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Bareilly News: बारिश में बढ़ा बैक्टीरिया, वायरस का हमला, 32 सौ मरीज पहुंचे ओपीडी
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बरेली। तेज बारिश के बाद तापमान में आठ से दस डिग्री की बढ़त के बीच जरा सी लापरवाही बीमार बना रही है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में पहली बार रिकॉर्ड तीन हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ। आंत, फेफड़ों के संक्रमण समेत त्वचा रोगी ज्यादा रहे।
सोमवार को सुबह आठ बजे ओपीडी खुली लेकिन मरीजों की कतार पहले ही लग गई थी। पर्चा काउंटर के बाद ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेने और फिर दवा लेने के लिए नोकझोंक की स्थिति रही। पर्चा काउंटर पर दोपहर दो बजे तक नए और पुराने 3,209 मरीजों को डॉक्टरों ने देखा।
आम दिनों में 1200 से 1400 मरीजों की ओपीडी होती है। सोमवार को यह संख्या 2200 से 2400 पहुंचती है। सोमवार को ओपीडी में 800 मरीज बढ़ने से आपाधापी की स्थिति रही। पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, गैर संचारी जांच के लिए मरीजों की कतार रही। दोपहर में तेज धूप, उमस ने भी बेहाल किया।
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ओपीडी के बाहर कतार के चलते कई तीमारदार खुद लाइन में लगे और मरीजों को ओपीडी के बाहर पेड़ की छांव में बिठा दिया। नंबर आने पर मरीज को बुला रहे थे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक बारिश और उमस बैक्टीरिया, वायरस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल होता है। दूषित पानी पीने और भोजन के सेवन से आंतों में ई-कोलाई, रोटावायरस का संक्रमण बढ़ता है।
फंगल इंफेक्शन समेत कीड़े काटने के मामले भी बढ़े
डॉक्टर के मुताबिक बारिश में भीगने के बाद ज्यादा देर गीले कपड़े में रहने और फिर अच्छे से न नहाने की वजह से नाजुक अंगों पर फंगल संक्रमण की आशंका रहती है। जो मरीज ओपीडी पहुंचे उनमें एलर्जी, दाद, खाज, रूखी त्वचा, एग्जिमा के मरीज ज्यादा रहे। बारिश के दौरान पखी ज्यादा हो जाते हैं। सोने के दौरान कीड़े दबने से सड़न के भी मामले पहुंचे।
417 लोगों को लगी एआरवी, नए मामले डेढ़ सौ के पार
तीन सौ बेड अस्पताल की एआरवी क्लीनिक पर सोमवार को कुत्ते, बिल्ली, चूहे, छछूंदर के काटने पर एआरवी लगवाने वाले लोगों की कतार रही। दोपहर दो बजे तक नए पर्चे करीब डेढ़ सौ बने। दूसरी, तीसरी, चौथी डोज लगवाने ढाई सौ से ज्यादा लोग पहुंचे। प्रभारी डॉ. फैसल के मुताबिक, 98 फीसदी मामले कुत्ते के हमले के रहे। बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
दोपहर एक बजे पहुंचे डॉक्टर, दिव्यांग हुए बेहाल
सीएमओ कार्यालय में दिव्यांगता सत्यापन, प्रमाणपत्र और नवीनीकरण के लिए पहुंचे दिव्यांगों को करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। सुबह 10 बजे पहुंचे दिव्यांगों की जांच दोपहर एक बजे से शुरू हुई। स्टाफ के मुताबिक, जिला अस्पताल के ही डॉक्टर शिविर में मरीजों को देखते हैं। जब ओपीडी खत्म हुई तब डॉक्टर आए। 76 लोगों को स्लॉट के तहत बुलाया था। 48 के प्रमाणपत्र बने।
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सोमवार को सुबह आठ बजे ओपीडी खुली लेकिन मरीजों की कतार पहले ही लग गई थी। पर्चा काउंटर के बाद ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेने और फिर दवा लेने के लिए नोकझोंक की स्थिति रही। पर्चा काउंटर पर दोपहर दो बजे तक नए और पुराने 3,209 मरीजों को डॉक्टरों ने देखा।
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आम दिनों में 1200 से 1400 मरीजों की ओपीडी होती है। सोमवार को यह संख्या 2200 से 2400 पहुंचती है। सोमवार को ओपीडी में 800 मरीज बढ़ने से आपाधापी की स्थिति रही। पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, गैर संचारी जांच के लिए मरीजों की कतार रही। दोपहर में तेज धूप, उमस ने भी बेहाल किया।
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ओपीडी के बाहर कतार के चलते कई तीमारदार खुद लाइन में लगे और मरीजों को ओपीडी के बाहर पेड़ की छांव में बिठा दिया। नंबर आने पर मरीज को बुला रहे थे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक बारिश और उमस बैक्टीरिया, वायरस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल होता है। दूषित पानी पीने और भोजन के सेवन से आंतों में ई-कोलाई, रोटावायरस का संक्रमण बढ़ता है।
फंगल इंफेक्शन समेत कीड़े काटने के मामले भी बढ़े
डॉक्टर के मुताबिक बारिश में भीगने के बाद ज्यादा देर गीले कपड़े में रहने और फिर अच्छे से न नहाने की वजह से नाजुक अंगों पर फंगल संक्रमण की आशंका रहती है। जो मरीज ओपीडी पहुंचे उनमें एलर्जी, दाद, खाज, रूखी त्वचा, एग्जिमा के मरीज ज्यादा रहे। बारिश के दौरान पखी ज्यादा हो जाते हैं। सोने के दौरान कीड़े दबने से सड़न के भी मामले पहुंचे।
417 लोगों को लगी एआरवी, नए मामले डेढ़ सौ के पार
तीन सौ बेड अस्पताल की एआरवी क्लीनिक पर सोमवार को कुत्ते, बिल्ली, चूहे, छछूंदर के काटने पर एआरवी लगवाने वाले लोगों की कतार रही। दोपहर दो बजे तक नए पर्चे करीब डेढ़ सौ बने। दूसरी, तीसरी, चौथी डोज लगवाने ढाई सौ से ज्यादा लोग पहुंचे। प्रभारी डॉ. फैसल के मुताबिक, 98 फीसदी मामले कुत्ते के हमले के रहे। बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
दोपहर एक बजे पहुंचे डॉक्टर, दिव्यांग हुए बेहाल
सीएमओ कार्यालय में दिव्यांगता सत्यापन, प्रमाणपत्र और नवीनीकरण के लिए पहुंचे दिव्यांगों को करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। सुबह 10 बजे पहुंचे दिव्यांगों की जांच दोपहर एक बजे से शुरू हुई। स्टाफ के मुताबिक, जिला अस्पताल के ही डॉक्टर शिविर में मरीजों को देखते हैं। जब ओपीडी खत्म हुई तब डॉक्टर आए। 76 लोगों को स्लॉट के तहत बुलाया था। 48 के प्रमाणपत्र बने।