{"_id":"5d4888e28ebc3e6d0d0e5ad6","slug":"artical-370-bareilly-news-bly371315615","type":"story","status":"publish","title_hn":"कश्मीर के मौकापरस्तों को अब रास्ते पर आना पड़ेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीर के मौकापरस्तों को अब रास्ते पर आना पड़ेगा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब वहां भारत और पाकिस्तान दोनों नावों की सवारी करने वाले मौकापरस्तों को रास्ते पर आना पड़ेगा। अलगाववादियों का मनोबल गिरेगा और सरकार का जो पैसा वहां आतंकवाद से मोर्चा लेने और शांति कायम रखने पर खर्च होता है, वह कश्मीर के विकास पर खर्च होगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा कश्मीरी युवाओं को मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ने के बाद वे पत्थरबाजी और आतंक का रास्ता छोड़कर कारोबार की ओर बढ़ेंगे। आतंक का रिक्रूटमेंट बंद होगा तो दुश्मन पड़ोसी देश के मंसूबे भी आसानी से पूरे नहीं हो पाएंगे।
कश्मीर में मेरी तैनाती उस दौर में हुई थी जब आतंकी एक-दो की तादाद में नहीं बल्कि पूरे झुंड में आकर हमला करते थे। अनुच्छेद 370 कश्मीर में अलगाववादियों के लिए अलगाव का जरिया बना लिया था। राजनीति दलों ने भी इसे अलग-अलग तौर पर पेश किया और इसी वजह से कश्मीर देश से अलग-थलग हो गया। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से फायदा उठा रहे अलगाववादियों ने अनुच्छेद 370 को एक तरह से कश्मीरियत का नाम दे दिया। कश्मीर में इससे पूरी व्यवस्था एकपक्षीय हो गई। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में शासन सुदृढ़ होगा तो मौकापरस्तों के लिए अपना यह खेल बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। इसी अनुच्छेद की वजह से कश्मीर का विकास अटका हुआ था जो अब वहां पर्यटन बढ़ने के साथ आगे बढ़ सकेगा। रोजगार के अवसर पत्थरों के रास्ते पर चल रहे युवाओं को खींचकर कारोबार की ओर उन्मुख करेंगे। मेरा मानना है कि सबके मेलजोल से वहां जो संस्कृति पैदा होगी वही असली कश्मीरियत होगी। इससे अलगाववादियों का मनोबल गिरेगा। कश्मीर के लोग कारोबार के लिए दूसरे राज्यों में जाएंगे तो उन्हें शक की नजर से नहीं देखा जाएगा। मुझे लगता है कि इस मुद्दे के राजनीतिक फायदे भी हो सकते हैं लेकिन सबसे ज्यादा फायदा कश्मीर की अवाम को ही होगा।
अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक फहरेगा तिरंगा
कश्मीर में आतंकी गतिविधियां की मुख्य वजह बेरोजगारी है। अब अनुच्छेद 370 खत्म करने का निर्णय हो गया है इसलिए अब वहां उद्योग धंधे भी लगेंगे। संभावना है कि जब युवाओं को रोजगार मिलेगा तो वे पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों में भी शामिल नहीं होंगे। - एनडी पांडेय, पूर्व सैनिक
विज्ञापन
इस अनुच्छेद को पहले ही हटाया जाना चाहिए था लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकारों की इच्छाशक्ति की कमी से इसे हटाए जाने के लिए ठोस पहल नहीं की गई। मोदी सरकार का ये एतिहासिक फैसला है। अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगा फहराया जाए सकेगा। - जेएस भाकुनी, पूर्व सैनिक
विज्ञापन
कश्मीर में मेरी तैनाती उस दौर में हुई थी जब आतंकी एक-दो की तादाद में नहीं बल्कि पूरे झुंड में आकर हमला करते थे। अनुच्छेद 370 कश्मीर में अलगाववादियों के लिए अलगाव का जरिया बना लिया था। राजनीति दलों ने भी इसे अलग-अलग तौर पर पेश किया और इसी वजह से कश्मीर देश से अलग-थलग हो गया। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से फायदा उठा रहे अलगाववादियों ने अनुच्छेद 370 को एक तरह से कश्मीरियत का नाम दे दिया। कश्मीर में इससे पूरी व्यवस्था एकपक्षीय हो गई। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में शासन सुदृढ़ होगा तो मौकापरस्तों के लिए अपना यह खेल बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। इसी अनुच्छेद की वजह से कश्मीर का विकास अटका हुआ था जो अब वहां पर्यटन बढ़ने के साथ आगे बढ़ सकेगा। रोजगार के अवसर पत्थरों के रास्ते पर चल रहे युवाओं को खींचकर कारोबार की ओर उन्मुख करेंगे। मेरा मानना है कि सबके मेलजोल से वहां जो संस्कृति पैदा होगी वही असली कश्मीरियत होगी। इससे अलगाववादियों का मनोबल गिरेगा। कश्मीर के लोग कारोबार के लिए दूसरे राज्यों में जाएंगे तो उन्हें शक की नजर से नहीं देखा जाएगा। मुझे लगता है कि इस मुद्दे के राजनीतिक फायदे भी हो सकते हैं लेकिन सबसे ज्यादा फायदा कश्मीर की अवाम को ही होगा।
विज्ञापन
अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक फहरेगा तिरंगा
कश्मीर में आतंकी गतिविधियां की मुख्य वजह बेरोजगारी है। अब अनुच्छेद 370 खत्म करने का निर्णय हो गया है इसलिए अब वहां उद्योग धंधे भी लगेंगे। संभावना है कि जब युवाओं को रोजगार मिलेगा तो वे पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों में भी शामिल नहीं होंगे। - एनडी पांडेय, पूर्व सैनिक
विज्ञापन
इस अनुच्छेद को पहले ही हटाया जाना चाहिए था लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकारों की इच्छाशक्ति की कमी से इसे हटाए जाने के लिए ठोस पहल नहीं की गई। मोदी सरकार का ये एतिहासिक फैसला है। अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगा फहराया जाए सकेगा। - जेएस भाकुनी, पूर्व सैनिक