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Bareilly News: संसाधनों के अभाव में ठप बीएसएल-2 लैब का फिर से होगा संचालन
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बरेली। कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए संचालित बीएसएल-2 लैब में अब हेपेटाइटिस मरीजों की वायरल लोड समेत अन्य वायरल रोगों से संबंधित जांच की जाएगी। करीब दो साल बाद तकनीकी खामियों को दूर कर लैब संचालन का निर्णय स्वास्थ्य विभाग ने लिया है।
इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर के बाद जून 2022 में बीएसएल-2 (बायो सेफ्टी लैब) तकनीकी खामी के चलते बंद हो गई। हालांकि, इस दौरान तक कोरोना का प्रकोप भी थमने लगा। ऐसे में जो स्टाफ तैनात था, उसे शासनादेश के तहत हटा दिया गया।
शासन ने अब फिर कोरोना के दौरान तैनात रहे कर्मियों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया है। लिहाजा, लैब में तैनात रहे माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट को बुला लिया गया है। सहायक स्टाफ से भी कार्य लिया जाएगा। लैब में जो तकनीकी खामियां थीं, वह भी दुरुस्त हो गईं हैं। जल्द लैब में जांच शुरू हो जाएगी।
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माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट प्रशांत चौहान के मुताबिक लैब में एक बार में 90 सैंपल की आरएनए बेस्ड आरटीपीसीआर जांच हो सकेगी। एक साथ कई सैंपल की जांच से समय भी बचेगा। मरीजों की रिपोर्ट जल्द मिलेगी। संबंधित इलाज भी समय से शुरू होने पर स्वस्थ होने की उम्मीद बढ़ेगी।
रिजेंट न मिलने से प्रभावित होने लगी थी जांच
कोरोना की तीसरी लहर के बाद संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट शुरू हुई। इधर, शासन ने एंटीजन किट में संदिग्ध मिले लोगों की ही आरटीपीसीआर जांच के निर्देश दिए। ऐसे में बीएसएल-2 लैब में जांच कम होने लगी। लिहाजा, रिजेंट की आपूर्ति भी कम हुई। तकनीकी खामी से आरटीपीसीआर जांच मशीन भी बंद हो गई। कई दिनों तक अफसर मशीन दुरुस्त होने के दावे करते रहे पर संचालन नहीं हो सका। अमर उजाला ब्यूरो
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इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर के बाद जून 2022 में बीएसएल-2 (बायो सेफ्टी लैब) तकनीकी खामी के चलते बंद हो गई। हालांकि, इस दौरान तक कोरोना का प्रकोप भी थमने लगा। ऐसे में जो स्टाफ तैनात था, उसे शासनादेश के तहत हटा दिया गया।
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शासन ने अब फिर कोरोना के दौरान तैनात रहे कर्मियों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया है। लिहाजा, लैब में तैनात रहे माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट को बुला लिया गया है। सहायक स्टाफ से भी कार्य लिया जाएगा। लैब में जो तकनीकी खामियां थीं, वह भी दुरुस्त हो गईं हैं। जल्द लैब में जांच शुरू हो जाएगी।
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माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट प्रशांत चौहान के मुताबिक लैब में एक बार में 90 सैंपल की आरएनए बेस्ड आरटीपीसीआर जांच हो सकेगी। एक साथ कई सैंपल की जांच से समय भी बचेगा। मरीजों की रिपोर्ट जल्द मिलेगी। संबंधित इलाज भी समय से शुरू होने पर स्वस्थ होने की उम्मीद बढ़ेगी।
रिजेंट न मिलने से प्रभावित होने लगी थी जांच
कोरोना की तीसरी लहर के बाद संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट शुरू हुई। इधर, शासन ने एंटीजन किट में संदिग्ध मिले लोगों की ही आरटीपीसीआर जांच के निर्देश दिए। ऐसे में बीएसएल-2 लैब में जांच कम होने लगी। लिहाजा, रिजेंट की आपूर्ति भी कम हुई। तकनीकी खामी से आरटीपीसीआर जांच मशीन भी बंद हो गई। कई दिनों तक अफसर मशीन दुरुस्त होने के दावे करते रहे पर संचालन नहीं हो सका। अमर उजाला ब्यूरो