लिए सड़क पर सुरक्षा में चूक के बिंदुओं को तलाशकर उन्हें दुरुस्त करने के लिए सिस्टम का ध्यान खींचा गया। खूनी मोड़ों पर हर मौत के बाद जिम्मेदारों ने सुरक्षा के इंतजाम करने का वादा किया, लेकिन अमल न होने से मौतों का सिलसिला नहीं थमा तब सिस्टम की नींद टूटी। अब सेटेलाइट से बाईपास फ्लाईओवर तक 11 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी ने पॉवर कारपोरेशन और वन विभाग के सहयोग से करीब 150 करोड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी है। तय डिजाइन में करीब 11 किलोमीटर तक नया डिवाइडर बनाने के साथ ही 17.50 मीटर चौड़ा रोड बनेगा। चौड़ीकरण में आने वाले खंभे हटाकर बिजली लाइन अंडरग्राउंड की जीएगी। इसके अलावा नई स्ट्रीट लाइटें, इंटरलॉकिंग फुटपाथ और ड्रेन का निर्माण भी होना है। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए अभी शासन की अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी (निर्र्माण खंड-भवन) ने इस रोड का पूरा नक्शा तैयार कर लिया है। इस रोड पर अभी सेटेलाइट से सौ फुटा रोड मोड़ होते हुए फीनिक्स मॉल के कुछ आगे तक ही केवल एक मीटर चौड़ा डिवाइडर बना हैं। बाईपास के आगे खूनी मोड़ मयूर वन चेतना केंद्र, हवाई अड्डा होते हुए बड़ा बाईपास फ्लाईओवर के पास तक रोड की चौड़ाई भी कम है। इससे यह पूरा क्षेत्र एक्सीडेंट जोन बना हुआ है, जबकि रोड के नए डिजाइन में सेटेलाइट से बड़ा बाईपास फ्लाईओवर तक ढाई मीटर चौड़ा डिवाइडर बनाने के साथ ही दोनों साइड में 8.75-8.75 मीटर चौड़ा रोड बनाया जाएगा। करीब ढाई मीटर इंटरलॉकिंग फुटपाथ और दोनों ओर नाले का निर्माण भी होना है। खास बात यह है कि रोड चौड़ीकरण से पहले सड़क के बीच में आ रहे बिजली के खंभों को हटाकर बिजली की भूमिगत लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए पॉवर कारपोरेशन ने करीब 21 करोड़ की डीपीआर तैयार की है। इसके अलावा 11 किलोमीटर तक डिवाइडर के बीच में नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई जाएंगी। सात करोड़ से यह काम खुद पीडब्ल्यूडी का विद्युत एवं यांत्रिकी खंड कराएगा।
वन विभाग ने क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए मांगे 2.7 करोड़
इस प्रोजेक्ट में मयूर वन चेतना केंद्र सहित कई जगहों पर वन विभाग की भूमि है। रोड चौड़ीकरण के लिए इन जगहों पर पेड़ कटान के बदले क्षतिपूर्ति पौधरोपण होना है। सर्वे के बाद वन विभाग ने 2.70 करोड़ का प्रोजेक्ट शामिल कराया है।
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प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेज दिया गया हैै। इसमें नए सिरे से रोड का डिजाइन तैयार हुआ है। इससे एक्सीडेंट पर भी अंकुश लगेगा और यातायात भी सुगम होगा। -वीएम शर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन
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पीडब्ल्यूडी (निर्र्माण खंड-भवन) ने इस रोड का पूरा नक्शा तैयार कर लिया है। इस रोड पर अभी सेटेलाइट से सौ फुटा रोड मोड़ होते हुए फीनिक्स मॉल के कुछ आगे तक ही केवल एक मीटर चौड़ा डिवाइडर बना हैं। बाईपास के आगे खूनी मोड़ मयूर वन चेतना केंद्र, हवाई अड्डा होते हुए बड़ा बाईपास फ्लाईओवर के पास तक रोड की चौड़ाई भी कम है। इससे यह पूरा क्षेत्र एक्सीडेंट जोन बना हुआ है, जबकि रोड के नए डिजाइन में सेटेलाइट से बड़ा बाईपास फ्लाईओवर तक ढाई मीटर चौड़ा डिवाइडर बनाने के साथ ही दोनों साइड में 8.75-8.75 मीटर चौड़ा रोड बनाया जाएगा। करीब ढाई मीटर इंटरलॉकिंग फुटपाथ और दोनों ओर नाले का निर्माण भी होना है। खास बात यह है कि रोड चौड़ीकरण से पहले सड़क के बीच में आ रहे बिजली के खंभों को हटाकर बिजली की भूमिगत लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए पॉवर कारपोरेशन ने करीब 21 करोड़ की डीपीआर तैयार की है। इसके अलावा 11 किलोमीटर तक डिवाइडर के बीच में नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई जाएंगी। सात करोड़ से यह काम खुद पीडब्ल्यूडी का विद्युत एवं यांत्रिकी खंड कराएगा।
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वन विभाग ने क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए मांगे 2.7 करोड़
इस प्रोजेक्ट में मयूर वन चेतना केंद्र सहित कई जगहों पर वन विभाग की भूमि है। रोड चौड़ीकरण के लिए इन जगहों पर पेड़ कटान के बदले क्षतिपूर्ति पौधरोपण होना है। सर्वे के बाद वन विभाग ने 2.70 करोड़ का प्रोजेक्ट शामिल कराया है।
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प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेज दिया गया हैै। इसमें नए सिरे से रोड का डिजाइन तैयार हुआ है। इससे एक्सीडेंट पर भी अंकुश लगेगा और यातायात भी सुगम होगा। -वीएम शर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन