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Atiq Ashraf Murder: बरेली जेल में चलता था अशरफ का सिक्का, उमेश पाल की हत्या से पहले मिलने आए थे शूटर
Sun, 16 Apr 2023 08:26 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाल ब्यूरो, बरेली
अमर उजाल ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 16 Apr 2023 08:26 AM IST
सार
अशरफ को नैनी जेल से प्रशासनिक आधार पर 11 जुलाई 2020 को बरेली लाया गया था। इसके बाद से वह कभी-कभार ही पेशी पर प्रयागराज ले जाया गया। हाल ही में 12 अप्रैल को उसे प्रयागराज ले जाया गया था, जहां उसकी और उसके भाई अतीक की हत्या कर दी गई।
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प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
माफिया अतीक का भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ पौने तीन साल पहले बरेली जिला जेल (केंद्रीय जेल टू) में आया था। इतने वक्त में उसने यहां सिक्का जमा लिया। जेल में रहते हुए ही उसने उमेश पाल हत्याकांड की साजिश रची थी। उमेश की हत्या से पहले असद और शूटरों ने जेल में अशरफ से मुलाकात की थी। उससे करीबी में वरिष्ठ जेल अधीक्षक समेत कई अफसरों और जेल कर्मियों पर गाज गिरी थी।
अशरफ को नैनी जेल से प्रशासनिक आधार पर 11 जुलाई 2020 को बरेली लाया गया था। इसके बाद से वह कभी-कभार ही पेशी पर प्रयागराज ले जाया गया। हाल ही में 12 अप्रैल को उसे प्रयागराज ले जाया गया था। वहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था और 18 अप्रैल को उसे बरेली जेल वापस लौटकर आना था। इससे पहले ही वहां उसकी और अतीक की हत्या कर दी गई। इस खबर से जहां जेल के अफसरों व आम स्टाफ ने राहत की सांस ली है, वहीं अशरफ की कृपा से मालदार हुए स्टाफ की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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अशरफ को नैनी जेल से प्रशासनिक आधार पर 11 जुलाई 2020 को बरेली लाया गया था। इसके बाद से वह कभी-कभार ही पेशी पर प्रयागराज ले जाया गया। हाल ही में 12 अप्रैल को उसे प्रयागराज ले जाया गया था। वहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था और 18 अप्रैल को उसे बरेली जेल वापस लौटकर आना था। इससे पहले ही वहां उसकी और अतीक की हत्या कर दी गई। इस खबर से जहां जेल के अफसरों व आम स्टाफ ने राहत की सांस ली है, वहीं अशरफ की कृपा से मालदार हुए स्टाफ की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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जेल में तैयार कर लिया था सिंडीकेट
जेल में पौने तीन साल गुजारने के दौरान अशरफ ने गजब का सिंडीकेट स्थापित कर लिया था। वह जेल में नवरात्र पर हिंदू बंदियों को फलाहार और रोजे में मुस्लिम बंदियों के लिए इफ्तार की व्यवस्था करता था। जेल में होने वाले क्रिकेट लीग व अन्य गतिविधियों में भी अशरफ की ओर से रुपये खर्च किए जाते थे। अफसरों के इशारे पर जेल स्टाफ उसे मोबाइल पर बात करने, अवैध तरीके से एक आधार कार्ड पर कई लोगों से मुलाकात कराने के साथ ही मनमाफिक भोजन आदि की व्यवस्था व अन्य सहूलियतें देता था।
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अशरफ के करीबी सद्दाम व लल्ला गद्दी जैसे लोग उन्हें इनाम से बख्शते थे। जेल में अशरफ का रुतबा ऐसा था कि पीलीभीत से उसके लिए स्पेशल बिरयानी मंगाई जाती थी। जेल की बिल्लियां भी दूध और बिस्किट खाने के लिए उसकी बैरक के चक्कर काटती थीं। बंदियों का ख्याल रखने की वजह से उसकी कभी कोई शिकायत भी नहीं होती थी।