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खुलासाः पहले नेपाल से युवतियों को बहला-फुसलाकर भारत लाते हैं दलाल, फिर खाड़ी देशों में कर देते हैं सप्लाई

Sun, 08 Nov 2020 09:11 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 08 Nov 2020 09:11 PM IST
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Brokers bring girls from Nepal to India then supplying them to Gulf countries
धनगढ़ी-नेपाल सीमा पर बना शांति पुनर्स्थापना गृह का शिविर - फोटो : amar ujala

नेपाल से दलालों के जरिए खरीदकर युवतियों को भारतीय महानगरों में बेचने का धंधा अर्से से चल रहा है। यहां से कई लड़कियों को खाड़ी देशों में बेच दिया जाता है तो बाकी को रेड लाइट एरिया और बंधुआ मजदूरी में धकेल दिया जाता है।

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सूत्रों का कहना है कि पहले दलाल बहाना बनाकर नेपाली युवतियों को फंसाते हैं। इसके बाद भारत लाकर उनको बेच देते हैं। यहां से इन युवतियों को खाड़ी देशों में भेज दिया जाता है। बुधवार रात को नेपाल पुलिस ने धनगढ़ी बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल पर छापा मारकर बेचने के लिए भारत लाई जा रहीं तीन युवतियों समेत सात लोगों को पकड़ा था। इन युवतियों को भारत लाकर खाड़ी देशों में भेजा जाना था। बताया जाता है कि इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाया गया था।
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बता दें मानव तस्करी रोकने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी, नेपाल एपीएफ, माइती नेपाल, शांति पुर्नस्थापना जैसी संस्थाएं सक्रिय हैं। बावजूद इसके दलालों के जरिए नेपाल से भारत और अन्य देशों के लिए युवतियों की तस्करी पर रोक नहीं लग पाती। अधिकतर युवतियां नेपाल के सिंधुपाल चैक, सिंधुली, सर्लाही, काठमांडू आदि जिलों से लाई जाती हैं। बाद में इन्हें किसी तरह बॉर्डर पार कराकर भारत के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू आदि महानगरों में बेच दिया जाता है। 
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बॉर्डर पर तैनात शांति पुर्नस्थापना के कोआर्डिनेटर उमेश शिवाकोटी ने बताया कि सन 2020 में उनकी संस्था ने भारत ले जाई जा रहीं 45 लड़कियों को पकड़ा। उन्होंने बताया जो लड़कियां पकड़ी जाती हैं उनको परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाता है। परिजनों के न आने तक युवतियां कार्यालय में ही रहती हैं। अब भी चार लड़कियां कार्यालय में हैं। इसके अलावा उनके साथ पकड़े गए लड़कों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाता है।  

माइती नेपाल के संयोजक शिवचरण चैधरी ने बताया कि बीते माह नेपाल से तस्करी कर ले जाई गईं दो लड़कियों को दिल्ली से छुड़ाकर लाया गया। जिसमें एक लड़की को दिल्ली से विदेश भेजा जा रहा था। वापस लाई गईं दोनों लड़कियां रौतहट और मकवानपुर जिलों की हैं, जिनको उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इस साल संस्था ने कैलाली जिले में बॉर्डर से 42 युवतियों को पकड़ा, जिनको परिजनों को सौंपा जा चुका है। 
 

शादी और नौकरी का देते हैं झांसा

कई ऐसे नेपाली युवक भी होते हैं जो नेपाली युवतियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर फंसाते हैं। कुछ दलाल तो इनसे शादी तक कर लेते हैं। बाद में भारत में काम करने का बहाना बनाकर लाते हैं और बेच देते हैं। 

मानव तस्करी को लेकर सीमा पर पुलिस और एसएसबी काफी गंभीर है, जो सीमा पर बराबर नजर रखे हुए है। पुलिस अब तक कई लड़कियों और उनके साथ दलालों को पकड़ चुकी है। पकड़े गई युवतियों को नेपाल की पुलिस की मदद से नेपाल वापस भेजा जा चुका है। 
-विजय ढुल, एसपी

भारत-नेपाल की गौरीफंटा सीमा पर हर समय एसएसबी सतर्क रहती है। हर आने वाले से पूछताछ होती है, किसी भी तरह का शक होने पर एसएसबी की महिला जवान जानकारी करती हैं। पकड़ी गई लड़कियों को नेपाल पुलिस तथा वहां के एनजीओ के सदस्यों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया जाता है।
-मुन्ना सिंह, कमांडेंट, 39 वी वाहिनी, गदनियां मुख्यालय

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